Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस खंड में अंग्रेज-मराठा संघर्ष का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया गया है। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में अंग्रेजों और मराठों के बीच सत्ता के लिए संघर्ष तेज़ हो गया था। मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद मराठा शक्ति ने भारत के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जबकि अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से व्यापार और राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे थे। इस संघर्ष का मुख्य कारण भारत में सर्वोच्च सत्ता की स्थापना थी। अंग्रेजों की कूटनीति, सैन्य शक्ति और मराठों के आंतरिक मतभेदों ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया। अंग्रेजों ने धीरे-धीरे मराठों की शक्ति को कमजोर किया और अंततः भारत में अपना वर्चस्व स्थापित किया।
- 18वीं शताब्दी में अंग्रेज और मराठा भारत की प्रमुख शक्तियाँ थीं।
- मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद सत्ता के लिए संघर्ष बढ़ा।
- अंग्रेजों की कूटनीति और सैन्य शक्ति निर्णायक रही।
- मराठों के आंतरिक मतभेद संघर्ष को प्रभावित करते थे।
- अंततः अंग्रेजों ने भारत में अपना वर्चस्व स्थापित किया।
- 📌 मराठा - महाराष्ट्र क्षेत्र की प्रमुख शक्ति, जिन्होंने मुग़लों के पतन के बाद भारत में सत्ता स्थापित की।
- 📌 ईस्ट इंडिया कंपनी - ब्रिटिश व्यापारिक कंपनी, जिसने भारत में राजनीतिक शक्ति प्राप्त की।
मराठा शक्ति का उत्थान
व्याख्यामराठा शक्ति का उत्थान
मराठा शक्ति का उत्थान 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में हुआ। शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी और मुग़ल सत्ता को चुनौती दी। उनके उत्तराधिकारियों ने साम्राज्य का विस्तार किया। पेशवा बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव प्रथम और बालाजी बाजीराव के नेतृत्व में मराठा शक्ति चरम पर पहुँची। मराठों ने दिल्ली तक अपने सैन्य अभियानों का विस्तार किया और बंगाल, गुजरात, मालवा, राजस्थान आदि क्षेत्रों में प्रभाव स्थापित किया। मराठा संघ में पाँच प्रमुख घराने – पेशवा, सिंधिया, होल्कर, भोंसले और गायकवाड़ – थे। मराठा शक्ति का संगठनात्मक ढांचा संघात्मक था, जिसमें पेशवा सर्वोच्च थे।
- छत्रपति शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
- पेशवाओं के नेतृत्व में मराठा शक्ति का विस्तार हुआ।
- मराठा संघ में पाँच प्रमुख घराने थे।
- मराठों ने दिल्ली तक सैन्य अभियान चलाए।
- मराठा शक्ति का संगठन संघात्मक था।
- 📌 पेशवा - मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्री, जिनके पास वास्तविक शक्ति थी।
- 📌 संघात्मक शासन - विभिन्न घरानों का एक संघ, जिसमें पेशवा सर्वोच्च थे।
अंग्रेजों की भारत में बढ़ती शक्ति
व्याख्याअंग्रेजों की भारत में बढ़ती शक्ति
अंग्रेजों ने 18वीं शताब्दी में व्यापार के बहाने भारत में प्रवेश किया। प्लासी (1757) और बक्सर (1764) की लड़ाइयों के बाद अंग्रेजों ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने दीवानी अधिकार प्राप्त कर राजस्व वसूली का अधिकार भी हासिल किय
SLM - History of India (1740-1947 AD) (Hindi) के सभी 20 अध्याय
History of India (1740-1947 AD) · Vardhman Mahaveer Open University
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