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Chapter 10

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 9अध्याय 15 / 17Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

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भूमंडलीकरण: अर्थ एवं परिप्रेक्ष्य

अवधारणा

भूमंडलीकरण: अर्थ एवं परिप्रेक्ष्य

भूमंडलीकरण का अर्थ है विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का विस्तार और गहनता। यह प्रक्रिया 1990 के दशक में भारत में आर्थिक सुधारों के साथ तेज़ हुई। भूमंडलीकरण के तहत व्यापार, निवेश, सूचना और तकनीकी का प्रवाह सीमाओं के पार होता है। इससे भारतीय कृषि भी प्रभावित हुई है, क्योंकि अब भारतीय किसान वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भूमंडलीकरण के कारण कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को नए अवसर और चुनौतियाँ दोनों मिली हैं। भूमंडलीकरण का उद्देश्य है विश्व को एक साझा बाजार बनाना, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके। इसके साथ ही, यह स्थानीय कृषि को वैश्विक मांग के अनुरूप ढालने की आवश्यकता उत्पन्न करता है।

  • भूमंडलीकरण विश्व के देशों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ता है।
  • 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत में भूमंडलीकरण की प्रक्रिया तेज़ हुई।
  • भारतीय कृषि पर भूमंडलीकरण का गहरा प्रभाव पड़ा है।
  • कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात में वृद्धि हुई है।
  • भूमंडलीकरण से किसानों को नए अवसर और चुनौतियाँ मिली हैं।
  • स्थानीय कृषि को वैश्विक मांग के अनुरूप ढालना आवश्यक है।
  • 📌 भूमंडलीकरण: विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का विस्तार।
  • 📌 आयात: विदेश से वस्तुओं या सेवाओं को खरीदना।
  • 📌 निर्यात: देश से वस्तुओं या सेवाओं को विदेश में बेचना।

भारतीय कृषि: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

व्याख्या

भारतीय कृषि: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारतीय कृषि का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। सिंधु घाटी सभ्यता में कृषि का विकास हुआ था। ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय कृषि में कई बदलाव आए, जैसे नकदी फसलों का उत्पादन और भूमि व्यवस्था में परिवर्तन। स्वतंत्रता के बाद भारत में कृषि सुधारों की शुरुआत हुई, जिसमें भूमि सुधार, सिंचाई, और हरित क्रांति शामिल थी। हरित क्रांति के कारण गेहूँ और चावल की पैदावार में वृद्धि हुई, लेकिन इससे क्षेत्रीय असमानता भी बढ़ी। भूमंडलीकरण से पहले भारतीय कृषि मुख्यतः घरेलू मांग पर आधारित थी, लेकिन अब यह वैश्विक बाजार से जुड़ गई है।

  • भारतीय कृषि का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होता है।
  • ब्रिटिश शासन में नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा।
  • स्वतंत्रता के बाद कृषि सुधारों की शुरुआत हुई।
  • हरित क्रांति से पैदावार में वृद्धि हुई।
  • भूमंडलीकरण से पहले कृषि घरेलू मांग पर आधारित थी।
  • अब भारतीय कृषि वैश्विक बाजार से जुड़ गई है।
  • 📌 हरित क्रांति: कृषि में उच्च उत्पादकता वाले बीज, रसायनिक खाद और सिंचाई का प्रयोग।
  • 📌 नकदी फसल: ऐसी फसलें जिन्हें बेचकर आय प्राप्त की जाती है, जैसे कपास, गन्ना।

भूमंडलीकरण के प्रभाव

व्याख्या

भूमंडलीकरण के प्रभाव

भूमंडलीकरण के कारण भारतीय कृषि में कई बदलाव आए हैं। अब भारतीय किसान वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को नए बाजार मिले हैं। साथ ही, विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है। भूमंडलीकर