Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
12.1 भूमिका
व्याख्या12.1 भूमिका
अणुगति सिद्धांत गैसों के व्यवहार को उनके अणुओं की गति और आपसी संघट्टों के आधार पर समझाने वाला एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यह सिद्धांत 19वीं शताब्दी में मैक्सवेल, बोल्ट्जमान और अन्य वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया था। अणुगति सिद्धांत के अनुसार, गैसों में अणु अत्यंत तीव्र गति से गतिमान रहते हैं और आपस में तथा धारक पात्र की दीवारों से प्रत्यास्थ संघट्ट करते हैं। इन संघट्टों के कारण गैस का दाब उत्पन्न होता है। अणुगति सिद्धांत ने गैसों के दाब, ताप, ऊष्मा धारिता, ऊर्जा वितरण, विसरण, श्यानता आदि गुणों की आण्विक व्याख्या प्रदान की है। यह सिद्धांत आवोगाद्रो की परिकल्पना और गैस नियमों के अनुरूप है तथा गैसों के व्यवहार को सूक्ष्म स्तर पर समझने में सहायक है। इस अध्याय में हम अणुगति सिद्धांत के मूलभूत सिद्धांतों, समीकरणों, और उनके प्रयोगों का अध्ययन करेंगे।
- अणुगति सिद्धांत गैसों के व्यवहार को उनके अणुओं की गति और संघट्टों के आधार पर समझाता है।
- यह सिद्धांत मैक्सवेल, बोल्ट्जमान आदि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया।
- गैसों में अणु लगातार गतिमान रहते हैं और प्रत्यास्थ संघट्ट करते हैं।
- अणुगति सिद्धांत गैसों के दाब, ताप, ऊष्मा धारिता आदि की आण्विक व्याख्या करता है।
- यह सिद्धांत आवोगाद्रो की परिकल्पना और गैस नियमों के अनुरूप है।
- 📌 अणुगति सिद्धांत: गैसों के व्यवहार को उनके अणुओं की गति और संघट्टों के आधार पर समझाने वाला सिद्धांत।
- 📌 प्रत्यास्थ संघट्ट: ऐसे संघट्ट जिसमें कुल गतिज ऊर्जा और संवेग संरक्षित रहते हैं।
- 📌 आवोगाद्रो संख्या: समान ताप और दाब पर गैस के एक मोल में अणुओं की संख्या।
12.2 द्रव्य की आण्विक प्रकृति
व्याख्या12.2 द्रव्य की आण्विक प्रकृति
द्रव्य की आण्विक प्रकृति का विचार प्राचीन काल से ही विभिन्न संस्कृतियों और दार्शनिकों द्वारा किया गया है। प्राचीन भारत में वैशेषिक दर्शन के कणाद ने परमाणुओं को अविभाज्य, सूक्ष्म और द्रव्य के अविभाज्य अंश माना। उन्होंने चार प्रकार के परमाणुओं (भूमि, जल, अग्नि, वायु) की कल्पना की और बताया कि परमाणु संयोग करके अणु बनाते हैं। प्राचीन यूनान में डेमोक्रेटस ने भी परमाणु की अवधारणा दी, जिसमें परमाणु भौतिक रूप, आकृति और गुणों में भिन्न होते हैं। आधुनिक विज्ञान में डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत दिया, जिसमें तत्वों के परमाणु सर्वसम होते हैं और यौगिकों के निर्माण में परमाणुओं के निश्चित अनुपात होते हैं। आवोगाद्रो के नियम ने गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होने की परिकल्पना दी। आधुनिक युग में इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी और अन्य उपकरणों की सहायता से परमाणुओं और अणुओं को देखा और अध्ययन किया जा सकता है। गैसों में अणुओं की दूरी बहुत अधिक होती है, इसलिए उनके बीच की अन्योन्य क्रियाएँ उपेक्षणीय होती हैं। अणुगति सिद्धांत इसी आण्विक स्वरूप पर आधारित है और गैसों के व्यवहार को समझाता है।
- प्राचीन भारत में वैशेषिक दर्शन ने परमाणुओं की अवधारणा दी।
- डेमोक्रेटस ने परमाणुओं को भौतिक रूप, आकृति और गुणों में भिन्न माना।
- डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत दिया जो तत्वों और यौगिकों के निर्माण को समझाता है।
- आवोगाद्रो का नियम गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होने की परिकल्पना है।
- आधुनिक उपकरणों से परमाणु और अणुओं का अध्ययन संभव हुआ।
- गैसों में अणुओं के बीच की दूरी अधिक होती है, इसलिए संघट्ट प्रत्यास्थ होते हैं।
- 📌 परमाणु: द्रव्य का सूक्ष्मतम अविभाज्य कण।
