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Chapter 4

🎓 Class 11📖 Bhautiki-II📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 7Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

11.1 भूमिका

व्याख्या

11.1 भूमिका

ऊष्मागतिकी भौतिकी की वह शाखा है जो ऊष्मा, कार्य, तापमान और ऊर्जा के अन्य रूपों के बीच अंतरण और रूपांतरण का अध्ययन करती है। इस अध्याय की शुरुआत में हम ऊष्मा और कार्य के बीच संबंधों को समझेंगे, जैसे कि हथेलियों को रगड़ने पर उत्पन्न ऊष्मा और भाप इंजन में ऊष्मा का कार्य में परिवर्तन। इतिहास में ऊष्मा को पहले एक अदृश्य तरल 'कैलॉरिक' माना जाता था, जो उच्च ताप से निम्न ताप की ओर बहता था। परंतु 1798 में बेंजामिन थॉमसन के प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है, जो कार्य से उत्पन्न हो सकती है। इस प्रकार ऊर्जा के संरक्षण और रूपांतरण के नियमों की खोज हुई, जो आधुनिक ऊष्मागतिकी के आधार हैं। ऊष्मागतिकी स्थूल विज्ञान है क्योंकि यह पदार्थ की आण्विक संरचना के बजाय स्थूल अवस्थाओं पर ध्यान देती है, जैसे दाब, आयतन और ताप। यांत्रिकी और ऊष्मागतिकी में अंतर यह है कि यांत्रिकी में संपूर्ण निकाय की गति पर ध्यान दिया जाता है, जबकि ऊष्मागतिकी में केवल अणुओं की यादृच्छिक गति से संबंधित आंतरिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित होता है।

  • ऊष्मागतिकी ऊष्मा, कार्य, ताप और ऊर्जा के अंतरण का अध्ययन करती है।
  • ऊष्मा को पहले कैलॉरिक नामक तरल माना जाता था, जिसे बाद में ऊर्जा का रूप समझा गया।
  • बेंजामिन थॉमसन के प्रयोग ने ऊष्मा और कार्य के बीच संबंध स्थापित किया।
  • ऊष्मागतिकी स्थूल विज्ञान है, जो स्थूल अवस्थाओं पर आधारित है, न कि आण्विक संरचना पर।
  • यांत्रिकी में संपूर्ण निकाय की गति पर ध्यान होता है, जबकि ऊष्मागतिकी में आंतरिक ऊर्जा पर।
  • 📌 ऊष्मागतिकी: ऊष्मा और ऊर्जा के अंतरण का अध्ययन।
  • 📌 कैलॉरिक: प्राचीन काल में ऊष्मा को समझाने वाला तरल।
  • 📌 आंतरिक ऊर्जा: निकाय के अणुओं की गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग।

11.2 तापीय साम्य

व्याख्या

11.2 तापीय साम्य

तापीय साम्य की अवधारणा से तात्पर्य है कि जब दो निकाय ऊष्मा के आदान-प्रदान के लिए संपर्क में आते हैं, तो वे अंततः एक समान ताप पर पहुँच जाते हैं और ऊष्मा का प्रवाह रुक जाता है। ऊष्मागतिकीय साम्यावस्था में निकाय के स्थूल चर जैसे दाब, आयतन, ताप आदि समय के साथ परिवर्तित नहीं होते। उदाहरण के लिए, दो गैसें A और B यदि एक रूद्धोष्म दीवार से पृथक हों, तो वे ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं कर पातीं और उनकी अवस्थाएँ स्थिर रहती हैं। यदि वही दीवार ऊष्मा-पार्थ हो, तो दोनों गैसें ऊष्मा का आदान-प्रदान करेंगी जब तक कि उनका ताप समान न हो जाए। इस स्थिति को तापीय साम्य कहते हैं। तापीय साम्य की स्थिति में दोनों निकायों का ताप समान होता है। यह अवधारणा ऊष्मागतिकी के शून्य कोटि नियम की नींव है, जो ताप की परिभाषा को स्थापित करता है।

