Chapter 11
Chapter 11 — अध्ययन नोट्स
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11.1 भारतीय औद्योगिक ढाँचे का परिचय
व्याख्या11.1 भारतीय औद्योगिक ढाँचे का परिचय
इस अनुभाग में भारतीय औद्योगिक ढाँचे का परिचय दिया गया है। औद्योगिक ढाँचा वह आधारभूत संरचना है, जिसके माध्यम से देश की औद्योगिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं। इसमें उत्पादन इकाइयाँ, कच्चा माल, पूँजी, श्रमिक, परिवहन, संचार, ऊर्जा, तकनीकी विकास, नीति-निर्माण, तथा विपणन व्यवस्था आदि शामिल हैं। भारत में औद्योगिक विकास का इतिहास औपनिवेशिक काल से शुरू होता है, जब अंग्रेजों ने अपने हितों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल के बाजार के रूप में भारत का उपयोग किया। स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने औद्योगिकीकरण को आर्थिक विकास का मुख्य आधार माना। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारी उद्योगों, लघु उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, तथा सहकारी क्षेत्र का विकास किया गया। औद्योगिक ढाँचे के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के उद्योगों जैसे- लोहा-इस्पात, कपड़ा, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी, आदि का समावेश होता है। औद्योगिक विकास से रोजगार, आय, निर्यात, तकनीकी प्रगति, और सामाजिक परिवर्तन में वृद्धि होती है।
- औद्योगिक ढाँचा देश की आर्थिक रीढ़ होता है।
- औद्योगिक विकास से रोजगार और आय में वृद्धि होती है।
- औपनिवेशिक काल में भारत का औद्योगिक ढाँचा कमजोर था।
- स्वतंत्रता के बाद योजनाबद्ध औद्योगीकरण हुआ।
- औद्योगिक ढाँचे में सार्वजनिक, निजी, सहकारी क्षेत्र शामिल हैं।
- औद्योगिक ढाँचा आर्थिक, सामाजिक विकास में सहायक है।
- 📌 औद्योगिक ढाँचा: वह आधारभूत संरचना जिसमें उत्पादन, वितरण, विपणन आदि शामिल हैं।
- 📌 पंचवर्षीय योजना: भारत सरकार द्वारा निर्धारित पाँच वर्ष की आर्थिक विकास योजना।
11.2 औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
व्याख्या11.2 औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
इस अनुभाग में भारत के औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया गया है। भारत में औद्योगीकरण की शुरुआत औपनिवेशिक काल में हुई, जब अंग्रेजों ने 18वीं सदी के अंत में कपड़ा उद्योग, रेलवे, और खनन उद्योग की स्थापना की। परंतु, इनका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को ब्रिटिश हितों के अनुसार ढालना था। स्वतंत्रता के बाद, भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग अपनाया और औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी। प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) में कृषि के साथ-साथ औद्योगिक आधारभूत संरचना पर बल दिया गया। द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) में भारी उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद निजीकरण, उदारीकरण, और वैश्वीकरण के कारण औद्योगिक क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन आए। अब सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र, और उच्च तकनीकी उद्योगों का विकास हुआ है।
- औपनिवेशिक काल में औद्योगीकरण ब्रिटिश हितों के लिए था।
- स्वतंत्रता के बाद मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई गई।
- प्रथम पंचवर्षीय योजना में आधारभूत संरचना पर बल।
- द्वितीय पंचवर्षीय योजना में भारी उद्योगों का विकास।
- 1991 के बाद उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण से औद्योगिक क्षेत्र में बदलाव।
- आधुनिक काल में सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र का विकास।
- 📌 मिश्रित अर्थव्यवस्था: जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र साथ-साथ कार्य करते हैं।
- 📌 वैश्वीकरण: विश्व की अर्थव्यवस्थाओं का आपसी एकीकरण।
11.3 औद्योगिक क्षेत्र की संरचना
अवधारणा11.3 औद्योगिक क्षेत्र की संरचना
इस अनुभाग में औद्योगिक क्षेत्र की संरचना का विस्तार से वर्णन किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है: (1) सार्वजनिक क्षेत्र, (2) निजी क्षेत्र, (3) सहकारी क्षेत्र। सार्वजनिक क्षेत्र में वे उद्योग आते हैं जिनका स्वामित्व और
SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi) के सभी 17 अध्याय
Issues in Indian Economic Development · Vardhman Mahaveer Open University
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