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Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Research (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 14Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

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5.1 उपकल्पना : अर्थ

परिभाषा

5.1 उपकल्पना : अर्थ

इस अनुभाग में उपकल्पना (Hypothesis) के अर्थ को विस्तार से समझाया गया है। उपकल्पना का शाब्दिक अर्थ है – ‘पूर्वानुमान’ या ‘पूर्वधारणा’। सामाजिक अनुसंधान में उपकल्पना एक ऐसी कथन होती है, जिसे अनुसंधानकर्ता परीक्षण के लिए प्रस्तुत करता है। यह एक अस्थायी उत्तर या स्पष्टीकरण होता है, जिसे प्रमाणित या खंडित किया जा सकता है। उपकल्पना वैज्ञानिक पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि यह अनुसंधान को दिशा देती है और जाँचने योग्य प्रश्नों को जन्म देती है। उपकल्पना को अनुसंधान की ‘नेविगेशन लाइट’ भी कहा जाता है, जो अनुसंधानकर्ता को मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह किसी घटना, संबंध या प्रक्रिया के बारे में एक तर्कसंगत अनुमान होता है, जिसे अनुभव या पूर्व ज्ञान के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है।

  • उपकल्पना एक अस्थायी कथन या उत्तर है, जिसे परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
  • यह अनुसंधान की दिशा निर्धारित करती है।
  • उपकल्पना का आधार पूर्व ज्ञान, अनुभव या सैद्धांतिक तर्क होते हैं।
  • यह जाँचने योग्य (testable) और प्रमाणित या खंडित की जा सकने वाली होनी चाहिए।
  • सामाजिक अनुसंधान में उपकल्पना का विशेष महत्व है।
  • 📌 उपकल्पना: पूर्वानुमान या अस्थायी उत्तर, जिसे परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
  • 📌 वैज्ञानिक पद्धति: अनुसंधान की वह प्रक्रिया, जिसमें उपकल्पना का निर्माण और परीक्षण किया जाता है।

5.2 उपकल्पना की विशेषताएँ

अवधारणा

5.2 उपकल्पना की विशेषताएँ

इस अनुभाग में उपकल्पना की प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। उपकल्पना को वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोगी बनाने के लिए उसमें कुछ विशेष गुण होने चाहिए। उपकल्पना स्पष्ट, संक्षिप्त, जाँचने योग्य, प्रमाणित या खंडित की जा सकने वाली, तार्किक, और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए। उपकल्पना का स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि वह अनुसंधानकर्ता को परीक्षण के लिए प्रेरित करे और अनुसंधान की दिशा निर्धारित करे। उपकल्पना में अस्पष्टता या अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। यह किसी सिद्धांत, अनुभव या पूर्व ज्ञान पर आधारित होनी चाहिए। उपकल्पना का संबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी समस्या के समाधान से होना चाहिए।

  • उपकल्पना स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए।
  • यह जाँचने योग्य (testable) और प्रमाणित या खंडित की जा सकने वाली होनी चाहिए।
  • उपकल्पना तार्किक और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए।
  • यह अनुसंधान की दिशा निर्धारित करती है।
  • उपकल्पना में अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।
  • यह किसी समस्या के समाधान से संबंधित होनी चाहिए।
  • 📌 स्पष्टता: उपकल्पना में विचारों की स्पष्टता होनी चाहिए।
  • 📌 जाँचने योग्य: उपकल्पना का परीक्षण संभव होना चाहिए।

5.3 उपकल्पना के प्रकार

अवधारणा

5.3 उपकल्पना के प्रकार

इस अनुभाग में उपकल्पना के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है। सामाजिक अनुसंधान में उपकल्पना को उसके स्वरूप, प्रयोजन और परीक्षण की दृष्टि से कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है। मुख्यतः उपकल्पना के प्रकार निम्नलिखित हैं: (1) शून्य उपकल्पना (Nul