  • तापीय साम्य तब होता है जब दो निकायों का ताप समान हो जाता है।
  • रूद्धोष्म दीवार ऊष्मा के प्रवाह को रोकती है, जबकि ऊष्मा-पार्थ दीवार ऊष्मा को प्रवाहित करती है।
  • ऊष्मागतिकीय साम्यावस्था में स्थूल चर समय के साथ अपरिवर्तित रहते हैं।
  • तापीय साम्य की स्थिति में ऊष्मा का प्रवाह समाप्त हो जाता है।
  • 📌 तापीय साम्य: दो निकायों का समान ताप पर पहुँच जाना।
  • 📌 रूद्धोष्म दीवार: ऊष्मा का आदान-प्रदान रोकने वाली दीवार।
  • 📌 ऊष्मा-पार्थ दीवार: ऊष्मा को प्रवाहित करने वाली दीवार।

11.3 ऊष्मागतिकी का शून्य कोटि नियम

व्याख्या

11.3 ऊष्मागतिकी का शून्य कोटि नियम

ऊष्मागतिकी का शून्य कोटि नियम कहता है कि यदि दो निकाय A और B किसी तीसरे निकाय C के साथ पृथक्-पृथक् रूप से तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। इसका अर्थ है कि ताप एक ऐसी भौतिक राशि है जो तापीय साम्य वाले निकायों के लिए समान हो

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.11.1 कोई गीजूर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27 °C से 77 °C तक गर्म करता है । यदि गीजूर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी ? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0×10⁴ J g⁻¹ है ?

उत्तर:

दी गई जानकारी: जल का प्रवाह = 3.0 लीटर/मिनट = 3.0 × 10⁻³ m³/मिनट जल का घनत्व = 1000 kg/m³ (लगभग) जल का द्रव्यमान प्रवाह = 3.0 × 10⁻³ × 1000 = 3.0 kg/मिनट तापमान वृद्धि ΔT = 77 - 27 = 50 °C जल की विशिष्ट ऊष्मा C = 4200 J/kg°C ईंधन की दहन-ऊष्मा = 4.0 × 10⁴ J/g ऊष्मा की दर (Q) = द्रव्यमान प्रवाह × C × ΔT Q = 3.0 × 4200 × 50 = 6.3 × 10⁵ J/मिनट चूंकि दर प्रति मिनट है, इसे प्रति सेकंड में बदलें: Q = 6.3 × 10⁵ / 60 = 10500 J/s ईंधन की दहन-ऊष्मा = 4.0 × 10⁴ J/g ईंधन की दर (m) = ऊष्मा की दर / दहन-ऊष्मा m = 10500 / (4.0 × 10⁴) = 0.2625 g/s अतः ईंधन के व्यय की दर लगभग 0.26 ग्राम प्रति सेकंड होगी।

व्याख्या:

जल के द्रव्यमान प्रवाह को ज्ञात किया, फिर जल की ऊष्मा वृद्धि के लिए आवश्यक ऊष्मा की दर निकाली। इसके बाद ईंधन की दहन-ऊष्मा से ईंधन की मासिक दर ज्ञात की।

MediumNCERT
Q2.11.2 स्थिर दाब पर 2.0×10⁻² kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45 °C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए ? (N₂ का अणुभार = 28; R = 8.3 J mol⁻¹ K⁻¹) ।

उत्तर:

दी गई जानकारी: मास m = 2.0 × 10⁻² kg ताप वृद्धि ΔT = 45 °C = 45 K N₂ का अणुभार M = 28 g/mol = 0.028 kg/mol गैस स्थिर दाब विशिष्ट ऊष्मा C_p = ? (गैस के लिए C_p = C_v + R) सबसे पहले मोल की संख्या n = m / M = 0.02 / 0.028 = 0.714 mol नाइट्रोजन एक द्विपरमाणु गैस है, अतः C_v = (5/2) R = (5/2) × 8.3 = 20.75 J/mol·K C_p = C_v + R = 20.75 + 8.3 = 29.05 J/mol·K ऊष्मा की आपूर्ति Q = n × C_p × ΔT Q = 0.714 × 29.05 × 45 = 933.5 J अतः 933.5 जूल ऊष्मा की आपूर्ति करनी होगी।

