Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
10.1 भूमिका
व्याख्या10.1 भूमिका
हम सभी के लिए ताप और ऊष्मा की अवधारणा सहज है। ताप किसी वस्तु की तप्तता की माप है, जैसे उबलते जल से भरी केतली बर्फ से अधिक तप्त होती है। भौतिकी में ऊष्मा और ताप की परिभाषा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। इस अध्याय में हम ऊष्मा क्या है, इसे कैसे मापते हैं, और एक वस्तु से दूसरी वस्तु में ऊष्मा के स्थानांतरण की विभिन्न प्रक्रियाओं का अध्ययन करेंगे। हम जानेंगे कि क्यों लोहार घोड़ागाड़ी के लकड़ी के पहिए की नेमी पर लोहे की रिंग को तप्त करता है, और सूर्य छिपने के बाद समुद्र तट पर पवन दिशा क्यों बदलती है। इसके अलावा, हम अवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया को भी समझेंगे, जिसमें ताप स्थिर रहते हुए भी ऊष्मा का प्रवाह होता है।
- ताप वस्तु की तप्तता की माप है।
- ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापांतर के कारण स्थानांतरित होती है।
- अध्याय में ऊष्मा के मापन और स्थानांतरण की प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाएगा।
- वस्तुओं के तापीय व्यवहार और अवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया समझी जाएगी।
- 📌 ताप: वस्तु की तप्तता की मात्रात्मक माप।
- 📌 ऊष्मा: ऊर्जा का वह रूप जो तापांतर के कारण स्थानांतरित होती है।
- 📌 अवस्था परिवर्तन: पदार्थ की एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन।
10.2 ताप तथा ऊष्मा
व्याख्या10.2 ताप तथा ऊष्मा
ताप किसी वस्तु की तप्तता या ठंडक की आपेक्षिक माप है। किसी वस्तु का ताप दूसरे वस्तु की तुलना में अधिक या कम हो सकता है। ताप बोध स्पर्श से होता है, लेकिन यह वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए पर्याप्त सटीक नहीं होता। ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापांतर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में स्थानांतरित होती है। उदाहरण के लिए, गर्म चाय का प्याला ठंडा होता है क्योंकि उसमें से ऊष्मा पर्यावरण में स्थानांतरित होती है, जबकि बर्फ का गिलास गर्म होता है क्योंकि उसमें से ऊष्मा पर्यावरण से गिलास में आती है। ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J) है, जबकि ताप का SI मात्रक केल्विन (K) है। ताप में वृद्धि से पदार्थ में कई परिवर्तन हो सकते हैं, जैसे तापीय प्रसार, अवस्था परिवर्तन आदि।
- ताप वस्तु की तप्तता की आपेक्षिक माप है।
- ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापांतर के कारण स्थानांतरित होती है।
- ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J) है, ताप का केल्विन (K)।
- ताप में वृद्धि से पदार्थ के भौतिक गुणों में परिवर्तन हो सकते हैं।
- 📌 ताप: वस्तु की तप्तता की मात्रात्मक माप।
- 📌 ऊष्मा: तापांतर के कारण ऊर्जा का स्थानांतरण।
10.3 ताप मापन
व्याख्या10.3 ताप मापन
तापमापी (थर्मामीटर) का उपयोग ताप की मात्रात्मक माप के लिए किया जाता है। ताप के साथ पदार्थों के भौतिक गुणों में परिवर्तन होते हैं, जैसे द्रवों का आयतन। काँच-में-द्रव तापमापी में पारा या ऐल्कोहॉल का उपयोग होता है, जो ताप के साथ आयतन में विस्तार करते है
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.10.1 निअॉन तथा CO₂ के त्रिक बिंदु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
त्रिक बिंदु ताप को सेल्सियस में बदलने के लिए सूत्र है: t_C = T_K - 273.15 फारेनहाइट में बदलने के लिए: t_F = (9/5) * t_C + 32 निअॉन के लिए: T = 24.57 K t_C = 24.57 - 273.15 = -248.58 °C t_F = (9/5)(-248.58) + 32 = -415.44 + 32 = -383.44 °F CO₂ के लिए: T = 216.55 K t_C = 216.55 - 273.15 = -56.6 °C t_F = (9/5)(-56.6) + 32 = -101.88 + 32 = -69.88 °F अतः निअॉन का त्रिक बिंदु -248.58 °C तथा -383.44 °F है, और CO₂ का त्रिक बिंदु -56.6 °C तथा -69.88 °F है।
व्याख्या:
केल्विन से सेल्सियस में परिवर्तन के लिए 273.15 घटाते हैं। फिर सेल्सियस से फारेनहाइट में (9/5) गुणा कर 32 जोड़ते हैं।
Q2.10.2 दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिंदु को 200 A तथा 350 B द्वारा परिभाषित किया गया है। $T_A$ तथा $T_B$ में क्या संबंध है?
