NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 11📖 Bhautiki-II📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 7

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

14.1 भूमिका

व्याख्या

14.1 भूमिका

तरंगें हमारे आस-पास के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। जब हम तालाब में कोई कंकड़ गिराते हैं, तो जल की सतह पर विक्षोभ उत्पन्न होता है जो वृत्ताकार तरंगों के रूप में बाहर की ओर फैलता है। इस प्रक्रिया में जल के कण अपने स्थान पर ऊपर-नीचे दोलन करते हैं, परंतु वे विक्षोभ के केंद्र से दूर नहीं जाते। इसी प्रकार, ध्वनि तरंगें हवा में उत्पन्न होती हैं और ऊर्जा तथा विक्षोभ का संचरण करती हैं, परंतु हवा के कण स्वयं दूर तक नहीं चलते। इस प्रकार, तरंगें द्रव्य के वास्तविक स्थानांतरण के बिना ऊर्जा का संचरण करती हैं। यांत्रिक तरंगों के संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है, जैसे जल, हवा, या ठोस। इसके विपरीत, विद्युत-चुंबकीय तरंगें निर्वात में भी संचरित हो सकती हैं। इस अध्याय में हम यांत्रिक तरंगों के गुणों, उनके प्रकार, गति, अध्यारोपण, परावर्तन, स्थायी तरंगें, गुणावृत्तियाँ, अनुनाद और विस्पंदों का अध्ययन करेंगे।

  • तरंगें ऊर्जा और विक्षोभ का संचरण करती हैं, न कि द्रव्य का स्थानांतरण।
  • यांत्रिक तरंगों के लिए माध्यम आवश्यक होता है, विद्युत-चुंबकीय तरंगों के लिए नहीं।
  • जल, हवा, और ठोस यांत्रिक तरंगों के संचरण के उदाहरण हैं।
  • ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें हैं।
  • विद्युत-चुंबकीय तरंगें निर्वात में भी संचरित हो सकती हैं।
  • तरंगों का अध्ययन ऊर्जा संचरण, संचार, और भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में सहायक है।
  • 📌 तरंग: विक्षोभ का वह पैटर्न जो माध्यम के एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊर्जा का संचरण करता है।
  • 📌 यांत्रिक तरंग: ऐसी तरंगें जिनके संचरण के लिए माध्यम आवश्यक होता है।
  • 📌 विद्युत-चुंबकीय तरंग: ऐसी तरंगें जो निर्वात में भी संचरित हो सकती हैं।

14.2 अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य तरंगें

व्याख्या

14.2 अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य तरंगें

तरंगों के प्रकार मुख्यतः दो होते हैं: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य। अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा के लंबवत् दोलन करते हैं, जैसे तानित डोरी में उत्पन्न तरंगें। यदि डोरी के एक सिरे पर ऊपर-नीचे झटका दिया जाए तो डोरी का कोई अवयव ऊपर-नीचे दोलन करता है जबकि तरंग दाईं ओर संचरित होती है। दूसरी ओर, अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा के समानांतर दोलन करते हैं, जैसे ध्वनि तरंगें। ध्वनि तरंगों में वायु के कण संपीड़न और विरलन के रूप में तरंग की दिशा में दोलन करते हैं। अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोसों में संचरित हो सकती हैं क्योंकि उनमें अपरूपण प्रत्यास्थता होती है, जबकि अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैसों में संचरित हो सकती हैं। जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य दोनों का संयोजन होती हैं।

  • अनुप्रस्थ तरंगों में कणों का दोलन तरंग की गति के लंबवत् होता है।
  • अनुदैर्ध्य तरंगों में कणों का दोलन तरंग की गति के समानांतर होता है।
  • अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
  • अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैस सभी में संचरित हो सकती हैं।
  • जल की सतह पर तरंगें अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य दोनों होती हैं।
  • तरंगों का प्रकार उनके माध्यम और दोलन दिशा पर निर्भर करता है।
  • 📌 अनुप्रस्थ तरंग: ऐसी तरंग जिनमें माध्यम के कण तरंग की गति के लंबवत् दोलन करते हैं।
  • 📌 अनुदैर्ध्य तरंग: ऐसी तरंग जिनमें माध्यम के कण तरंग की गति के समानांतर दोलन करते हैं।
  • 📌 संपीड़न: माध्यम के कणों का निकट आना।

14.3 प्रगामी तरंगों में विस्थापन संबंध

व्याख्या

14.3 प्रगामी तरंगों में विस्थापन संबंध

प्रगामी तरंगों का गणितीय निरूपण किसी माध्यम के अवयव के विस्थापन को स्थिति x और समय t के फलन के रूप में किया जाता है। किसी ज्यावक्रीय प्रगामी तरंग के लिए विस्थापन y(x, t) को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: य(x, t) = α sin(kx - ωt + φ) यहाँ α तरंग का

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.2.50 kg द्रव्यमान की 20 cm लंबी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा ?

