Ch 13निःशुल्क

Chapter 13

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1740-1947 AD) (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

Chapter 13अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

13.1 ब्रिटिश शासन के आगमन से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था

व्याख्या

13.1 ब्रिटिश शासन के आगमन से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था

ब्रिटिश शासन के आगमन से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में से एक थी। भारत कृषि, हस्तशिल्प, व्यापार और उद्योग में अग्रणी था। यहाँ के गाँव आत्मनिर्भर थे और शहरी केंद्र व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे। भारत का वस्त्र उद्योग, विशेषकर सूती और रेशमी कपड़े, विश्वभर में निर्यात होते थे। बंगाल, गुजरात, और दक्षिण भारत के बंदरगाहों से विदेशी व्यापार होता था। भारत की मुद्रा और आर्थिक प्रणाली स्थिर थी। भूमि व्यवस्था में जमींदारी, रैयतवारी और महलवारी जैसी व्यवस्थाएँ थीं। भारत का व्यापार मुख्यतः यूरोप, मध्य एशिया और पूर्वी एशिया के देशों के साथ होता था।

  • भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटिश शासन से पूर्व अत्यंत समृद्ध थी।
  • कृषि, हस्तशिल्प और व्यापार में भारत अग्रणी था।
  • गाँव आत्मनिर्भर थे और शहरी केंद्र व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।
  • भारत का वस्त्र उद्योग विश्वभर में प्रसिद्ध था।
  • भूमि व्यवस्था में जमींदारी, रैयतवारी और महलवारी प्रमुख थीं।
  • विदेशी व्यापार यूरोप, मध्य एशिया और पूर्वी एशिया के साथ होता था।
  • 📌 जमींदारी: भूमि व्यवस्था जिसमें जमींदार किसानों से भूमि कर वसूलते थे।
  • 📌 रैयतवारी: भूमि व्यवस्था जिसमें किसान सीधे सरकार को कर देते थे।
  • 📌 महलवारी: भूमि व्यवस्था जिसमें गाँव या महल को कर की जिम्मेदारी दी जाती थी।

13.2 ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियाँ

व्याख्या

13.2 ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियाँ

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आर्थिक नीतियों में व्यापक बदलाव किए गए। ब्रिटिश सरकार ने भारत को कच्चे माल का स्रोत और तैयार माल के लिए बाजार के रूप में विकसित किया। भूमि राजस्व व्यवस्था में बदलाव लाकर जमींदारी, रैयतवारी और महलवारी व्यवस्थाएँ लागू की गईं। ब्रिटिश नीतियों के तहत भारतीय उद्योगों का ह्रास हुआ और अंग्रेजी वस्त्रों का आयात बढ़ा। रेलवे, टेलीग्राफ और अन्य आधारभूत संरचनाएँ अंग्रेजी व्यापार को बढ़ाने के लिए बनाई गईं। ब्रिटिश सरकार ने कर प्रणाली को कठोर बनाया जिससे किसानों और कारीगरों पर आर्थिक दबाव बढ़ा।

  • ब्रिटिश शासन ने भारत को कच्चे माल का स्रोत बनाया।
  • भूमि राजस्व व्यवस्था में बदलाव किए गए।
  • भारतीय उद्योगों का ह्रास हुआ और अंग्रेजी वस्त्रों का आयात बढ़ा।
  • रेलवे और टेलीग्राफ अंग्रेजी व्यापार के लिए बनाए गए।
  • कर प्रणाली कठोर बनाई गई जिससे किसानों पर दबाव बढ़ा।
  • ब्रिटिश नीतियाँ भारत की आर्थिक संरचना को बदलने के लिए थीं।
  • 📌 भूमि राजस्व: सरकार द्वारा भूमि से वसूला जाने वाला कर।
  • 📌 आधारभूत संरचना: रेलवे, टेलीग्राफ, सड़कें आदि।

13.3 भारतीय कृषि पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव

व्याख्या

13.3 भारतीय कृषि पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव

ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय कृषि में कई बदलाव हुए। भूमि राजस्व व्यवस्था के तहत किसानों पर अत्यधिक कर लगाया गया। जमींदारी व्यवस्था में जमींदारों ने किसानों से अधिक कर वसूला, जिससे किसान कर्ज में डूब गए। रैयतवारी और महलवारी व्यवस्थाएँ भी किसानों के लि