- 📌 अणु: एक या अधिक परमाणुओं का संयोजन।
- 📌 आवोगाद्रो संख्या (N_A): 6.02 × 10²³, एक मोल में अणुओं की संख्या।
12.3 गैसों का व्यवहार
व्याख्या12.3 गैसों का व्यवहार
गैसों के गुणों को समझना ठोसों और द्रवों की तुलना में अपेक्षाकृत सरल होता है क्योंकि गैसों में अणु एक-दूसरे से दूर होते हैं और उनके बीच की अन्योन्य क्रियाएँ बहुत कम होती हैं। गैसों का व्यवहार निम्न दाब और उच्च ताप पर आदर्श गैस समीकरण PV = kT के अनुसार
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.(a) जब कोई अणु (यो-प्रत्यास्थ गेंद) किसी (भारी) दीवार से टकराता है, तो टकराने के पश्चात् यह उसी चाल से विपरीत दिशा में वापस लौटता है। जब कोई गेंद दृढ़तापूर्वक पकड़े गए भारी बल्ले से टकराती है, तो भी ऐसा ही होता है। तथापि, जब गेंद अपनी ओर आते हुए बल्ले से टकराती है, तो यह भिन्न चाल से वापस लौटती है। उस स्थिति में गेंद की चाल अपेक्षाकृत कम होती है या अधिक? (अध्याय 6 प्रत्यास्थ संघट्टों से संबंधित आपकी याद ताजा कर संकेता)। (b) पिस्टन लगे सिलिंडर में पिस्टन को अंदर की ओर धकेल कर जब किसी गैस को संपीडित किया जाता है, तो उस गैस का ताप बढ़ जाता है। ऊपर (a) में प्रयुक्त अणुगति सिद्धांत के आधार पर इस प्रेक्षण की व्याख्या कीजिए। (c) पिस्टन लगे सिलिंडर में संपीडित गैस जब पिस्टन को बाहर धकेलकर फैलती है तो क्या होता है? तब आप क्या प्रेक्षण करेंगे? (d) खेलते समय सचिन तेंदुलकर एक भारी बल्ले का उपयोग करते हैं। इससे क्या उनको किसी प्रकार की कोई सहायता मिलती है?
उत्तर:
हल (a) माना कि बल्ले के पीछे लगे विकिटों के सापेक्ष गेंद की चाल u है। यदि विकिटों के सापेक्ष बल्ला V चाल से गेंद की ओर आ रहा हो तो बल्ले के सापेक्ष गेंद की चाल V + u होगी, जो बल्ले की ओर प्रभावी होगी। भारी बल्ले से टकराकर जब गेंद वापस लौटती है तो बल्ले के सापेक्ष इसकी चाल V + u बल्ले से दूर की ओर होगी। अत: विकिट के सापेक्ष, लौटती हुई गेंद की चाल, V + (V + u) = 2V + u, विकिट से परे जाती हुई होगी। अत: इस प्रकार गतिमान बल्ले से संघट्ट के पश्चात् गेंद की चाल बढ़ जाती है। यदि बल्ला भारी नहीं है तो प्रतिपेक्ष चाल u से कम होगी। अणु के लिए इसका अर्थ ताप में वृद्धि होगा। (a) के उत्तर के आधार पर, अब आप, (b), (c), (d) के उत्तर दे सकते हैं। (संकेत: इस संगतता पर ध्यान दें, पिस्टन → बल्ला, सिलिंडर → विकिट, अणु → गेंद)।
व्याख्या:
यहाँ गेंद और अणु के टकराव के दौरान चालों का विश्लेषण किया गया है। जब बल्ला स्थिर होता है, तो गेंद विपरीत दिशा में उसी चाल से लौटती है। परंतु जब बल्ला गेंद की ओर गति कर रहा होता है, तो गेंद की वापसी चाल बढ़ जाती है। इसी सिद्धांत को पिस्टन और गैस के टकराव में लागू किया गया है, जिससे गैस का ताप बढ़ता है। खेल में भारी बल्ला गेंद को अधिक प्रभाव से मारने में सहायता करता है क्योंकि वह गेंद की चाल को बढ़ाता है।
Q2.12.1 ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। ऑक्सीजन के एक अणु का व्यास 3 Å लीजिए।
उत्तर:
STP पर 1 मोल गैस का आयतन = 22.4 लीटर = 22.4 × 10⁻³ m³ एक ऑक्सीजन अणु का व्यास d = 3 Å = 3 × 10⁻¹⁰ m अणु का आयतन = (4/3)π (d/2)³ = (4/3)π (1.5 × 10⁻¹⁰)³ = 1.41 × 10⁻²⁹ m³ 1 मोल में अणुओं की संख्या = N_A = 6.022 × 10²³ अणुओं का कुल आयतन = N_A × अणु का आयतन = 6.022 × 10²³ × 1.41 × 10⁻²⁹ = 8.49 × 10⁻⁶ m³ STP पर गैस का कुल आयतन = 22.4 × 10⁻³ m³ अनुपात = (अणुओं का कुल आयतन) / (गैस का कुल आयतन) = 8.49 × 10⁻⁶ / 22.4 × 10⁻³ = 3.79 × 10⁻⁴ अर्थात्, अणुओं का कुल आयतन गैस के कुल आयतन का लगभग 0.000379 भाग है।
व्याख्या:
पहले अणु के आयतन की गणना की गई। फिर 1 मोल में अणुओं की संख्या से कुल अणु आयतन निकाला। अंत में कुल गैस आयतन से अनुपात निकाला।