उत्तर:

दी गई जानकारी: द्रव्यमान m = 2.50 kg लंबाई L = 20 cm = 0.20 m तनाव T = 200 N तरंग की चाल v = √(T/μ), जहाँ μ = द्रव्यमान घनत्व = m/L μ = 2.50 / 0.20 = 12.5 kg/m v = √(200 / 12.5) = √16 = 4 m/s समय t = दूरी / चाल = L / v = 0.20 / 4 = 0.05 s अतः विक्षोभ दूसरे सिरे तक पहुँचने में 0.05 सेकंड लगेंगे।

व्याख्या:

तरंग की चाल निकालने के लिए तनाव और द्रव्यमान घनत्व का उपयोग किया जाता है। चाल v = √(T/μ) जहाँ μ = द्रव्यमान / लंबाई फिर समय = दूरी / चाल

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Q2.300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m s⁻¹ है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? ($g = 9.8$ m s⁻²)

उत्तर:

दी गई जानकारी: ऊँचाई h = 300 m ध्वनि की चाल v_sound = 340 m/s गुरुत्वाकर्षण त्वरण g = 9.8 m/s² पत्थर गिरने में लगने वाला समय t_fall = √(2h/g) = √(2×300/9.8) = √(61.22) ≈ 7.82 s पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष तक आने में लगने वाला समय t_sound = दूरी / चाल = 300 / 340 ≈ 0.882 s कुल विलंब = t_fall + t_sound = 7.82 + 0.882 ≈ 8.70 s अतः पत्थर के गिरने की ध्वनि लगभग 8.7 सेकंड बाद मीनार के शीर्ष पर सुनाई देगी।

व्याख्या:

पत्थर गिरने में लगने वाला समय गुरुत्वाकर्षण के कारण गिरने के नियम से निकाला जाता है। ध्वनि के आने का समय दूरी को ध्वनि की चाल से भाग देकर निकाला जाता है। दोनों समय जोड़कर कुल विलंब ज्ञात किया जाता है।

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Q3.12.0 m लंबे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल 20 °C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 m s⁻¹) के बराबर हो।

उत्तर:

दी गई जानकारी: लंबाई L = 12.0 m द्रव्यमान m = 2.10 kg तरंग की चाल v = 343 m/s द्रव्यमान घनत्व μ = m / L = 2.10 / 12.0 = 0.175 kg/m तनाव T = μ v² = 0.175 × (343)² = 0.175 × 117,649 = 20,588.575 N अतः तार में तनाव लगभग 20,589 N होना चाहिए।

व्याख्या:

तरंग की चाल v = √(T/μ) से, T = μ v² द्रव्यमान घनत्व μ निकालकर तनाव T ज्ञात किया गया।

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Q4.सूत्र $v = \sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}}$ का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों (a) दाब पर निर्भर नहीं करती, (b) ताप के साथ बढ़ जाती है, तथा (c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है ?

उत्तर:

(a) वायु में ध्वनि की चाल v = √(γP/ρ) है। यहाँ P वायु का दाब और ρ उसका घनत्व है। तापमान और दाब के अनुसार वायु की घनत्व और दाब दोनों बदलते हैं। आदर्श गैस समीकरण के अनुसार P/ρ = RT/M (जहाँ R गैस स्थिरांक, T तापमान, M मोलर द्रव्यमान) होता है। अतः v = √(γRT/M) होता है। इस प्रकार दाब P और घनत्व ρ दोनों का अनुपात स्थिर रहता है, इसलिए ध्वनि की चाल दाब पर निर्भर नहीं करती। (b) तापमान T के बढ़ने पर √T के अनुपात में ध्वनि की चाल बढ़ती है क्योंकि v = √(γRT/M)। (c) आर्द्रता बढ़ने पर वायु में जलवाष्प की मात्रा बढ़ती है, जो कि वायु की तुलना में कम घनत्व वाली होती है। इससे कुल घनत्व ρ कम हो जाता है, जिससे v = √(γP/ρ) बढ़ जाती है। अतः आर्द्रता के साथ ध्वनि की चाल बढ़ जाती है।

व्याख्या:

ध्वनि की चाल का सूत्र वायु के दाब, घनत्व और तापमान के बीच संबंध को दर्शाता है। आदर्श गैस समीकरण से दाब और घनत्व के अनुपात को समझकर ध्वनि की चाल पर दाब के प्रभाव को खारिज किया जाता है। तापमान और आर्द्रता के प्रभाव को घनत्व और तापमान के परिवर्तन के आधार पर समझाया जाता है।

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Q5.आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन $y = f(x, t)$ द्वारा निरूपित की जाती है जिसमें $x$ तथा $t$ को $x - vt$ अथवा $x + vt$ अर्थात् $y = f(x \pm vt)$ संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है ? नीचे दिए गए $y$ के प्रत्येक फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है: (a) $(x - vt)^2$ (b) $\log \left[ \frac{(x + vt)}{x_0} \right]$ (c) $1 / (x + vt)$

