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Chapter 3

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 17Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 भारत में कृषि का महत्व

व्याख्या

3.1 भारत में कृषि का महत्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। कृषि का भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के समय लगभग 72% जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी, जो आज भी लगभग 50% के आसपास है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि कच्चे माल की आपूर्ति, रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास, निर्यात आय और औद्योगिक विकास में भी योगदान देती है। कृषि के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार, गरीबी उन्मूलन, और सामाजिक स्थिरता आती है। कृषि का सीधा संबंध देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति से है, जिससे भूख और कुपोषण की समस्या कम होती है। इसके साथ ही, कृषि से जुड़े उद्योगों जैसे कपड़ा, चीनी, खाद्य प्रसंस्करण आदि का भी विकास होता है।

  • भारत की लगभग आधी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • कृषि खाद्य सुरक्षा और कच्चे माल की आपूर्ति का मुख्य स्रोत है।
  • कृषि ग्रामीण रोजगार का प्रमुख साधन है।
  • कृषि आधारित उद्योगों के विकास में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • कृषि निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
  • कृषि के विकास से ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • 📌 कृषि: फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि गतिविधियाँ।
  • 📌 कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था: वह अर्थव्यवस्था जिसमें कृषि का योगदान सर्वाधिक हो।

3.2 कृषि की संरचना

अवधारणा

3.2 कृषि की संरचना

भारतीय कृषि की संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, जिसमें विभिन्न प्रकार की फसलें, कृषि पद्धतियाँ, भूमि स्वामित्व के प्रकार, सिंचाई के साधन, और उत्पादन के साधन शामिल हैं। भारत में कृषि मुख्यतः पारंपरिक है, जिसमें छोटे और सीमांत किसान अधिक हैं। यहाँ की कृषि मानसून पर निर्भर है, जिससे उत्पादन में अस्थिरता रहती है। कृषि भूमि का विखंडन, सीमांत जोतों की अधिकता, पारंपरिक उपकरणों का प्रयोग, और सिंचाई की असमानता इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। कृषि में फसल विविधता, मिश्रित कृषि, और फसल चक्र जैसी पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं।

  • कृषि भूमि का विखंडन और जोतों का आकार छोटा है।
  • कृषि मानसून पर निर्भर है, जिससे उत्पादन में अस्थिरता रहती है।
  • पारंपरिक उपकरणों और विधियों का प्रयोग अधिक होता है।
  • फसल विविधता और मिश्रित कृषि की प्रथा प्रचलित है।
  • सिंचाई के साधनों की असमान उपलब्धता है।
  • भूमि स्वामित्व के विभिन्न प्रकार प्रचलित हैं।
  • 📌 मिश्रित कृषि: एक साथ कई फसलों का उत्पादन।
  • 📌 सीमांत किसान: जिनके पास 1 हेक्टेयर से कम भूमि हो।

3.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

व्याख्या

3.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

भारतीय कृषि अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनका समाधान किए बिना कृषि का समुचित विकास संभव नहीं है। प्रमुख समस्याओं में मानसून पर निर्भरता, सिंचाई की अपर्याप्तता, भूमि विखंडन, पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ, पूंजी की कमी, विपणन की असुविधाएँ, कीट एवं रोग, और कृ