उत्तर:
जल के त्रिक बिंदु पर ताप A मापक्रम में 200 A और B मापक्रम में 350 B है। अतः दोनों मापक्रमों के तापों का अनुपात: \[ \frac{T_A}{T_B} = \frac{200}{350} = \frac{4}{7} \] इस प्रकार, \( T_A = \frac{4}{7} T_B \) होगा।
व्याख्या:
दोनों मापक्रमों में त्रिक बिंदु के तापों के अनुपात से उनके बीच संबंध ज्ञात किया जाता है।
Q3.10.3 किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है $$ R = R_0 \left[1 + \alpha (T - T_0)\right] $$ यदि तापमापी का जल के त्रिक बिंदु 273.16 K पर प्रतिरोध 101.6 Ω तथा लैड के सामान्य संगलन बिंदु (600.5 K) पर प्रतिरोध 165.5 Ω है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.4 Ω है।
उत्तर:
दी गई जानकारी: R_0 = 101.6 Ω at T_0 = 273.16 K R = 165.5 Ω at T = 600.5 K प्रतिरोध का नियम: R = R_0 [1 + α (T - T_0)] पहले α ज्ञात करें: 165.5 = 101.6 [1 + α (600.5 - 273.16)] => 165.5 / 101.6 = 1 + α (327.34) => 1.629 = 1 + 327.34 α => α = (1.629 - 1)/327.34 = 0.629 / 327.34 = 0.00192 K⁻¹ अब प्रतिरोध 123.4 Ω पर ताप ज्ञात करें: 123.4 = 101.6 [1 + 0.00192 (T - 273.16)] => 123.4 / 101.6 = 1 + 0.00192 (T - 273.16) => 1.215 = 1 + 0.00192 (T - 273.16) => 0.215 = 0.00192 (T - 273.16) => T - 273.16 = 0.215 / 0.00192 = 111.98 => T = 273.16 + 111.98 = 385.14 K अतः तापमापी का प्रतिरोध 123.4 Ω होने पर ताप लगभग 385.14 K होगा।
व्याख्या:
प्रतिरोध के ताप के साथ परिवर्तन के नियम से α ज्ञात कर, फिर प्रतिरोध के दिए मान से ताप निकाला गया।
Q4.10.4 निम्नलिखित के उत्तर दीजिए: (a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिंदु एक मानक नियत बिंदु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत बिंदु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था।) क्या दोष है? (b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिंदु थे जिनको क्रमशः 0 °C तथा 100 °C संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिंदु जल का त्रिक बिंदु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिंदु क्या है? (c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) $T$ तथा सेल्सियस मापक्रम पर ताप $t_c$ में संबंध इस प्रकार है: $$ t_c = T - 273.15 $$ इस संबंध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा? (d) उस परम ताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अंतराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अंतराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिंदु का ताप क्या होगा?