उत्तर:

प्रगामी तरंग का फलन $y = f(x \pm vt)$ होना आवश्यक है। (a) $(x - vt)^2$ : यह भी $x - vt$ का फलन है, अतः प्रगामी तरंग निरूपित कर सकता है। (b) $\log \left[ \frac{(x + vt)}{x_0} \right]$ : यह भी $x + vt$ का फलन है, अतः प्रगामी तरंग निरूपित कर सकता है। (c) $1 / (x + vt)$ : यह भी $x + vt$ का फलन है, अतः प्रगामी तरंग निरूपित कर सकता है। अतः सभी फलन प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकते हैं।

व्याख्या:

प्रगामी तरंग का सामान्य रूप $y = f(x \pm vt)$ होता है। यदि फलन केवल $x \pm vt$ के रूप में व्यक्त हो, तो वह प्रगामी तरंग है। सभी दिए गए फलन इसी रूप में हैं।

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Q6.कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमश: 340 m s⁻¹ तथा 1486 m s⁻¹ है।

उत्तर:

दी गई जानकारी: आवृत्ति f = 1000 kHz = 1 × 10^6 Hz ध्वनि की चाल वायु में v_air = 340 m/s ध्वनि की चाल जल में v_water = 1486 m/s (a) वायु में तरंगदैर्घ्य λ_air = v_air / f = 340 / (1 × 10^6) = 3.4 × 10^{-4} m = 0.34 mm (b) जल में तरंगदैर्घ्य λ_water = v_water / f = 1486 / (1 × 10^6) = 1.486 × 10^{-3} m = 1.486 mm अतः परावर्तित ध्वनि की तरंगदैर्घ्य 0.34 mm और पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्घ्य 1.486 mm है।

व्याख्या:

तरंगदैर्घ्य λ = चाल / आवृत्ति दोनों माध्यमों में आवृत्ति समान रहती है। चाल के अनुसार तरंगदैर्घ्य अलग-अलग होंगे।

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Q7.किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूबर्स का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि में तरंगदैर्घ्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 k m s⁻¹ है ? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।

उत्तर:

दी गई जानकारी: ध्वनि की चाल v = 1.7 km/s = 1700 m/s आवृत्ति f = 4.2 MHz = 4.2 × 10^6 Hz तरंगदैर्घ्य λ = v / f = 1700 / (4.2 × 10^6) ≈ 4.05 × 10^{-4} m = 0.405 mm अतः ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्घ्य लगभग 0.405 मिलीमीटर है।

व्याख्या:

तरंगदैर्घ्य λ = चाल / आवृत्ति यह सूत्र सीधे लागू किया गया।

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Q8.किसी डोरी पर कोई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन $$ y (x, t) = 3.0 \sin \left(36 t + 0.018 x + \pi / 4\right) $$ द्वारा किया जाता है। यहाँ x तथा y सेंटीमीटर में तथा t सेकंड में है। x की धनात्मक दिशा बाएँ से दाएँ है। (a) क्या यह प्रगामी तरंग है अथवा अप्रगामी ? यदि यह प्रगामी तरंग है तो इसकी चाल तथा संचरण की दिशा क्या है ? (b) इसका आयाम तथा आवृत्ति क्या है ? (c) उद्गम के समय इसकी आरंभिक कला क्या है ? (d) इस तरंग में दो क्रमागत शिखरों के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है ?

उत्तर:

(a) तरंग का फलन है: y(x,t) = 3.0 sin(36 t + 0.018 x + π/4) सामान्य प्रगामी तरंग का रूप y = f(kx - ωt) या y = f(ωt - kx) होता है। यहाँ तर्क में x और t दोनों धनात्मक हैं, और चिन्ह + है, अतः यह अप्रगामी तरंग है। यदि इसे y = 3.0 sin(36 t + 0.018 x + π/4) = 3.0 sin[0.018 x + 36 t + π/4] के रूप में देखें, तो इसे y = 3.0 sin(kx + ωt + φ) कहा जा सकता है। यह अप्रगामी तरंग है क्योंकि kx और ωt का योग है। (b) आयाम A = 3.0 cm ω = 36 rad/s से आवृत्ति f = ω / (2π) = 36 / (2 × 3.1416) ≈ 5.73 Hz (c) t = 0 पर कला φ = 0.018 x + π/4 (d) तरंगदैर्घ्य λ = 2π / k = 2π / 0.018 = 349.07 cm = 3.49 m दो शिखरों के बीच न्यूनतम दूरी λ = 3.49 m है।

व्याख्या:

तरंग के तर्क में x और t के चिन्ह से प्रगामी या अप्रगामी होने का निर्धारण होता है। आयाम, आवृत्ति ω से निकाली जाती है। कलांतर φ को तर्क से पढ़ा जाता है। तरंगदैर्घ्य k से निकाला जाता है।

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