Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
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1.1 परिचय
व्याख्या1.1 परिचय
इस अनुभाग में परिमित अंतर (Finite Differences) का परिचय दिया गया है। परिमित अंतर संख्यात्मक विश्लेषण की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसका उपयोग गणितीय फलनों के मानों के बीच के अंतर को ज्ञात करने के लिए किया जाता है। जब किसी फलन के मान एक निश्चित अंतराल (h) पर दिए जाते हैं, तो उनके बीच के अंतर को परिमित अंतर कहा जाता है। यह विधि विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब फलन का विश्लेषणात्मक रूप ज्ञात नहीं होता या जब हमें केवल सारणीबद्ध (tabulated) मान ही उपलब्ध होते हैं। परिमित अंतर का उपयोग बहुपदों के सन्निकटन (interpolation), समाकलन (integration), अवकलन (differentiation) आदि में किया जाता है। परिमित अंतर की अवधारणा न्यूटन, गाउस, स्टर्लिंग आदि गणितज्ञों द्वारा विकसित की गई थी। यह विधि गणित, भौतिकी, सांख्यिकी, अभियांत्रिकी आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।
- परिमित अंतर फलनों के मानों के बीच के अंतर को दर्शाता है।
- यह विधि सारणीबद्ध मानों के लिए उपयुक्त है।
- परिमित अंतर का उपयोग सन्निकटन, अवकलन एवं समाकलन में होता है।
- यह विधि न्यूटन, गाउस आदि द्वारा विकसित की गई थी।
- यह संख्यात्मक विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण भाग है।
- 📌 परिमित अंतर: फलनों के मानों के बीच का निश्चित अंतर।
- 📌 सन्निकटन: किसी फलन के मान का अनुमानित मान ज्ञात करना।
1.2 परिमित अंतर की परिभाषा
परिभाषा1.2 परिमित अंतर की परिभाषा
इस अनुभाग में परिमित अंतर की औपचारिक परिभाषा दी गई है। यदि y = f(x) एक फलन है और x के मान समान अंतर (h) पर लिए गए हैं, तो परिमित अंतर निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है: यदि x₀, x₁, x₂, ..., xₙ वे बिंदु हैं जहाँ x₁ = x₀ + h, x₂ = x₀ + 2h, ..., xₙ = x₀ + n×h, और y₀ = f(x₀), y₁ = f(x₁), ..., yₙ = f(xₙ), तो प्रथम परिमित अंतर (First Finite Difference) को निम्न प्रकार से लिखा जाता है: Δy₀ = y₁ - y₀ Δy₁ = y₂ - y₁ आदि। इसी प्रकार, द्वितीय परिमित अंतर (Second Finite Difference) को: Δ²y₀ = Δy₁ - Δy₀ आदि। परिमित अंतर के मुख्यतः तीन प्रकार होते हैं: अग्रगामी (Forward), पश्चगामी (Backward), एवं केंद्रीय (Central) अंतर।
- परिमित अंतर फलन के मानों के बीच का अंतर है।
- x के मान समान अंतर (h) पर होने चाहिए।
- प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि क्रम के परिमित अंतर होते हैं।
- अग्रगामी, पश्चगामी, केंद्रीय अंतर मुख्य प्रकार हैं।
- 📌 अग्रगामी अंतर: आगे के मानों के बीच का अंतर।
- 📌 पश्चगामी अंतर: पिछले मानों के बीच का अंतर।
- 📌 केंद्रीय अंतर: केंद्र के आसपास के मानों के बीच का अंतर।
1.3 अग्रगामी परिमित अंतर (Forward Differences)
अवधारणा1.3 अग्रगामी परिमित अंतर (Forward Differences)
अग्रगामी परिमित अंतर (Forward Differences) वह अंतर है जिसमें प्रत्येक y के मान से उसके अगले y के मान को घटाया जाता है। यदि y₀, y₁, y₂, ..., yₙ फलन के मान हैं, तो अग्रगामी अंतर निम्न प्रकार से लिखे जाते हैं: Δy₀ = y₁ - y₀ Δy₁ = y₂ - y₁ Δy₂ = y₃ - y₂ आ
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Numerical Analysis and Vector Calculus · Vardhman Mahaveer Open University
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