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Chapter 16

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1740-1947 AD) (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 15अध्याय 16 / 20Chapter 17

Chapter 16अध्ययन नोट्स

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16.1 महात्मा गांधी का भारत आगमन

व्याख्या

16.1 महात्मा गांधी का भारत आगमन

महात्मा गांधी का भारत आगमन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। गांधी जी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जहाँ उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया था। भारत में आने के बाद गांधी जी ने भारतीय समाज की समस्याओं को समझने के लिए विभिन्न स्थानों की यात्राएँ कीं। उन्होंने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में किसानों और मजदूरों की समस्याओं को देखा और उनके लिए संघर्ष किया। गांधी जी का आगमन भारतीय राजनीति में नई ऊर्जा लेकर आया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच को जन आंदोलन का रूप देने की दिशा में काम किया। गांधी जी ने भारतीय जनता को स्वराज्य की अवधारणा से परिचित कराया और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग सुझाया।

  • महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
  • गांधी जी ने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों का प्रचार किया।
  • चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में गांधी जी ने किसानों और मजदूरों के लिए आंदोलन किए।
  • गांधी जी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जन आंदोलन का रूप दिया।
  • गांधी जी ने स्वराज्य और अहिंसा के विचारों का प्रसार किया।
  • 📌 सत्याग्रह: सत्य और अहिंसा के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष।
  • 📌 अहिंसा: हिंसा का त्याग, शांति और प्रेम के सिद्धांत पर आधारित।

16.2 गांधी जी का राजनीतिक दृष्टिकोण

अवधारणा

16.2 गांधी जी का राजनीतिक दृष्टिकोण

गांधी जी का राजनीतिक दृष्टिकोण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया। उन्होंने राजनीति को नैतिकता से जोड़ते हुए सत्य, अहिंसा और स्वराज्य को अपने आंदोलन के मूल स्तंभ बनाए। गांधी जी का मानना था कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने का प्रयास किया। गांधी जी ने राजनीति में सत्याग्रह, असहयोग और अहिंसा के माध्यम से जनता को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उनका दृष्टिकोण था कि जनता को अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से संघर्ष करना चाहिए।

  • गांधी जी ने राजनीति को नैतिकता से जोड़ा।
  • सत्य, अहिंसा और स्वराज्य गांधी जी के आंदोलन के मूल स्तंभ थे।
  • गांधी जी ने सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता पर भी बल दिया।
  • सत्याग्रह और असहयोग के माध्यम से जनता को सक्रिय किया।
  • गांधी जी ने शांतिपूर्ण संघर्ष की नीति अपनाई।
  • 📌 स्वराज्य: आत्म-शासन, भारतीयों द्वारा अपने देश का संचालन।
  • 📌 असहयोग: ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग न करने की नीति।

16.3 असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि

व्याख्या

16.3 असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि

असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में उत्पन्न राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ी थी। युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से सहयोग मांगा था, परंतु युद्ध के बाद उनके वादे पूरे नहीं किए गए। रॉलेट एक्ट (1919) ने भारतीयो