Ch 8निःशुल्क

Chapter 8

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Introductory Sociology (Hindi)📖 328 नोट्स⏱️ ~492 मिनट
Chapter 7अध्याय 9 / 16Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 328 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

इकाई- 1 समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

अवधारणा

इकाई- 1 समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

यह इकाई समाजशास्त्र विषय के उद्भव, विकास और उसकी विषयवस्तु को विस्तार से समझाती है। समाजशास्त्र एक नया समाज विज्ञान है जिसकी उत्पत्ति लगभग 170 वर्ष पूर्व मानी जाती है। अन्य समाज विज्ञान जैसे राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि की तुलना में यह अपेक्षाकृत नया विषय है। प्रारम्भ में मनुष्य ने अपने समाज और परिवेश को धार्मिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया। वह मानता था कि समाज और मनुष्य का उद्गम परमात्मा ने किया है, अतः समाज को समझने का यह उपागम धार्मिक था। वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक विकास के साथ समाज के प्रति वैज्ञानिक सोच विकसित हुई और समाज का वैज्ञानिक अध्ययन प्रारम्भ हुआ। इसी से समाजशास्त्र नामक विज्ञान का जन्म हुआ। समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में 1838 में फ्रांस में स्थापित किया गया, जिसका श्रेय फ्रांस के दार्शनिक अगस्त कॉम्ट को दिया जाता है। इस इकाई में निम्नलिखित प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है: - समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास की पृष्ठभूमि - यूरोप में राजनीतिक क्रांतियाँ - औद्योगिक क्रांति - समाजवादी दृष्टिकोण - नगरीकरण की प्रक्रिया - धार्मिक परिवर्तन - विज्ञान का प्रभाव - भारत में समाजशास्त्र का विकास (स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात) - समाजशास्त्र की विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र - संस्थापकों का दृष्टिकोण, परम्परागत विषयवस्तु, नवीन आयाम इकाई के अंत में सारांश, बोध प्रश्न, शब्दावली और संदर्भ ग्रंथ भी दिए गए हैं।

  • समाजशास्त्र एक नया समाज विज्ञान है जिसकी उत्पत्ति लगभग 170 वर्ष पूर्व हुई।
  • प्रारंभ में समाज को धार्मिक दृष्टिकोण से समझा जाता था।
  • वैज्ञानिक सोच के विकास के साथ समाजशास्त्र का वैज्ञानिक अध्ययन प्रारम्भ हुआ।
  • समाजशास्त्र को विज्ञान के रूप में 1838 में फ्रांस में अगस्त कॉम्ट ने स्थापित किया।
  • इकाई में समाजशास्त्र के उद्भव, विकास, भारत में स्थिति, और विषयवस्तु का विस्तार से अध्ययन किया गया है।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करने वाला समाज विज्ञान।
  • 📌 धार्मिक उपागम: समाज को धार्मिक दृष्टिकोण से समझने की प्रवृत्ति।
  • 📌 वैज्ञानिक सोच: तर्क एवं प्रमाण आधारित समाज का अध्ययन।

1.0 उद्देश्य

व्याख्या

1.0 उद्देश्य

इस इकाई के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी निम्नलिखित बातों को समझने में सक्षम होंगे: - समाजशास्त्र की आवश्यकता क्यों हुई, इसका विश्लेषण कर सकेंगे। - यूरोप के देशों में 18वीं और 19वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाओं को समझ पाएंगे। - समाजशास्त्र के विकास के क्रम का विश्लेषण कर सकेंगे। - भारत में समाजशास्त्र के विकास का उल्लेख कर पाएंगे। - भारत में स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात समाजशास्त्र की स्थिति को समझ सकेंगे। - समाजशास्त्र विषय में किन तत्वों का अध्ययन किया जाता है, यह जान सकेंगे। - वर्तमान युग में समाजशास्त्र की विषय सामग्री में जुड़े नए आयामों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

  • समाजशास्त्र की आवश्यकता और उत्पत्ति को समझना।
  • यूरोप की ऐतिहासिक घटनाओं का समाजशास्त्र पर प्रभाव जानना।
  • समाजशास्त्र के विकास की प्रक्रिया का विश्लेषण करना।
  • भारत में समाजशास्त्र के विकास को समझना।
  • समाजशास्त्र की विषयवस्तु और अध्ययन क्षेत्र के आयाम जानना।
  • 📌 उद्देश्य: अध्ययन के वे लक्ष्य जिन्हें विद्यार्थी इकाई पढ़ने के बाद प्राप्त कर सकते हैं।

1.1 प्रस्तावना

व्याख्या

1.1 प्रस्तावना

समाजशास्त्र समाज विज्ञानों में एक नया विषय है। अन्य समाज विज्ञान जैसे राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने हैं, जबकि समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास लगभग 170 वर्ष पूर्व हुआ। मनुष्य ने अपने परिवेश को समझने के लिए प्रारंभ में धार्मिक दृष्ट