Q3.12.2 मोलर आयतन, STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP : 1 atm दाब, 0 °C)। दशार्ध्य कि यह 22.4 लीटर है।
उत्तर:
यह एक तथ्यात्मक कथन है। STP (Standard Temperature and Pressure) पर आदर्श गैस का मोलर आयतन 22.4 लीटर होता है। इसका अर्थ है कि 1 मोल गैस का आयतन 0 °C ताप और 1 atm दाब पर 22.4 लीटर होता है।
व्याख्या:
यह प्रश्न मोलर आयतन की अवधारणा को समझाने के लिए है।
Q4.12.3 चित्र 12.8 में ऑक्सीजन के 1.00×10⁻³ kg द्रव्यमान के लिए PV/T एवं P में, दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ दशार्ध्य गए हैं। (a) बिंदुकित रेखा क्या दशार्ध्य है? (b) क्या सत्य है : T₁ > T₂ अथवा T₁ < T₂? (c) y-अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ PV/T का मान क्या है? (d) यदि हम ऐसे ही ग्राफ 1.00×10⁻³ kg हाइड्रोजन के लिए बनाएँ तो भी क्या उस बिंदु पर जहाँ वक्र y-अक्ष से मिलते हैं PV/T का मान यही होगा? यदि नहीं तो हाइड्रोजन के कितने द्रव्यमान के लिए PV/T का मान (कम दाब और उच्च ताप के क्षेत्र के लिए वही होगा? H₂ का अणु द्रव्यमान = 2.02 u, O₂ का अणु द्रव्यमान = 32.0 u, R = 8.31 J mol⁻¹ K⁻¹)
उत्तर:
(a) बिंदुकित रेखा वह रेखा है जहाँ PV/T का मान दाब के विभिन्न मानों पर समान रहता है, अर्थात् यह आदर्श गैस समीकरण PV = nRT के अनुसार nR का मान दर्शाता है। (b) चूंकि PV/T = nR है और n व R स्थिर हैं, अतः T₁ > T₂ होगा यदि ग्राफ में P के बढ़ने पर PV/T घटता है। चित्र के अनुसार, उच्च ताप T₁ पर PV/T का मान कम होगा, अतः T₁ < T₂। (c) y-अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ PV/T का मान nR होता है। यह मान द्रव्यमान और गैस के प्रकार पर निर्भर करता है। (d) हाइड्रोजन के लिए भी PV/T का मान वही होगा यदि द्रव्यमान ऐसा हो कि मोल की संख्या समान हो। चूंकि PV/T = nR, और n = m / M (m = द्रव्यमान, M = मोलर द्रव्यमान), अतः हाइड्रोजन के लिए m_H2 = m_O2 × (M_H2 / M_O2) = 1.00×10⁻³ × (2.02 / 32.0) = 6.31×10⁻⁵ kg होगा। इस द्रव्यमान पर ही PV/T का मान समान होगा।
व्याख्या:
PV/T का मान nR होता है, जो मोल की संख्या और गैस स्थिरांक पर निर्भर करता है। विभिन्न गैसों के लिए समान PV/T मान पाने हेतु मोल की संख्या समान होनी चाहिए।
Q5.12.4 एक ऑक्सीजन सिलिंडर जिसका आयतन 30 लीटर है, में ऑक्सीजन का आरंभिक दाब 15 atm एवं ताप 27 °C है। इसमें से कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी (गेज) दाब गिर कर 11 atm एवं ताप गिर कर 17 °C हो जाता है। ज्ञात कीजिए कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा निकाली गई है। (R = 8.31 J mol⁻¹ K⁻¹, ऑक्सीजन का अणु द्रव्यमान O₂ = 32 u)
उत्तर:
दिए गए: V = 30 L = 0.03 m³ (परिवर्तन आवश्यक नहीं) P₁ = 15 atm, T₁ = 27 °C = 300 K P₂ = 11 atm, T₂ = 17 °C = 290 K आदर्श गैस समीकरण: PV = nRT प्रारंभिक मोल संख्या: n₁ = (P₁ V) / (R T₁) अंतिम मोल संख्या: n₂ = (P₂ V) / (R T₂) निकाली गई मोल संख्या: Δn = n₁ - n₂ = (P₁ V)/(R T₁) - (P₂ V)/(R T₂) = (V/R) [P₁/T₁ - P₂/T₂] R को atm·L/(mol·K) में बदलें: R = 0.0821 atm·L/(mol·K) तो, Δn = (30 / 0.0821) [15/300 - 11/290] = 365.28 × (0.05 - 0.03793) = 365.28 × 0.01207 = 4.41 mol द्रव्यमान: Δm = Δn × M = 4.41 × 32 = 141.1 g = 0.141 kg अतः सिलिंडर से लगभग 0.141 किलोग्राम ऑक्सीजन निकाली गई।
व्याख्या:
आदर्श गैस समीकरण से प्रारंभिक और अंतिम मोल संख्या ज्ञात कर उनका अंतर निकाला। फिर मोलर द्रव्यमान से द्रव्यमान निकाला।
Q6.12.5 वायु का एक बुलबुला, जिसका आयतन 1.0 cm³ है, 40 m गहरी झील की तली से जहाँ ताप 12 °C है, उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है जहाँ ताप 35 °C है। अब इसका आयतन क्या होगा?
