Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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8.1 कृषि साख : परिचय
व्याख्या8.1 कृषि साख : परिचय
कृषि साख भारतीय कृषि व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिससे किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराया जाता है। कृषि साख का अर्थ है - किसानों को कृषि संबंधी कार्यों जैसे बीज, खाद, सिंचाई, कृषि यंत्र, पशुपालन आदि के लिए ऋण प्रदान करना। भारत में कृषि साख की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि अधिकांश किसान छोटे और सीमांत होते हैं, जिनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं होती। कृषि साख के बिना किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग नहीं कर सकते, जिससे उनकी उत्पादकता कम रहती है। कृषि साख दो प्रकार की होती है - संस्थागत साख (बैंक, सहकारी समितियाँ, ग्रामीण बैंक आदि द्वारा दी गई) और गैर-संस्थागत साख (महाजन, साहूकार, रिश्तेदार आदि द्वारा दी गई)। संस्थागत साख को सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है और इसमें ब्याज दरें कम होती हैं। कृषि साख किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, कृषि उत्पादन बढ़ाने, और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- कृषि साख किसानों को कृषि कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराती है।
- भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिन्हें साख की आवश्यकता होती है।
- कृषि साख दो प्रकार की होती है - संस्थागत और गैर-संस्थागत।
- संस्थागत साख में ब्याज दरें कम होती हैं और यह सरकार द्वारा नियंत्रित होती है।
- कृषि साख से किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है।
- 📌 कृषि साख: किसानों को कृषि कार्यों के लिए दिया गया ऋण।
- 📌 संस्थागत साख: बैंक, सहकारी समितियों आदि द्वारा दिया गया ऋण।
- 📌 गैर-संस्थागत साख: महाजन, साहूकार आदि द्वारा दिया गया ऋण।
8.2 संस्थागत साख के स्रोत
व्याख्या8.2 संस्थागत साख के स्रोत
संस्थागत साख के स्रोत वे संस्थाएँ हैं, जो किसानों को औपचारिक रूप से ऋण प्रदान करती हैं। भारत में प्रमुख संस्थागत साख स्रोतों में वाणिज्यिक बैंक, सहकारी समितियाँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), और NABARD (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) शामिल हैं। वाणिज्यिक बैंक किसानों को अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक ऋण प्रदान करते हैं। सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण देती हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक विशेष रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के लिए स्थापित किए गए हैं। NABARD कृषि और ग्रामीण विकास के लिए नीति निर्माण, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करता है। संस्थागत साख का उद्देश्य किसानों को शोषण से बचाना, कृषि उत्पादन बढ़ाना, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
- संस्थागत साख के प्रमुख स्रोत: वाणिज्यिक बैंक, सहकारी समितियाँ, RRB, NABARD।
- वाणिज्यिक बैंक अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक ऋण देते हैं।
- सहकारी समितियाँ किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण देती हैं।
- NABARD कृषि और ग्रामीण विकास के लिए नीति निर्माण करता है।
- संस्थागत साख किसानों को शोषण से बचाती है।
- 📌 वाणिज्यिक बैंक: सार्वजनिक या निजी बैंक जो कृषि ऋण प्रदान करते हैं।
- 📌 सहकारी समिति: किसानों द्वारा संचालित संस्था जो ऋण देती है।
- 📌 NABARD: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक।
8.3 संस्थागत साख की विशेषताएँ
अवधारणा8.3 संस्थागत साख की विशेषताएँ
संस्थागत साख की विशेषताएँ इसे गैर-संस्थागत साख से अलग बनाती हैं। संस्थागत साख में ऋण प्रक्रिया पारदर्शी होती है, ब्याज दरें नियत और कम होती हैं, और ऋण की वापसी के लिए स्पष्ट नियम होते हैं। संस्थागत साख में किसानों को शोषण से बचाया जाता है, क्योंकि ऋण
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Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University
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