Ch 2निःशुल्क

Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Introductory Sociology (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 16Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में समाजशास्त्र की प्रकृति को समझाने का प्रयास किया गया है। समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, जो समाज के संरचनात्मक, सांस्कृतिक और प्रक्रियागत पक्षों का अध्ययन करता है। यह अध्याय समाजशास्त्र के वैज्ञानिक तथा मानवीय दृष्टिकोणों की विवेचना करता है। समाजशास्त्र के अध्ययन की आवश्यकता, उसकी विषयवस्तु, और अन्य सामाजिक विज्ञानों से उसकी भिन्नता को स्पष्ट किया गया है। समाजशास्त्र का उद्भव 19वीं सदी में यूरोप में हुआ, जब औद्योगिक क्रांति और सामाजिक परिवर्तन ने समाज के अध्ययन की आवश्यकता को जन्म दिया। समाजशास्त्र के अध्ययन से हम समाज में व्याप्त विविधताओं, असमानताओं, सामाजिक संबंधों और संस्थाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझ सकते हैं। यह विषय न केवल समाज के स्वरूप को स्पष्ट करता है, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए भी मार्गदर्शन करता है।

  • समाजशास्त्र समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का विषय है।
  • यह सामाजिक संबंधों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं का विश्लेषण करता है।
  • समाजशास्त्र का विकास यूरोप में औद्योगिक क्रांति के बाद हुआ।
  • समाजशास्त्र अन्य सामाजिक विज्ञानों से भिन्न है।
  • यह समाज को वैज्ञानिक और मानवीय दोनों दृष्टिकोणों से देखता है।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की विधा।
  • 📌 वैज्ञानिक दृष्टिकोण: तर्कसंगत, वस्तुनिष्ठ और प्रमाण आधारित अध्ययन।
  • 📌 मानवीय दृष्टिकोण: मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और अनुभवों पर आधारित अध्ययन।

समाजशास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

अवधारणा

समाजशास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

समाजशास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण समाज के अध्ययन में तर्क, प्रमाण और वस्तुनिष्ठता पर बल देता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ है, किसी भी सामाजिक घटना या प्रक्रिया का अध्ययन पूर्वाग्रह रहित, तर्कसंगत और व्यवस्थित तरीके से करना। इसमें अवलोकन, सर्वेक्षण, सांख्यिकीय विधियाँ, तुलनात्मक अध्ययन आदि का प्रयोग किया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण में समाजशास्त्री किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले तथ्यों का संग्रहण, उनका विश्लेषण और परीक्षण करते हैं। समाजशास्त्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का उद्देश्य समाज के स्वरूप, संरचना और कार्यप्रणाली को वस्तुनिष्ठ रूप से समझना है। इससे समाजशास्त्र को एक अनुशासन के रूप में स्थापित करने में सहायता मिली है।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण में तर्क, प्रमाण और वस्तुनिष्ठता पर बल।
  • अवलोकन, सर्वेक्षण, सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग।
  • सामाजिक घटनाओं का व्यवस्थित अध्ययन।
  • पूर्वाग्रह रहित निष्कर्षों पर बल।
  • समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्थापित करना।
  • 📌 वस्तुनिष्ठता: निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टिकोण।
  • 📌 सर्वेक्षण: किसी विषय पर जानकारी एकत्र करने की विधि।
  • 📌 तुलनात्मक अध्ययन: विभिन्न समाजों या समूहों की तुलना।

समाजशास्त्र का मानवीय दृष्टिकोण

अवधारणा

समाजशास्त्र का मानवीय दृष्टिकोण

मानवीय दृष्टिकोण समाजशास्त्र के अध्ययन में मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और अनुभवों को महत्त्व देता है। यह दृष्टिकोण मानता है कि समाज केवल तथ्यों और आँकड़ों से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों की भावनाएँ, विचार, विश्वास और सांस्कृतिक पृष्ठभ