व्याख्या:

मोल की संख्या ज्ञात की, फिर स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्मा का उपयोग कर ऊष्मा की मात्रा निकाली।

MediumNCERT
Q3.11.3 व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है : (a) भिन्न-भिन्न तापों T₁ व T₂ के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अंतिम ताप (T₁ + T₂)/2 ही हो। (b) रासायनिक या नाभिकीय संयंत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो संयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए। (c) कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है। (d) किसी बंदरगाह के समीप के शहर की जलवायु, समान अश्लेषण के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।

उत्तर:

(a) अंतिम ताप (T₁ + T₂)/2 नहीं होता क्योंकि दोनों पिण्डों के द्रव्यमान और विशिष्ट ऊष्मा भिन्न हो सकते हैं। ऊष्मा का आदान-प्रदान द्रव्यमान और विशिष्ट ऊष्मा के अनुपात में होता है, इसलिए अंतिम ताप उनके भारित औसत के समान होगा। (b) शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए ताकि वह अधिक ऊष्मा अवशोषित कर सके और संयंत्र के तापमान को स्थिर रख सके, जिससे संयंत्र के भाग अधिक गर्म न हों। (c) कार चलाने पर टायर घर्षण और संपीड़न के कारण गर्म होते हैं, जिससे गैस के अणु अधिक गतिशील हो जाते हैं और वायुदाब बढ़ जाता है। (d) बंदरगाह के समीप का शहर समुद्र के निकट होने के कारण समुद्र की ऊष्मा धारिता के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है, जिससे जलवायु शीतोष्ण होती है, जबकि रेगिस्तानी शहर में तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव होता है।

व्याख्या:

प्रत्येक उपप्रश्न के लिए भौतिक कारणों और सिद्धांतों के आधार पर व्याख्या की गई है।

MediumNCERT
Q4.11.4 गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिंडर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है । सिलिंडर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है । यदि गैस को उसके आरंभिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा ?

उत्तर:

दी गई जानकारी: मोल संख्या n = 3 आरंभिक ताप T = 273 K (मानक ताप) आरंभिक दाब P = 1 atm आरंभिक आयतन V चूंकि दीवारें ऊष्मारोधी हैं और पिस्टन भी ऊष्मारोधी है, अतः प्रक्रिया एकांतापीय (adiabatic) होगी। एकांतापीय प्रक्रिया के लिए: P V^γ = constant जहाँ γ = C_p / C_v = 7/5 = 1.4 (हाइड्रोजन के लिए) आयतन आधा किया गया है: V_2 = V_1 / 2 तो, P_1 V_1^γ = P_2 V_2^γ => P_2 = P_1 (V_1 / V_2)^γ = P_1 (2)^1.4 P_2 = 1 × 2^{1.4} = 1 × 2^{1 + 0.4} = 1 × 2 × 2^{0.4} 2^{0.4} ≈ 1.32 तो, P_2 ≈ 1 × 2 × 1.32 = 2.64 atm अतः दाब लगभग 2.64 गुना बढ़ जाएगा।

व्याख्या:

ऊष्मारोधी दीवारों के कारण प्रक्रिया एकांतापीय होती है। एकांतापीय समीकरण P V^γ = constant का उपयोग कर दाब में वृद्धि ज्ञात की।

MediumNCERT
Q5.11.5 रूद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था A से दूसरी साम्यावस्था B तक ले जाने में निकाय पर 22.3 J कार्य किया जाता है । यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्था A से अवस्था B में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा 9.35 cal है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है? (1 cal = 4.19 J)।

उत्तर:

