Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
13.1 भूमिका
व्याख्या13.1 भूमिका
हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार की गतियाँ होती हैं, जिनमें से कुछ जैसे सरल रैखिक गति और प्रक्षेप्य गति अनावर्ती होती हैं। इसके विपरीत, एकसमान वर्तुल गति और ग्रहों की कक्षीय गति आवर्ती होती हैं, अर्थात् वे निश्चित समय अंतराल के बाद पुनः दोहराई जाती हैं। दोलन गति भी इसी प्रकार की आवर्ती गति है, जिसमें वस्तु अपनी संतुलन स्थिति के दोनों ओर बार-बार गति करती है। उदाहरण स्वरूप झूला, नदी में डूबती-उतरती नाव, वाष्प इंजन का पिस्टन, और दीवार घड़ी का लोलक। दोलन गति में वस्तु अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर गतिमान रहती है। दोलन गति भौतिकी का एक आधारभूत विषय है, क्योंकि अनेक भौतिक परिघटनाएँ जैसे ध्वनि, कम्पन, और तरंगें इसी संकल्पना पर आधारित हैं। इस अध्याय में हम दोलन गति और उससे संबंधित अवधारणाओं जैसे आवर्तकाल, आवृत्ति, विस्थापन, आयाम और कला को विस्तार से समझेंगे।
- दोलन वह गति है जिसमें वस्तु अपनी संतुलन स्थिति के दोनों ओर आवर्ती रूप से गतिमान रहती है।
- आवर्ती गति वह गति है जो निश्चित समय अंतराल के बाद स्वयं को दोहराती है।
- दैनिक जीवन में झूला, नदी में नाव, और पिस्टन की गति दोलन गति के उदाहरण हैं।
- दोलन गति भौतिकी के अनेक क्षेत्रों जैसे ध्वनि और तरंगों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
- इस अध्याय में दोलन गति की मूल अवधारणाओं का अध्ययन किया जाएगा।
- 📌 दोलन गति: ऐसी गति जिसमें वस्तु अपनी संतुलन स्थिति के दोनों ओर आवर्ती रूप से गतिमान रहती है।
- 📌 आवर्ती गति: वह गति जो निश्चित समय अंतराल के बाद पुनः दोहराई जाती है।
- 📌 माध्य स्थिति: वह स्थिति जहाँ वस्तु पर कुल बाह्य बल शून्य होता है।
13.2 दोलन और आवर्ती गति
व्याख्या13.2 दोलन और आवर्ती गति
इस अनुभाग में आवर्ती गति और दोलन गति के बीच संबंध को समझाया गया है। आवर्ती गति वह गति है जो निश्चित समय अंतराल के बाद पुनः दोहराई जाती है। उदाहरण के लिए, किसी कीट का रैम्प पर चढ़ना-गिरना, बालक का सीढ़ी पर चढ़ना-उतरना, या गेंद का हथेली से जमीन की ओर बार-बार मारना। इन उदाहरणों में ऊँचाई और समय के बीच ग्राफ आवर्ती होता है, जैसा कि चित्र 13.1 में दिखाया गया है। आवर्ती गति के लिए एक संतुलन अवस्था होती है, जहाँ वस्तु पर कुल बाह्य बल शून्य होता है। यदि वस्तु को इस स्थिति से विस्थापित किया जाए, तो वह पुनः संतुलन की ओर लौटने का प्रयास करती है, जिससे दोलन उत्पन्न होता है। दोलन गति में वस्तु अपनी संतुलन स्थिति के दोनों ओर गतिमान रहती है। आवर्ती गति और दोलन गति में अंतर यह है कि सभी दोलन आवर्ती होते हैं, लेकिन सभी आवर्ती गति दोलन नहीं होती। उदाहरण के लिए, ग्रहों की कक्षीय गति आवर्ती है लेकिन दोलन नहीं। दोलन और कंपन में भी आवृत्ति के आधार पर भेद होता है; कम आवृत्ति पर इसे दोलन और अधिक आवृत्ति पर कंपन कहा जाता है। सरल आवर्ती गति (SHM) दोलन गति का एक विशेष प्रकार है जिसमें वस्तु पर लगने वाला बल विस्थापन के समानुपाती और सदैव संतुलन की ओर होता है।
