Ch 15निःशुल्क

Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Introductory Sociology (Hindi)📖 323 नोट्स⏱️ ~485 मिनट
Chapter 14अध्याय 16 / 16

Chapter 15अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 323 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

व्याख्या

इकाई-1: समाजशास्त्र का उद्भव, विकास एवं विषयवस्तु

इस इकाई में समाजशास्त्र विषय के उद्भव, विकास और इसकी विषयवस्तु का विस्तार से अध्ययन किया गया है। समाजशास्त्र एक अपेक्षाकृत नया समाज विज्ञान है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 170 वर्ष पूर्व मानी जाती है। प्रारंभ में मनुष्य ने अपने समाज और परिवेश को धार्मिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया। समाज के उद्गम को ईश्वर से जोड़ा गया और समाज के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया जाता था। औद्योगिक क्रांति, राजनीतिक क्रांतियाँ, समाजवादी विचारधारा, नगरीकरण, धार्मिक परिवर्तन और विज्ञान के प्रभाव ने समाज के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जन्म दिया। इसी वैज्ञानिक सोच के परिणामस्वरूप 'समाजशास्त्र' नामक विज्ञान का जन्म हुआ। समाजशास्त्र का औपचारिक रूप से विकास 1838 में फ्रांस में हुआ, जिसका श्रेय प्रसिद्ध दार्शनिक अगस्त कॉम्ट को दिया जाता है। उन्होंने समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता को पहचाना और इसे एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित किया। इस इकाई के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी समाजशास्त्र की आवश्यकता, यूरोप में 18वीं-19वीं सदी की प्रमुख घटनाएँ, समाजशास्त्र के विकास की प्रक्रिया, भारत में समाजशास्त्र के विकास, स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात की स्थिति, समाजशास्त्र की विषयवस्तु और अध्ययन क्षेत्र के नवीन आयामों को समझ सकेंगे।

  • समाजशास्त्र एक नवीन समाज विज्ञान है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 170 वर्ष पूर्व मानी जाती है।
  • प्रारंभ में समाज का अध्ययन धार्मिक दृष्टिकोण से किया जाता था।
  • औद्योगिक क्रांति, राजनीतिक क्रांतियाँ, नगरीकरण, धार्मिक परिवर्तन और विज्ञान के प्रभाव ने समाजशास्त्र के विकास में योगदान दिया।
  • समाजशास्त्र का औपचारिक विकास 1838 में फ्रांस में अगस्त कॉम्ट द्वारा हुआ।
  • समाजशास्त्र के अध्ययन से समाज के वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता विकसित होती है।
  • 📌 समाजशास्त्र: समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का एक नवीन समाज विज्ञान।
  • 📌 औद्योगिक क्रांति: 18वीं-19वीं सदी में यूरोप में हुई तकनीकी और औद्योगिक परिवर्तनों की प्रक्रिया।
  • 📌 नगरीकरण: ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों की ओर जनसंख्या का स्थानांतरण और नगरों का विकास।

1.0 उद्देश्य

अवधारणा

1.0 उद्देश्य

इस उपखंड में इकाई के अध्ययन से प्राप्त होने वाले प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है। विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं को समझने में सक्षम होंगे: - समाजशास्त्र की आवश्यकता और इसकी उत्पत्ति के कारणों को समझना। - यूरोप में 18वीं और 19वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण करना। - समाजशास्त्र के विकास की प्रक्रिया को समझना। - भारत में समाजशास्त्र के विकास, स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात की स्थिति का अध्ययन करना। - समाजशास्त्र की विषयवस्तु और अध्ययन क्षेत्र के तत्वों को जानना। - समाजशास्त्र की वर्तमान विषय सामग्री में जुड़े नवीन आयामों की जानकारी प्राप्त करना।

  • समाजशास्त्र की आवश्यकता और उत्पत्ति के कारणों की समझ।
  • यूरोप में 18वीं-19वीं सदी की घटनाओं का विश्लेषण।
  • समाजशास्त्र के विकास की प्रक्रिया का अध्ययन।
  • भारत में समाजशास्त्र के विकास की स्थिति का ज्ञान।
  • समाजशास्त्र की विषयवस्तु और अध्ययन क्षेत्र की जानकारी।
  • समाजशास्त्र के नवीन आयामों की समझ।
  • 📌 उद्देश्य: अध्ययन से प्राप्त होने वाले लक्ष्यों का संक्षिप्त विवरण।

1.1 प्रस्तावना

व्याख्या

1.1 प्रस्तावना

प्रस्तावना में समाजशास्त्र के विषय की नवीनता और अन्य समाज विज्ञानों से इसकी भिन्नता को स्पष्ट किया गया है। समाजशास्त्र का इतिहास लगभग 170 वर्ष पुराना है, जबकि राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि पुराने विषय हैं। मनुष्य ने अपने परिवेश को समझ