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Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 5अध्याय 9 / 17Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

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6.1 भारतीय कृषि का महत्व

व्याख्या

6.1 भारतीय कृषि का महत्व

भारतीय कृषि का देश की अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भारत की लगभग 58% जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि यह कच्चे माल की आपूर्ति, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास, निर्यात आय और ग्रामीण विकास में भी योगदान देती है। स्वतंत्रता के समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि-आधारित थी, और आज भी कृषि का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि से संबंधित गतिविधियाँ जैसे पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी आदि भी ग्रामीण आजीविका का आधार हैं। कृषि का महत्व केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी है। भारत में कृषि को एक परंपरा, जीवनशैली और संस्कार के रूप में देखा जाता है। कृषि क्षेत्र में सुधार और नवाचार से ग्रामीण क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। कृषि उत्पादों की उपलब्धता से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कृषि-आधारित उद्योग जैसे कपड़ा, चीनी, खाद्य प्रसंस्करण आदि की नींव कृषि पर ही है। कृषि निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

  • भारत की 58% से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • कृषि GDP में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
  • कृषि खाद्य सुरक्षा, रोजगार और औद्योगिक विकास का आधार है।
  • कृषि से जुड़े उद्योगों को कच्चा माल मिलता है।
  • कृषि निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
  • कृषि भारतीय समाज की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है।
  • 📌 कृषि: फसल उत्पादन, पशुपालन, वानिकी एवं मत्स्य पालन जैसी गतिविधियाँ।
  • 📌 खाद्य सुरक्षा: देश की जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध होना।

6.2 भारतीय कृषि की प्रकृति

अवधारणा

6.2 भारतीय कृषि की प्रकृति

भारतीय कृषि की प्रकृति विविधतापूर्ण है। यहाँ की कृषि मानसून पर निर्भर, पारंपरिक, श्रम-प्रधान, छोटे जोतों वाली और विविध फसलों पर आधारित है। भारत में कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर करती है, जिससे उत्पादन में अस्थिरता रहती है। अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं। भारतीय कृषि में पारंपरिक उपकरणों और तकनीकों का अधिक उपयोग होता है, हालाँकि हरित क्रांति के बाद कुछ क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ा है। फसल विविधता भी यहाँ की विशेषता है – भारत में खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, नकदी फसलें, बागवानी, मसाले आदि की खेती होती है। भूमि जोतों का आकार छोटा है, जिससे यंत्रीकरण और सिंचाई की सुविधा सीमित रहती है। कृषि में मौसम, कीट, बीमारियों और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव अधिक होता है। सिंचाई की सीमित सुविधा, उर्वरकों एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की कमी भी यहाँ की कृषि की प्रमुख समस्याएँ हैं।

  • भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर है।
  • कृषि श्रम-प्रधान और पारंपरिक है।
  • भूमि जोतों का आकार छोटा है।
  • फसल विविधता अधिक है।
  • उन्नत तकनीक का सीमित उपयोग है।
  • प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव अधिक है।
  • 📌 मानसून कृषि: वर्षा पर निर्भर कृषि प्रणाली।
  • 📌 छोटी जोत: एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले खेत।

6.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

व्याख्या

6.3 भारतीय कृषि की समस्याएँ

भारतीय कृषि अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनका समाधान करना आवश्यक है। मुख्य समस्याएँ हैं – भूमि जोतों का छोटा आकार, सिंचाई की कमी, अपर्याप्त आधुनिक तकनीक, पूंजी की कमी, विपणन की समस्याएँ, प्राकृतिक आपदाएँ, कीट एवं रोग, और किसानों की अशिक्षा। भूमि जोत