Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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भारतेंदु हरिश्चंद्र का परिचय
व्याख्याभारतेंदु हरिश्चंद्र का परिचय
भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म काशी में हुआ था। वे हिंदी पुनर्जागरण के अग्रणी नायक थे, जिनका व्यक्तित्व देश-प्रेम और क्रांति-चेतना से समृद्ध था। किशोरावस्था में ही उन्होंने स्वदेश की दुर्दशा का गहरा अनुभव किया। भारतेंदु ने हिंदी साहित्य को आधुनिकता की नई दिशा दी और समाज सुधार के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। वे बंगाल के प्रख्यात मनीषी ईश्वरचंद्र विद्यासागर के निकट संबंध में थे। उन्होंने समानधर्मा रचनाकारों को प्रेरित किया, पत्र-पत्रिकाएँ निकालीं और विभिन्न विधाओं में साहित्य रचना की। उनकी प्रमुख पत्रिकाएँ कविवचनसुधा और हरिश्चंद्र मैगजीन थीं। स्त्री-शिक्षा के लिए उन्होंने बाला बोधिनी पत्रिका का प्रकाशन किया। भारतेंदु ने बांग्ला नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया, जिनमें धनंजय विजय, विद्या सुंदर, पाखंड विडंबन, सत्य हरिश्चंद्र, मुद्राराक्षस आदि प्रमुख हैं। उनके मौलिक नाटक वैदिक हिंसा हिंसा न भवति, श्री चंद्रावली, भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, नील देवी आदि हैं। उन्होंने हिंदी गद्य को नई चाल दी, जिससे हिंदी साहित्य में संवेदना और शिल्प का नया युग आरंभ हुआ।
- भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म काशी में हुआ।
- वे हिंदी पुनर्जागरण के प्रमुख नायक थे।
- उनका व्यक्तित्व देश-प्रेम और क्रांति-चेतना से भरा था।
- उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया।
- स्त्री-शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किए।
- हिंदी नाटक और गद्य की परंपरा की नींव रखी।
- 📌 पुनर्जागरण - साहित्यिक और सामाजिक जागृति का युग
- 📌 कविवचनसुधा - भारतेंदु की प्रमुख पत्रिका
- 📌 हरिश्चंद्र मैगजीन - भारतेंदु द्वारा संपादित पत्रिका
भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? - भाषण का प्रारंभ
व्याख्याभारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? - भाषण का प्रारंभ
यह अनुभाग भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध भाषण 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' का आरंभिक भाग प्रस्तुत करता है। भाषण में वे बलिया नगर में एकत्र जनता को संबोधित करते हैं और कहते हैं कि इस अभागे, आलसी देश में जो कुछ भी हो जाए, वह बहुत कुछ है। वे बलिया के समाज की प्रशंसा करते हैं और कहते हैं कि जहाँ अच्छे प्रशासक जैसे रॉबर्ट साहब बहादुर हों, वहाँ समाज भी अच्छा होता है। भारतेंदु ने भारत के महान इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अकबर, अबुल फजल, बीरबल जैसे व्यक्तित्वों ने देश की उन्नति में योगदान दिया। वे कहते हैं कि हिंदुस्तानी लोग रेल की गाड़ी की तरह हैं, जिनमें फर्स्ट क्लास, सेकेंड क्लास आदि तो हैं, लेकिन बिना इंजिन के वह चल नहीं सकती। इसलिए देश को चलाने वाला नेतृत्व चाहिए। वे यह भी बताते हैं कि आलस्य, समय की बर्बादी और सामाजिक रूढ़ियाँ भारत की प्रगति में बाधा हैं।
- भाषण की शुरुआत बलिया नगर में हुई।
- भारतेंदु ने समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
- उन्होंने अच्छे प्रशासकों के महत्व को रेखांकित किया।
- भारत को रेल की गाड़ी से तुलना कर नेतृत्व की आवश्यकता बताई।
- आलस्य और रूढ़िवादिता को उन्नति में बाधा बताया।
- 📌 प्रगति - विकास और उन्नति की प्रक्रिया
- 📌 आलस्य - काम करने में सुस्ती या विलंब
- 📌 रूढ़िवादिता - पुराने और जड़ित विचारों का पालन
देश की सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ
व्याख्यादेश की सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ
इस भाग में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भारत की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का विश्लेषण किया है। वे बताते हैं कि भारत में आलस्य, निकम्मापन, और समय की बर्बादी व्याप्त है। देश में रोजगार की कमी है और अमीरों की दल्लाली, नौकरशाही की सुस्ती आम बात है। जनसंख्या ब
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.पाठ में दबे हुए आदमी के लिए कौन सबसे ज्यादा चिंतित था?
उत्तर:
माली
Q2.मनचले क्लर्कों को पेड़ हटाने से किसने रोका?
उत्तर:
सुपरिंटेंडेंट
Q3.तुम्हारी ___ पूर्ण हो चुकी है।
उत्तर:
फ़ाइल
Q4.जामुन का पेड़ काटने की अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी किसने अपने सिर पर ले ली?
उत्तर:
प्रधानमंत्री
Q5.‘बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था।' यह संवाद पाठ में किसने कहे?
उत्तर:
क्लर्क
Q6.जामुन के पेड़ के नीचे दबा आदमी कौन था?
उत्तर:
कवि
Q7.कृषि विभाग ने पेड़ को हटाने की जिम्मेदारी किस विभाग की बताई?
उत्तर:
व्यापार विभाग
Q8.हॉर्टिकल्चर विभाग कौन सी स्कीम ऊँचे स्तर पर चला रहे थे?
उत्तर:
पेड़ लगाओ
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Hindi · Class 11
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