- आवर्ती गति वह गति है जो निश्चित समय अंतराल के बाद पुनः दोहराई जाती है।
- दोलन गति में वस्तु अपनी संतुलन स्थिति के दोनों ओर गतिमान रहती है।
- सभी दोलन आवर्ती होते हैं, लेकिन सभी आवर्ती गति दोलन नहीं होती।
- दोलन और कंपन में आवृत्ति के आधार पर अंतर होता है।
- सरल आवर्ती गति वह है जिसमें बल विस्थापन के समानुपाती और संतुलन की ओर होता है।
- 📌 आवर्तकाल (T): वह न्यूनतम समय अंतराल जिसके बाद गति पुनः दोहराई जाती है।
- 📌 आवृत्ति (v): प्रति इकाई समय दोलनों की संख्या, v = 1/T।
- 📌 सरल आवर्ती गति (SHM): ऐसी आवर्ती गति जिसमें बल विस्थापन के समानुपाती और सदैव संतुलन की ओर होता है।
13.2.1 आवर्तकाल तथा आवृत्ति
व्याख्या13.2.1 आवर्तकाल तथा आवृत्ति
आवर्ती गति में आवर्तकाल (T) वह न्यूनतम समय होता है जिसके पश्चात गति स्वयं को दोहराती है। इसका SI मात्रक सेकंड (s) है। आवर्तकाल के व्युत्क्रम से आवृत्ति (v) प्राप्त होती है, जो प्रति सेकंड दोलनों की संख्या होती है। आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है,
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.13.1 नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है? (i) किसी तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी एक वापसी यात्रा पूरी करना। (ii) किसी स्वतंत्रतापूर्वक लटकाए गए दंड चुंबक को उसकी N-S दिशा से विस्थापित कर छोड़ देना। (iii) अपने द्रव्यमान केंद्र के परित: घूर्णी गति करता कोई हाइड्रोजन अणु। (iv) किसी कमान से छोड़ा गया तीर।
उत्तर:
उत्तर: (i) तैराक नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाता है और वापसी करता है, अतः यह आवर्ती गति है क्योंकि वह अपनी प्रारंभिक स्थिति पर लौटता है। (ii) दंड चुंबक स्वतंत्रतापूर्वक लटकाया गया है और N-S दिशा से विस्थापित कर छोड़ दिया जाता है, यह सरल आवर्ती गति का उदाहरण है क्योंकि यह दोलन करता है। (iii) हाइड्रोजन अणु अपने द्रव्यमान केंद्र के परित: घूर्णी गति करता है, यह आवर्ती गति नहीं है क्योंकि यह घूर्णन है, आवर्ती गति नहीं। (iv) कमान से छोड़ा गया तीर आवर्ती गति नहीं करता क्योंकि यह एक बार चलकर आगे बढ़ता है और वापस नहीं आता।
व्याख्या:
आवर्ती गति वह है जिसमें कण अपनी प्रारंभिक स्थिति पर नियमित अंतराल पर लौटता है। तैराक और दंड चुंबक के उदाहरण आवर्ती गति हैं, जबकि हाइड्रोजन अणु की घूर्णी गति और तीर की गति आवर्ती गति नहीं हैं।
Q2.13.2 नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्ती गति को तथा कौन आवर्ती परंतु सरल आवर्ती गति नहीं निरूपित करते हैं? (i) पृथ्वी की अपने अक्ष के परित: घूर्णन गति। (ii) किसी U-नली में दोलायमान पारे के स्तंभ की गति। (iii) किसी चिकने वक्रीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेयरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिंदु से कुछ ऊपर के बिंदु से मुक्त रूप से छोड़ा जाए। (iv) किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परित: व्यापक कंपन।