उत्तर:
(a) जल का त्रिक बिंदु एक मानक नियत बिंदु इसलिए है क्योंकि यह ताप और दबाव का एक निश्चित और पुनरुत्पादनीय बिंदु है, जो प्रयोगशाला में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। हिम के गलनांक और जल के क्वथनांक को मानक नियत बिंदु मानने में दोष यह है कि ये बिंदु दबाव और शुद्धता पर निर्भर करते हैं तथा प्रयोग में स्थिरता कम होती है। (b) केल्विन मापक्रम पर जल का त्रिक बिंदु 273.16 K है। अन्य नियत बिंदु है जल का सामान्य क्वथनांक, जो लगभग 373.16 K होता है। (c) 273.15 इसलिए लिखा क्योंकि यह मान अधिक सटीक और प्रयोगात्मक रूप से स्वीकार्य है। 273.16 जल के त्रिक बिंदु का ताप है, जबकि 273.15 शून्य सेल्सियस के लिए परिभाषित है। (d) यदि परम ताप मापक्रम का एकांक अंतराल फारेनहाइट के एकांक अंतराल के बराबर है, तो जल के त्रिक बिंदु का ताप 491.67 °F होगा। (यह 273.16 K को फारेनहाइट में परिवर्तित करने पर प्राप्त होता है।)
व्याख्या:
प्रत्येक भाग में तापमिति के मानक बिंदुओं और मापक्रमों के सिद्धांतों का वर्णन किया गया है।
Q5.10.5 दो आदर्श गैस तापमापियों $A$ तथा $B$ में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं : | ताप | दाब | दाब | | --- | --- | --- | | | तापमापी A में | तापमापी B में | | जल का त्रिक बिंदु | $1.250 \times 10^5$ Pa | $0.200 \times 10^5$ Pa | | सल्फर का सामान्य गलनांक | $1.797 \times 10^5$ Pa | $0.287 \times 10^5$ Pa | (a) तापमापियों $A$ तथा $B$ के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं? (b) आपके विचार से तापमापियों $A$ तथा $B$ के उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
उत्तर:
(a) आदर्श गैस तापमापी में ताप को दाब से मापा जाता है। दाब और ताप के बीच समानुपाती संबंध होता है। तापमापी A के लिए: \[ \frac{P_{S}}{P_{T}} = \frac{T_{S}}{T_{T}} \Rightarrow T_{S} = T_{T} \frac{P_{S}}{P_{T}} \] जहाँ, P_T = जल का त्रिक बिंदु दाब = $1.250 \times 10^5$ Pa T_T = जल का त्रिक बिंदु ताप = 273.16 K P_S = सल्फर का सामान्य गलनांक दाब = $1.797 \times 10^5$ Pa अतः, \[ T_S = 273.16 \times \frac{1.797 \times 10^5}{1.250 \times 10^5} = 273.16 \times 1.4376 = 392.5 K \] तापमापी B के लिए: P_T = $0.200 \times 10^5$ Pa P_S = $0.287 \times 10^5$ Pa \[ T_S = 273.16 \times \frac{0.287 \times 10^5}{0.200 \times 10^5} = 273.16 \times 1.435 = 391.9 K \] अतः दोनों तापमापियों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप लगभग 392 K हैं। (b) अंतर का कारण गैसों के अणु संरचना, गैस के व्यवहार में सूक्ष्म भिन्नता, और प्रयोग की स्थितियाँ हो सकती हैं। विसंगति कम करने के लिए प्रयोग में तापमान नियंत्रण, दाब मापन की सटीकता, और गैस की शुद्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
व्याख्या:
आदर्श गैस नियम से दाब और ताप के अनुपात से परमताप निकाला गया। अंतर के कारणों और सुधार के उपाय बताए गए।
