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Chapter 12

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Research (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 14Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

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12.1 निर्देशन की अवधारणा

अवधारणा

12.1 निर्देशन की अवधारणा

निर्देशन सामाजिक अनुसंधान की प्रक्रिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निर्देशन का अर्थ है अनुसंधान कार्य को सही दिशा में ले जाना, ताकि अनुसंधान के उद्देश्य की प्राप्ति सुनिश्चित हो सके। निर्देशन के माध्यम से शोधकर्ता अपने अनुसंधान कार्य में स्पष्टता, सुव्यवस्था और उद्देश्यपूर्णता बनाए रखते हैं। निर्देशन न केवल अनुसंधान की योजना बनाने में सहायक होता है, बल्कि अनुसंधान के विभिन्न चरणों में मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। निर्देशन के अंतर्गत शोधकर्ता को अनुसंधान की दिशा, विधि, उपकरण, समय-सीमा और संसाधनों का चयन करने में सहायता मिलती है। निर्देशन के बिना अनुसंधान कार्य बिखर सकता है और उसके परिणाम अप्रभावी हो सकते हैं। निर्देशन की प्रक्रिया में शोधकर्ता को अपने उद्देश्य, समस्या, और उपलब्ध संसाधनों का विश्लेषण करना होता है। इसके साथ ही, निर्देशन शोधकर्ता को अनुसंधान के नैतिक पहलुओं, गुणवत्ता नियंत्रण और निष्पक्षता की ओर भी प्रेरित करता है।

  • निर्देशन अनुसंधान को सही दिशा प्रदान करता है।
  • यह अनुसंधान की योजना और क्रियान्वयन में मार्गदर्शन देता है।
  • निर्देशन से अनुसंधान में सुव्यवस्था और स्पष्टता आती है।
  • यह अनुसंधान के नैतिक और गुणवत्ता संबंधी पहलुओं को सुनिश्चित करता है।
  • निर्देशन के बिना अनुसंधान बिखर सकता है।
  • निर्देशन शोधकर्ता को संसाधनों के चयन में सहायता करता है।
  • 📌 निर्देशन: अनुसंधान कार्य को सही दिशा में ले जाने की प्रक्रिया।
  • 📌 सुव्यवस्था: अनुसंधान में क्रमबद्धता और व्यवस्था।

12.2 निर्देशन के प्रकार

व्याख्या

12.2 निर्देशन के प्रकार

निर्देशन के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो अनुसंधान की प्रकृति, उद्देश्य और विधि पर निर्भर करते हैं। मुख्यतः निर्देशन के दो प्रकार माने जाते हैं: औपचारिक निर्देशन और अनौपचारिक निर्देशन। औपचारिक निर्देशन वह होता है जिसमें अनुसंधान कार्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, नियम और प्रक्रियाएँ निर्धारित होती हैं। इसमें अनुसंधान की योजना, उद्देश्य, विधि, उपकरण, समय-सीमा आदि का स्पष्ट उल्लेख होता है। अनौपचारिक निर्देशन में शोधकर्ता को स्वतंत्रता मिलती है, और अनुसंधान की दिशा-निर्देश कम स्पष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त, निर्देशन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भी माना जाता है। प्रत्यक्ष निर्देशन में शोधकर्ता को स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता है, जबकि अप्रत्यक्ष निर्देशन में शोधकर्ता स्वयं दिशा निर्धारित करता है। निर्देशन के प्रकारों का चयन अनुसंधान की समस्या, उद्देश्य और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है।

  • निर्देशन के दो मुख्य प्रकार: औपचारिक और अनौपचारिक।
  • औपचारिक निर्देशन में स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम होते हैं।
  • अनौपचारिक निर्देशन में शोधकर्ता को स्वतंत्रता मिलती है।
  • प्रत्यक्ष निर्देशन में स्पष्ट मार्गदर्शन होता है।
  • अप्रत्यक्ष निर्देशन में शोधकर्ता स्वयं दिशा निर्धारित करता है।
  • निर्देशन का प्रकार अनुसंधान की प्रकृति पर निर्भर करता है।
  • 📌 औपचारिक निर्देशन: अनुसंधान के स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम।
  • 📌 अनौपचारिक निर्देशन: अनुसंधान में स्वतंत्रता और कम दिशा-निर्देश।

12.3 निर्देशन की प्रक्रिया

व्याख्या

12.3 निर्देशन की प्रक्रिया

निर्देशन की प्रक्रिया अनुसंधान कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। इस प्रक्रिया में अनुसंधान की योजना बनाना, उद्देश्य निर्धारित करना, विधि का चयन करना, उपकरणों का चयन, समय-सीमा तय करना, संसाधनों का प्रबंधन, और अनुसंधान के विभिन्न च