Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अध्याय 'टार्च बेचनेवाले' के परिचय में लेखक हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय और उनकी साहित्यिक यात्रा का संक्षिप्त विवरण दिया गया है। हरिशंकर परसाई का जन्म जमानी गाँव, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। अध्यापन कार्य के बाद वे सन् 1947 से स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हुए। उन्होंने जबलपुर से 'वसुधा' नामक साहित्यिक पत्रिका निकाली। परसाई ने व्यंग्य विधा को साहित्यिक प्रतिष्ठा प्रदान की और उनके व्यंग्य-लेख समाज की विसंगतियों और विडंबनाओं पर करारी चोट करते हैं। उनकी भाषा प्रयोग में कुशलता और बोलचाल के शब्दों का सटीक चयन उनकी रचनाओं की विशेषता है। उन्होंने दो दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें कहानी-संग्रह, उपन्यास, निबंध-संग्रह और व्यंग्य-लेख संग्रह शामिल हैं। इस परिचय से पाठक को लेखक की पृष्ठभूमि और व्यंग्य विधा में उनके योगदान की जानकारी मिलती है।
- हरिशंकर परसाई का जन्म मध्य प्रदेश के जमानी गाँव में हुआ।
- उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया।
- सन् 1947 से वे स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हुए।
- परसाई ने व्यंग्य विधा को साहित्यिक प्रतिष्ठा दिलाई।
- उनकी भाषा प्रयोग में बोलचाल के शब्दों का सटीक चयन होता है।
- उन्होंने दो दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं।
- 📌 व्यंग्य: समाज की कमियों और विसंगतियों पर कटाक्षपूर्ण लेखन।
- 📌 साहित्यिक प्रतिष्ठा: किसी साहित्यिक विधा को मान्यता और सम्मान दिलाना।
टार्च बेचनेवाले
व्याख्याटार्च बेचनेवाले
इस खंड में लेखक ने एक टार्च बेचने वाले व्यक्ति की कहानी प्रस्तुत की है, जो पहले चौराहों पर टार्च बेचता था। अचानक वह कुछ दिनों के लिए गायब हो जाता है और फिर दाढ़ी बढ़ाकर, लंबा कुरता पहनकर वापस आता है। जब लेखक उससे पूछता है कि वह कहाँ था और दाढ़ी क्यों बढ़ाई है, तो वह कहता है कि अब वह बाहरी टार्च नहीं बेचता, बल्कि आत्मा के भीतर टार्च जलाने का काम करता है। लेखक उसकी बातों से आश्चर्यचकित होता है और उससे पूछता है कि उसने ऐसा परिवर्तन कैसे किया। टार्च बेचने वाला व्यक्ति एक गुप्त घटना का उल्लेख करता है जिसने उसका जीवन बदल दिया। कहानी में यह बताया गया है कि वह व्यक्ति जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए टार्च बेचता था, लेकिन बाद में उसने आत्मा के भीतर प्रकाश जगाने का मार्ग अपनाया। यह कहानी समाज में व्याप्त अंधकार और प्रकाश के प्रतीकात्मक रूप में टार्च का उपयोग करती है।
- टार्च बेचने वाला पहले चौराहों पर टार्च बेचता था।
- कुछ दिनों के बाद वह दाढ़ी बढ़ाकर और कुरता पहनकर वापस आता है।
- वह अब बाहरी टार्च नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर टार्च जलाने की बात करता है।
- लेखक उससे उसके परिवर्तन के कारण पूछता है।
- टार्च बेचने वाला व्यक्ति जीवन के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है।
- 📌 टार्च: प्रकाश देने वाला उपकरण।
- 📌 आत्मा का टार्च: आध्यात्मिक जागरूकता और अंदरूनी प्रकाश।
दोस्तों की पाँच साल बाद की मुलाकात
व्याख्यादोस्तों की पाँच साल बाद की मुलाकात
यह खंड टार्च बेचने वाले और उसके दोस्त की पाँच साल बाद की मुलाकात का वर्णन करता है। दोनों ने जीवन में सफलता पाने के लिए अलग-अलग रास्ते चुने थे। टार्च बेचने वाला चौराहों पर जाकर लोगों को अंधकार का भय दिखाकर टार्च बेचता था। पाँच साल बाद जब वह दोस्त से म
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्रश्न - ‘अपू के साथ ढाई साल’ हिंदी गद्य साहित्य की विधा है।
उत्तर:
(ग) संस्मरण
Q2.प्रश्न - ‘पथेर पांचाली’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक थे ।
उत्तर:
(क) सत्यजीत राय
Q3.प्रश्न - ‘पथेर पांचाली’ फिल्म किस रचनाकार के उपन्यास पर आधारित है?
उत्तर:
(ख) बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय
Q4.प्रश्न - ‘पथेर पांचाली’ किस भाषा की फिल्म थी और कब प्रदर्शित हुई?
उत्तर:
(घ) बांग्ला-1955
Q5.प्रश्न- ‘पथेर पांचाली’ का हिंदी अनुवाद है।
उत्तर:
(क) पथ-गीत
Q6.प्रश्न - ‘पथेर पांचाली’फिल्म की शूटिंग कितने साल तक चली?
उत्तर:
(घ) ढाई साल
Q7.प्रश्न - ‘पथेर पांचाली’ फिल्म में अपू की भूमिका निभाने वाले लड़के का क्या नाम था?
उत्तर:
(ख) सुबीर बनर्जी
Q8.प्रश्न - फिल्म में इंदिरा ठाकरून की भूमिका निभाने वाली चुन्नीबाला की उम्र थी?
उत्तर:
(क) अस्सी साल
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Hindi · Class 11
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