उत्तर:
उत्तर: (i) पृथ्वी की अपने अक्ष के परित: घूर्णन गति आवर्ती है परंतु सरल आवर्ती गति नहीं है क्योंकि यह एक स्थायी घूर्णन है, दोलन नहीं। (ii) U-नली में दोलायमान पारे का स्तंभ सरल आवर्ती गति करता है क्योंकि यह साम्यावस्था के चारों ओर दोलन करता है। (iii) चिकने वक्रीय कटोरे में बॉल बेयरिंग की गति सरल आवर्ती गति है क्योंकि यह न्यूनतम बिंदु के चारों ओर दोलन करता है। (iv) बहुपरमाणुक अणु की साम्यावस्था के चारों ओर व्यापक कंपन सरल आवर्ती गति है क्योंकि यह छोटे दोलन होते हैं।
व्याख्या:
सरल आवर्ती गति वह होती है जिसमें दोलन साम्यावस्था के चारों ओर होता है और आवर्तकाल स्थिर होता है। पृथ्वी की घूर्णन गति आवर्ती है पर सरल आवर्ती गति नहीं।
Q3.13.3 चित्र 13.18 में किसी कण की रैखिक गति के लिए चार $x - t$ आरेख दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है (आवर्ती गति वाली गति का)।
उत्तर:
उत्तर: आरेखों में से केवल वह आरेख आवर्ती गति को निरूपित करता है जिसमें कण की स्थिति समय के साथ आवर्ती रूप से दोलन करती है, अर्थात् स्थिति समय के साथ आवर्ती रूप से दोलती है। आमतौर पर, आवर्ती गति के लिए $x(t)$ एक आवर्ती फलन होता है जैसे $x(t) = A \\sin(\omega t + \phi)$ या $x(t) = A \\cos(\omega t + \phi)$। आरेखों में से जो $x$ समय के साथ आवर्ती रूप से दोलता है, वही आवर्ती गति दर्शाता है। आवर्तकाल $T$ को $x(t)$ के आवर्ती व्यवहार से निकाला जा सकता है। यदि $x(t)$ का आवर्तकाल $T$ है, तो $x(t+T) = x(t)$ होता है। इस प्रश्न में, चित्र 13.18 के आरेखों को देखकर आवर्ती गति वाला आरेख पहचानना होगा और फिर उसका आवर्तकाल ज्ञात करना होगा।
व्याख्या:
आवर्ती गति वह है जिसमें कण की स्थिति समय के साथ आवर्ती रूप से दोलती है। आवर्तकाल वह समय होता है जिसमें कण अपनी स्थिति को दोहराता है।
Q4.13.4 नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन (a) सरल आवर्ती गति (b) आवर्ती परंतु सरल आवर्ती गति नहीं, तथा (c) अनावर्ती गति का निरूपण करते हैं। प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए : ( $\omega$ कोई धनात्मक अचर है।) (a) $\sin \omega t - \cos \omega t$ (b) $\sin^3 \omega t$ (c) $3 \cos \left( \frac{\pi}{4} - 2 \omega t \right)$ (d) $\cos \omega t + \cos 3 \omega t + \cos 5 \omega t$ (e) $\exp \left( -\omega^2 t^2 \right)$ (f) $1 + \omega t + \omega^2 t^2$
उत्तर:
