Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
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1.1 समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा
परिभाषा1.1 समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा
समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, जो समाज, सामाजिक संस्थाओं, सामाजिक संबंधों तथा सामाजिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करता है। समाजशास्त्र शब्द 'समाज' और 'शास्त्र' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है समाज का अध्ययन। समाजशास्त्र की परिभाषा विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई है: - ऑगस्ट कॉन्ते: समाजशास्त्र को 'समाज के वैज्ञानिक अध्ययन' के रूप में परिभाषित करते हैं। - मैक्स वेबर: वे इसे 'सामाजिक क्रिया के व्याख्यात्मक समझ' के रूप में देखते हैं। - एमिल दुर्खीम: समाजशास्त्र को 'सामाजिक तथ्यों का अध्ययन' मानते हैं। समाजशास्त्र का उद्देश्य समाज के ढांचे, क्रियाओं, परिवर्तन और विकास को समझना है। यह समाज के विभिन्न पहलुओं जैसे परिवार, धर्म, शिक्षा, राजनीति, अर्थव्यवस्था आदि का विश्लेषण करता है।
- समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है।
- यह सामाजिक संबंधों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं का विश्लेषण करता है।
- समाजशास्त्र की परिभाषा विभिन्न विद्वानों द्वारा भिन्न-भिन्न दी गई है।
- समाजशास्त्र का उद्देश्य समाज की संरचना और परिवर्तन को समझना है।
- यह अन्य सामाजिक विज्ञानों से अलग है क्योंकि यह समाज को समग्र रूप से देखता है।
- 📌 समाजशास्त्र: समाज का वैज्ञानिक अध्ययन।
- 📌 सामाजिक संबंध: व्यक्तियों के बीच संबंध।
- 📌 सामाजिक प्रक्रिया: समाज में घटित होने वाली घटनाएँ।
1.2 समाजशास्त्र का उद्भव
व्याख्या1.2 समाजशास्त्र का उद्भव
समाजशास्त्र का उद्भव 19वीं शताब्दी में यूरोप में हुआ। इसका विकास औद्योगिक क्रांति, फ्रांसीसी क्रांति, और वैज्ञानिक सोच के प्रसार के कारण हुआ। ऑगस्ट कॉन्ते को समाजशास्त्र का जनक माना जाता है। उन्होंने पहली बार 'सोशियोलॉजी' शब्द का प्रयोग किया। समाजशास्त्र का जन्म सामाजिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान की आवश्यकता से हुआ। औद्योगिक क्रांति ने समाज में बड़े बदलाव लाए, जैसे शहरीकरण, वर्ग विभाजन, और सामाजिक गतिशीलता। फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों को जन्म दिया। इन परिवर्तनों ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
- समाजशास्त्र का जन्म 19वीं शताब्दी में यूरोप में हुआ।
- ऑगस्ट कॉन्ते को समाजशास्त्र का जनक माना जाता है।
- औद्योगिक और फ्रांसीसी क्रांति ने समाजशास्त्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- समाजशास्त्र का विकास सामाजिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान की आवश्यकता से हुआ।
- समाजशास्त्र का उद्भव सामाजिक परिवर्तन और वैज्ञानिक सोच के प्रसार के कारण हुआ।
- 📌 औद्योगिक क्रांति: उत्पादन के नए तरीकों का आगमन।
- 📌 फ्रांसीसी क्रांति: 1789 में फ्रांस में सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन।
- 📌 ऑगस्ट कॉन्ते: समाजशास्त्र के जनक।
1.3 समाजशास्त्र का विकास
व्याख्या1.3 समाजशास्त्र का विकास
समाजशास्त्र का विकास विभिन्न चरणों में हुआ। प्रारंभिक चरण में समाजशास्त्र मुख्यतः यूरोप और अमेरिका में विकसित हुआ। ऑगस्ट कॉन्ते, एमिल दुर्खीम, मैक्स वेबर, कार्ल मार्क्स आदि प्रमुख विचारक रहे। समाजशास्त्र के विकास में तीन मुख्य प्रवृत्तियाँ रही हैं: 1
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Introductory Sociology · Vardhman Mahaveer Open University
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