Q6.10.6 किसी 1m लंबे स्टील के फीते का यथार्थ अशांकन 27.0 °C पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45°C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लंबाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.0 °C होगा उस दिन इसी छड़ की लंबाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = $1.20 \times 10^{-5}$ K⁻¹
उत्तर:
दी गई जानकारी: लंबाई मापी गई L_m = 63.0 cm ताप T = 45 °C अशंकित ताप T_0 = 27.0 °C रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.20 × 10⁻⁵ K⁻¹ लंबाई का प्रसार सूत्र: L = L_0 [1 + α (T - T_0)] यहाँ L मापी गई लंबाई है, L_0 वास्तविक लंबाई। इसलिए, L_0 = \frac{L}{1 + α (T - T_0)} = \frac{63.0}{1 + 1.20 \times 10^{-5} (45 - 27)} = \frac{63.0}{1 + 1.20 \times 10^{-5} \times 18} = \frac{63.0}{1 + 2.16 \times 10^{-4}} = \frac{63.0}{1.000216} = 62.986 cm अतः उस दिन स्टील की वास्तविक लंबाई लगभग 62.99 cm थी। 27.0 °C पर इसी छड़ की लंबाई वही होगी जो यथार्थ अशंकित लंबाई है, अर्थात् 62.99 cm।
व्याख्या:
प्रसार के सूत्र से मापी गई लंबाई से वास्तविक लंबाई निकाली गई।
Q7.10.7 किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27°C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है: $\alpha_{\text{स्टील}} = 1.20 \times 10^{-5}$ K⁻¹
उत्तर:
दी गई जानकारी: 27°C पर, धुरी का व्यास D_d = 8.70 cm पहिए का व्यास D_p = 8.69 cm धुरी को ठंडा किया जाता है ताकि उसका व्यास घट जाए और पहिया चढ़ सके। धुरी का व्यास ताप T पर: D_d(T) = D_d(27) [1 + \alpha (T - 27)] यहाँ T < 27°C होगा क्योंकि ठंडा किया जा रहा है। पहिया का व्यास स्थिर है = 8.69 cm चढ़ने के लिए: D_d(T) = D_p => 8.70 [1 + 1.20 \times 10^{-5} (T - 27)] = 8.69 => 1 + 1.20 \times 10^{-5} (T - 27) = \frac{8.69}{8.70} = 0.99885 => 1.20 \times 10^{-5} (T - 27) = 0.99885 - 1 = -0.00115 => T - 27 = \frac{-0.00115}{1.20 \times 10^{-5}} = -95.83 => T = 27 - 95.83 = -68.83 °C अतः धुरी को लगभग -68.8 °C तक ठंडा करना होगा ताकि पहिया धुरी पर चढ़ सके।
व्याख्या:
धुरी के व्यास में ताप के अनुसार परिवर्तन से पहिया के व्यास के बराबर ताप निकाला गया।
Q8.10.8 ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27.0 °C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227 °C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = $1.70 \times 10^{-5}$ K⁻¹
उत्तर:
दी गई जानकारी: प्रारंभिक ताप T_0 = 27.0 °C अंतिम ताप T = 227 °C प्रारंभिक व्यास d_0 = 4.24 cm रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.70 × 10⁻⁵ K⁻¹ छिद्र के व्यास का प्रसार: छिद्र का व्यास बढ़ेगा क्योंकि छिद्र भी धातु के समान प्रसार करता है। व्यास का परिवर्तन: \[ d = d_0 [1 + \alpha (T - T_0)] \] \[ d = 4.24 [1 + 1.70 \times 10^{-5} (227 - 27)] = 4.24 [1 + 1.70 \times 10^{-5} \times 200] \] \[ = 4.24 [1 + 0.0034] = 4.24 \times 1.0034 = 4.254 cm \] परिवर्तन: \[ \Delta d = d - d_0 = 4.254 - 4.24 = 0.014 cm \] अतः छिद्र के व्यास में लगभग 0.014 cm की वृद्धि होगी।
व्याख्या:
छिद्र का व्यास भी धातु के समान रैखिक प्रसार गुणांक से बढ़ता है।
Bhautiki-II के सभी 7 अध्याय
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