उत्तर: (a) $\sin \omega t - \cos \omega t$ सरल आवर्ती गति है क्योंकि यह दो सरल आवर्ती फलनों का योग है। इसे $R \sin(\omega t + \phi)$ के रूप में लिखा जा सकता है। आवर्तकाल $T = \frac{2\pi}{\omega}$ है। (b) $\sin^3 \omega t$ आवर्ती है लेकिन सरल आवर्ती गति नहीं क्योंकि यह $\sin^3 x$ को त्रिकोणमितीय पहचान से $\frac{3 \sin x - \sin 3x}{4}$ लिखा जा सकता है, जो कई आवृत्तियों का योग है। आवर्तकाल $T = \frac{2\pi}{\omega}$ है। (c) $3 \cos \left( \frac{\pi}{4} - 2 \omega t \right)$ सरल आवर्ती गति है, आवर्तकाल $T = \frac{\pi}{\omega}$ है क्योंकि कोणीय आवृत्ति $2\omega$ है। (d) $\cos \omega t + \cos 3 \omega t + \cos 5 \omega t$ आवर्ती है पर सरल आवर्ती गति नहीं क्योंकि इसमें कई आवृत्तियाँ हैं। आवर्तकाल सबसे छोटी आवृत्ति के अनुसार $T = \frac{2\pi}{\omega}$ है। (e) $\exp \left( -\omega^2 t^2 \right)$ अनावर्ती गति है क्योंकि यह समय के साथ घटती है और आवर्ती नहीं है। (f) $1 + \omega t + \omega^2 t^2$ अनावर्ती गति है क्योंकि यह बहुपद फलन है और आवर्ती नहीं है।
व्याख्या:
सरल आवर्ती गति के लिए विस्थापन एकल आवृत्ति का त्रिकोणमितीय फलन होता है। जब कई आवृत्तियाँ हों या फलन आवर्ती न हो तो सरल आवर्ती गति नहीं होती।
Q5.13.5 कोई कण एक दूसरे से 10 cm दूरी पर स्थित दो बिंदुओं A तथा B के बीच रैखिक सरल आवर्ती गति कर रहा है। A से B की ओर की दिशा को धनात्मक दिशा मानकर वेग, त्वरण तथा कण पर लगे बल के चिह्न ज्ञात कीजिए जबकि यह कण (a) A सिरे पर है, (b) B सिरे पर है, (c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिंदु पर है, (d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है, (e) B की ओर जाते हुए A से 3 cm दूर है, तथा (f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है ।
उत्तर:
उत्तर: दिया गया है कि कण A और B के बीच सरल आवर्ती गति करता है, दूरी AB = 10 cm। सरल आवर्ती गति में विस्थापन x(t) = A cos(\omega t + \phi) होता है, जहाँ A = 5 cm (आयाम, क्योंकि दो बिंदुओं के बीच कुल दूरी 10 cm है, तो आयाम आधा होगा)। (i) विस्थापन x को A से मापा जाता है, जहाँ A = 0 से 10 cm के बीच। (ii) वेग v = dx/dt = -\omega A sin(\omega t + \phi) (iii) त्वरण a = d^2x/dt^2 = -\omega^2 x (iv) बल F = m a = -m \omega^2 x अब प्रत्येक स्थिति के लिए: (a) A सिरे पर है: x = 0 cm (यदि A को 0 माना जाए), परन्तु यहाँ A और B के बीच 10 cm है, मान लेते हैं A = 0 cm, B = 10 cm। अतः A सिरे पर x = 0 cm। - वेग: v = 0 (अधिकतम विस्थापन पर वेग शून्य होता है) - त्वरण: a = -\omega^2 x = 0 - बल: F = 0 (b) B सिरे पर है: x = 10 cm = +5 cm (आयाम के अनुसार) - वेग: v = 0 - त्वरण: a = -\omega^2 x = -\omega^2 (5 cm) - बल: F = -m \omega^2 (5 cm) (c) AB के मध्य बिंदु पर है: x = 5 cm = 0 cm (मध्य बिंदु को 0 माना जाता है) - वेग: अधिकतम (क्योंकि मध्य बिंदु पर वेग अधिकतम होता है) - त्वरण: a = 0 - बल: F = 0 (d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है: B से 2 cm दूर का मतलब x = 10 - 2 = 8 cm = +3 cm (आयाम के अनुसार) - वेग: धनात्मक या ऋणात्मक दिशा में, चिह्न गति की दिशा पर निर्भर - त्वरण: a = -\omega^2 x = -\omega^2 (3 cm) - बल: F = -m \omega^2 (3 cm) (e) B की ओर जाते हुए A से 3 cm दूर है: A से 3 cm दूर x = 3 cm = -2 cm (आयाम के अनुसार) - वेग: धनात्मक दिशा में - त्वरण: a = -\omega^2 x = -\omega^2 (-2 cm) = +2 \omega^2 cm - बल: F = +m \omega^2 (2 cm) (f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है: B से 4 cm दूर x = 10 - 4 = 6 cm = +1 cm - वेग: ऋणात्मक दिशा में - त्वरण: a = -\omega^2 x = -\omega^2 (1 cm) - बल: F = -m \omega^2 (1 cm) नोट: चिह्न गति की दिशा पर निर्भर करते हैं।