दी गई जानकारी: कार्य W₁ = 22.3 J (प्रथम प्रक्रिया में) नेट ऊष्मा Q₂ = 9.35 cal = 9.35 × 4.19 = 39.17 J ऊष्मा-ऊर्जा समीकरण: ΔU = Q - W चूंकि A से B की अवस्था परिवर्तन में आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन ΔU समान होगा, अतः प्रथम प्रक्रिया: ΔU = Q₁ - W₁ दूसरी प्रक्रिया: ΔU = Q₂ - W₂ दोनों के लिए ΔU समान है, अतः Q₁ - W₁ = Q₂ - W₂ W₂ = Q₂ - (Q₁ - W₁) Q₁ ज्ञात नहीं है, लेकिन चूंकि पहली प्रक्रिया रूद्धोष्म है, तो Q₁ = 0 इसलिए, W₂ = Q₂ + W₁ = 39.17 + 22.3 = 61.47 J अतः दूसरी प्रक्रिया में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य 61.47 J होगा।

व्याख्या:

ऊष्मा-ऊर्जा समीकरण का उपयोग कर दोनों प्रक्रियाओं में आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन समान मानते हुए कार्य की गणना की।

HardNCERT
Q6.11.6 समान धारिता वाले दो सिलिंडर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं । A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णत: निर्वातित है । स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है । निम्नलिखित का उत्तर दीजिए : (a) सिलिंडर A तथा B में अंतिम दाब क्या होगा ? (b) गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा ? (c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा ? (d) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अंतिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके P-V-T पृष्ठ पर होंगी ?

उत्तर:

(a) चूंकि दोनों सिलिंडर समान धारिता वाले हैं और B निर्वातित है, गैस स्टॉपकॉक खुलने पर दोनों सिलिंडरों में फैल जाएगी। अंतिम दाब P_f = P_i / 2 होगा क्योंकि आयतन दोगुना हो गया है। (b) गैस का विस्तार निर्वात में होता है (फ्री एक्सपैंशन), जिसमें कोई कार्य नहीं होता और ऊष्मा का आदान-प्रदान भी नहीं होता। अतः आंतरिक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होगा। (c) आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन न होने के कारण ताप भी अपरिवर्तित रहेगा। (d) इस प्रक्रिया में गैस की माध्यमिक अवस्थाएँ P-V-T पृष्ठ पर नहीं होंगी क्योंकि यह एक गैर-संतुलित (irreversible) प्रक्रिया है।

व्याख्या:

गैस का विस्तार निर्वात में होता है, जिससे कोई कार्य नहीं होता और आंतरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। अंतिम दाब आयतन के अनुपात में घटती है।

MediumNCERT
Q7.11.7 एक हीटर किसी निकाय को 100 W की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 J s⁻¹ की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?

उत्तर:

दी गई जानकारी: ऊष्मा की दर Q = 100 J/s कार्य की दर W = 75 J/s ऊष्मा-ऊर्जा समीकरण: ΔU/Δt = Q - W अतः, ΔU/Δt = 100 - 75 = 25 J/s अर्थात् आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि 25 जूल प्रति सेकंड होगी।

व्याख्या:

ऊष्मा की दर से कार्य की दर घटाकर आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि की दर ज्ञात की।

EasyNCERT
Q8.11.8 किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक चित्र (11.11) में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा यहाँ से F तक कुल किए गए कार्य का आकलन कीजिए।

उत्तर:

प्रश्न में चित्र 11.11 दिया गया है, जिसमें प्रक्रम D से E और E से F तक है। कार्य की गणना के लिए: कार्य = दबाव × आयतन परिवर्तन (यदि दबाव स्थिर हो) चूंकि प्रक्रम रेखीय है, कार्य को ग्राफ के नीचे क्षेत्रफल के रूप में भी मापा जा सकता है। D से E तक कार्य: यह क्षेत्र एक त्रिभुज या आयताकार क्षेत्र हो सकता है, चित्र के आधार पर क्षेत्रफल निकालें। E से F तक कार्य: यह समदाबी (isobaric) प्रक्रम है, अतः कार्य = P × (V_F - V_E) कुल कार्य = D से E का कार्य + E से F का कार्य (सटीक मान चित्र के आधार पर गणना की जानी चाहिए।)

व्याख्या:

कार्य की गणना ग्राफ के क्षेत्रफल और दबाव-आयतन संबंध से की जाती है।

MediumNCERT