उत्तर:
दिए गए: V₁ = 1.0 cm³ = 1.0 × 10⁻⁶ m³ T₁ = 12 °C = 285 K T₂ = 35 °C = 308 K गहराई h = 40 m जल का घनत्व ρ = 1000 kg/m³ (लगभग) गुरुत्वाकर्षण g = 9.8 m/s² तली पर दबाव: P₁ = P_atm + ρgh = 1 atm + (1000)(9.8)(40) Pa = 1.013 × 10⁵ Pa + 3.92 × 10⁵ Pa = 5.0 × 10⁵ Pa ऊपर सतह पर दबाव: P₂ = 1 atm = 1.013 × 10⁵ Pa आदर्श गैस समीकरण के अनुसार: (P₁ V₁)/T₁ = (P₂ V₂)/T₂ V₂ = (P₁ V₁ T₂) / (P₂ T₁) = (5.0 × 10⁵ × 1.0 × 10⁻⁶ × 308) / (1.013 × 10⁵ × 285) = (1.54 × 10⁻¹) / (2.89 × 10⁴) ≈ 5.34 × 10⁻⁶ m³ V₂ = 5.34 cm³ अतः बुलबुला सतह पर लगभग 5.34 cm³ आयतन का होगा।
व्याख्या:
बुलबुले के दबाव और तापमान के परिवर्तन से आयतन का निर्धारण आदर्श गैस समीकरण से किया।
Q7.12.6 एक कमरे में, जिसकी धारिता 25.0 m³ है, 27 °C ताप और 1 atm दाब पर, वायु के कुल अणुओं (जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जलवाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं) की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिए गए: V = 25.0 m³ T = 27 °C = 300 K P = 1 atm = 1.013 × 10⁵ Pa आदर्श गैस समीकरण: PV = nRT मोल की संख्या: n = PV / RT = (1.013 × 10⁵ × 25) / (8.31 × 300) = (2.5325 × 10⁶) / 2493 = 1016.3 mol अणुओं की संख्या: N = n × N_A = 1016.3 × 6.022 × 10²³ = 6.12 × 10²⁶ अणु अतः कमरे में लगभग 6.12 × 10²⁶ अणु हैं।
व्याख्या:
आदर्श गैस समीकरण से मोल की संख्या ज्ञात कर, अवोगाद्रो संख्या से कुल अणुओं की संख्या निकाली।
Q8.12.7 हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आकलन कीजिए (i) कमरे के ताप (27 °C) पर। (ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000 K) पर। (iii) 100 लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर।
उत्तर:
औसत तापीय ऊर्जा (एक परमाणु के लिए) = (3/2) k_B T जहाँ k_B = 1.38 × 10⁻²³ J/K (i) T = 27 °C = 300 K E = (3/2) × 1.38 × 10⁻²³ × 300 = 6.21 × 10⁻²¹ J (ii) T = 6000 K E = (3/2) × 1.38 × 10⁻²³ × 6000 = 1.24 × 10⁻¹⁹ J (iii) T = 10⁷ K E = (3/2) × 1.38 × 10⁻²³ × 10⁷ = 2.07 × 10⁻¹⁶ J अतः हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा क्रमशः 6.21×10⁻²¹ J, 1.24×10⁻¹⁹ J, और 2.07×10⁻¹⁶ J होगी।
व्याख्या:
औसत तापीय ऊर्जा का सूत्र (3/2)k_B T प्रयोग कर विभिन्न तापों पर ऊर्जा निकाली।
Bhautiki-II के सभी 7 अध्याय
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