व्याख्या:
सरल आवर्ती गति में विस्थापन, वेग, त्वरण और बल के चिह्न विस्थापन के चिह्न और गति की दिशा पर निर्भर करते हैं। आयाम आधा होता है क्योंकि कुल दूरी 10 cm है।
Q6.13.6 नीचे दिए गए किसी कण के त्वरण α तथा विस्थापन x के बीच संबंधों में से किससे सरल आवर्त गति संबद्ध है : (a) α = 0.7 x (b) α = -200 x² (c) α = -10 x (d) α = 100 x³
उत्तर:
उत्तर: सरल आवर्ती गति के लिए त्वरण विस्थापन के विपरीत दिशा में और विस्थापन के समानुपाती होता है, अर्थात् α = -\omega^2 x इसलिए विकल्पों में से केवल (c) α = -10 x सरल आवर्ती गति से संबंधित है क्योंकि इसमें त्वरण विस्थापन के विपरीत दिशा में है और सीधे अनुपाती है। अन्य विकल्पों में: (a) α = 0.7 x → त्वरण विस्थापन के समान दिशा में है, सरल आवर्ती गति नहीं। (b) α = -200 x² → त्वरण विस्थापन के वर्ग के साथ है, सरल आवर्ती गति नहीं। (d) α = 100 x³ → त्वरण विस्थापन के घात के साथ है, सरल आवर्ती गति नहीं।
व्याख्या:
सरल आवर्ती गति में त्वरण विस्थापन के विपरीत दिशा में और सीधे अनुपाती होता है।
Q7.13.7 सरल आवर्त गति करते किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया जाता है, $$ x(t) = A \cos(\omega t + \phi) $$ यदि कण की आरंभिक (t = 0) स्थिति 1 cm तथा उसका आरंभिक वेग π cm s⁻¹ है, तो कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या है ? कण की कोणीय आवृत्ति π s⁻¹ है । यदि सरल आवर्त गति का वर्णन करने के लिए कोन्या (cos) फलन के स्थान पर हम न्या (sin) फलन चुनें; x = B sin(ωt + α), तो उपरोक्त आरंभिक प्रतिबंधों में कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या होगा ?
उत्तर:
उत्तर: दिया है: \( x(t) = A \cos(\omega t + \phi) \) \( t=0 \) पर, \( x(0) = A \cos \phi = 1 \text{ cm} \) \( v(t) = -A \omega \sin(\omega t + \phi) \) \( v(0) = -A \omega \sin \phi = \pi \text{ cm/s} \) कोणीय आवृत्ति \( \omega = \pi \text{ s}^{-1} \) पहले समीकरण से: \( A \cos \phi = 1 \) ...(1) दूसरे समीकरण से: \( -A \pi \sin \phi = \pi \Rightarrow -A \sin \phi = 1 \) ...(2) (1) और (2) से, \( \cos \phi = \frac{1}{A} \) \( \sin \phi = -\frac{1}{A} \) \( \sin^2 \phi + \cos^2 \phi = 1 \) से, \( \left( -\frac{1}{A} \right)^2 + \left( \frac{1}{A} \right)^2 = 1 \Rightarrow \frac{1}{A^2} + \frac{1}{A^2} = 1 \Rightarrow \frac{2}{A^2} = 1 \Rightarrow A^2 = 2 \Rightarrow A = \sqrt{2} \text{ cm} \) अब, \( \cos \phi = \frac{1}{\sqrt{2}} = \frac{\sqrt{2}}{2} \) \( \sin \phi = -\frac{1}{\sqrt{2}} = -\frac{\sqrt{2}}{2} \) इसलिए, \( \phi = -\frac{\pi}{4} \) यदि हम विस्थापन को \( x = B \sin(\omega t + \alpha) \) के रूप में लिखें, \( x = B \sin(\omega t + \alpha) = A \cos(\omega t + \phi) \) \( \Rightarrow B \sin(\omega t + \alpha) = A \cos(\omega t + \phi) = A \sin\left( \omega t + \phi + \frac{\pi}{2} \right) \) इसलिए, \( B = A = \sqrt{2} \text{ cm} \) \( \alpha = \phi + \frac{\pi}{2} = -\frac{\pi}{4} + \frac{\pi}{2} = \frac{\pi}{4} \) अतः, आयाम \( A = \sqrt{2} \text{ cm} \), प्रारंभिक कला कोण \( \phi = -\frac{\pi}{4} \) न्या फलन के लिए आयाम \( B = \sqrt{2} \text{ cm} \), प्रारंभिक कला कोण \( \alpha = \frac{\pi}{4} \) है।
व्याख्या:
आरंभिक स्थिति और वेग के आधार पर आयाम और प्रारंभिक कला कोण ज्ञात करने के लिए दो समीकरण बनाए और उन्हें हल किया। कोसाइन और साइन रूपांतरण के लिए त्रिकोणमितीय पहचान का उपयोग किया।
Q8.13.8 किसी कमानीदार तुला का पैमाना 0 से 50 kg तक अंकित है और पैमाने की लंबाई 20 cm है । इस तुला से लटकाया गया कोई पिण्ड, जब विस्थापित करके मुक्त किया जाता है, 0.6 s के आवर्तकाल से दोलन करता है । पिंड को भार कितना है ?
उत्तर:
उत्तर: दिया है: पैमाने की लंबाई, l = 20 cm = 0.2 m आवर्तकाल, T = 0.6 s कमानीदार तुला का आवर्तकाल: \( T = 2\pi \sqrt{\frac{I}{mgd}} \) जहाँ, I = पिण्ड का जड़त्वाघूर्ण, m = पिण्ड का द्रव्यमान, g = गुरुत्वाकर्षण त्वरण, d = कमानी की लंबाई (यहाँ पैमाने की लंबाई) चूँकि पिण्ड तुला से लटका है, और तुला का पैमाना 0 से 50 kg तक है, तो हम मानते हैं कि पिण्ड का द्रव्यमान m है। आवर्तकाल के सूत्र से, \( T = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g}} \) यह सरल दोलन का आवर्तकाल है यदि पिण्ड सरल दोलन करता है। इसलिए, \( T = 2\pi \sqrt{\frac{l}{g}} \Rightarrow l = \frac{g T^2}{4 \pi^2} \) \( l = \frac{9.8 \times (0.6)^2}{4 \times (3.1416)^2} = \frac{9.8 \times 0.36}{39.478} = \frac{3.528}{39.478} = 0.0894 \text{ m} = 8.94 \text{ cm} \) यह पैमाने की लंबाई से मेल नहीं खाता, अतः हमें पिण्ड का द्रव्यमान ज्ञात करना होगा। पिण्ड का भार: \( W = mg \) यहाँ, आवर्तकाल से पिण्ड का द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए अधिक जानकारी आवश्यक है, जैसे पिण्ड का जड़त्वाघूर्ण या तुला की विशेषताएँ। यदि तुला सरल दोलन करती है, तो आवर्तकाल से पिण्ड का द्रव्यमान सीधे नहीं निकाला जा सकता। इसलिए, प्रश्न में दी गई जानकारी के आधार पर पिण्ड का भार ज्ञात करना संभव नहीं है। (यदि अतिरिक्त जानकारी दी जाए तो हल किया जा सकता है।)
व्याख्या:
कमानीदार तुला के आवर्तकाल का सूत्र उपयोग किया गया। उपलब्ध जानकारी से पिण्ड का भार सीधे ज्ञात नहीं किया जा सकता क्योंकि पिण्ड का जड़त्वाघूर्ण ज्ञात नहीं है।
Bhautiki-II के सभी 7 अध्याय
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