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Chapter 4

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Introductory Sociology (Hindi)📖 345 नोट्स⏱️ ~518 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 16Chapter 4

Chapter 4अध्ययन नोट्स

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इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

व्याख्या

इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

इस इकाई में समाजशास्त्र विषय के उद्भव, विकास और उसकी विषयवस्तु का विस्तृत अध्ययन किया गया है। सबसे पहले, इकाई की रूपरेखा दी गई है जिसमें अध्ययन के उद्देश्य स्पष्ट किए गए हैं। समाजशास्त्र एक अपेक्षाकृत नया विषय है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 170 वर्ष पूर्व मानी जाती है। अन्य समाज विज्ञान जैसे राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने हैं, लेकिन समाजशास्त्र का वैज्ञानिक अध्ययन 19वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ। प्रारंभिक काल में मनुष्य अपने समाज को धार्मिक दृष्टिकोण से समझता था और समाज के उद्गम को परमात्मा से जोड़ता था। समाज का वैज्ञानिक अध्ययन नहीं होता था। वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक विकास के कारण समाज के प्रति वैज्ञानिक सोच विकसित हुई, जिससे समाजशास्त्र का जन्म हुआ। फ्रांस के दार्शनिक अगस्त कॉम्ट को समाजशास्त्र के संस्थापक के रूप में माना जाता है, जिन्होंने 1838 में समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्थापित किया। इकाई की रूपरेखा में निम्नलिखित विषयों का उल्लेख है: 1.0 उद्देश्य 1.1 प्रस्तावना 1.2 समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास की पृष्ठभूमि 1.2.1 यूरोप के देशों में राजनीतिक क्रान्तियां 1.2.2 औद्योगिक क्रान्ति 1.2.3 समाजवादी दृष्टिकोण 1.2.4 नगरीकरण की प्रक्रिया 1.2.5 धार्मिक परिवर्तन 1.2.6 विज्ञान का प्रभाव 1.3 भारत में समाजशास्त्र का विकास 1.3.1 स्वतंत्रता से पूर्व की स्थिति 1.3.2 स्वतंत्रता के बाद समाजशास्त्र का विकास 1.4 समाजशास्त्र की विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र 1.4.1 समाजशास्त्र के संस्थापकों का दृष्टिकोण 1.4.2 परम्परागत विषयवस्तु 1.4.3 विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र के नवीन आयाम 1.5 सारांश 1.6 बोध प्रश्न 1.7 बोध प्रश्नों के उत्तर 1.8 शब्दावली 1.9 सन्दर्भ ग्रन्थ इस इकाई के अध्ययन के बाद विद्यार्थी समाजशास्त्र की आवश्यकता, यूरोप में 18वीं-19वीं शताब्दी की घटनाएँ, समाजशास्त्र के विकास की प्रक्रिया, भारत में समाजशास्त्र का विकास, स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात समाजशास्त्र की स्थिति, समाजशास्त्र की विषयवस्तु और वर्तमान युग में जुड़े नए आयामों को समझ सकेंगे।

  • समाजशास्त्र एक नया विषय है, जिसका वैज्ञानिक अध्ययन 19वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ।
  • प्रारंभिक काल में समाज को धार्मिक दृष्टिकोण से समझा जाता था।
  • वैज्ञानिक सोच के विकास के साथ समाजशास्त्र का जन्म हुआ।
  • अगस्त कॉम्ट को समाजशास्त्र का संस्थापक माना जाता है।
  • इकाई में समाजशास्त्र के उद्भव, विकास और विषयवस्तु का अध्ययन किया गया है।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का विषय।
  • 📌 अगस्त कॉम्ट: फ्रांस के दार्शनिक, जिन्हें समाजशास्त्र का संस्थापक माना जाता है।
  • 📌 विषयवस्तु: अध्ययन का क्षेत्र और विषय सामग्री।

1.0 उद्देश्य

अवधारणा

1.0 उद्देश्य

इस इकाई के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी निम्नलिखित बातों को समझ सकेंगे: - समाजशास्त्र की आवश्यकता क्यों हुई? - यूरोप के देशों में 18वीं, 19वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाएँ क्या थीं? - समाजशास्त्र के विकास के क्रम का विश्लेषण कैसे करें? - भारत में समाजशास्त्र के विकास का उल्लेख करना। - भारत में स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात समाजशास्त्र की स्थिति को समझना। - समाजशास्त्र विषय में किन तत्वों का अध्ययन किया जाता है? - वर्तमान युग में समाजशास्त्र की विषय सामग्री में कौन से नए आयाम जुड़े हैं? यह उद्देश्य विद्यार्थियों को समाजशास्त्र के मूलभूत पहलुओं, इतिहास, विकास और अध्ययन क्षेत्र की व्यापक समझ प्रदान करता है।

  • समाजशास्त्र की आवश्यकता एवं उत्पत्ति को समझना।
  • यूरोप में 18वीं-19वीं शताब्दी की घटनाओं का अध्ययन।
  • समाजशास्त्र के विकास का विश्लेषण।
  • भारत में समाजशास्त्र का विकास और उसकी स्थिति।
  • समाजशास्त्र की विषयवस्तु और नए आयामों का ज्ञान।
  • 📌 उद्देश्य: अध्ययन के लक्ष्य और अपेक्षित परिणाम।

1.1 प्रस्तावना

व्याख्या

1.1 प्रस्तावना

समाज विज्ञानों में समाजशास्त्र एक नया विषय है। अन्य समाज विज्ञान जैसे राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने हैं, लेकिन समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास लगभग 170 वर्ष पुराना है। प्रारंभिक काल में मनुष्य ने अपने आस-पास के समाज को समझने के लि