Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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घनानंद
व्याख्याघनानंद
घनानंद (सन् 1673–1760) हिंदी साहित्य के रीतिकाल के एक प्रमुख कवि थे, जिन्हें रीतिमुक्त या स्वच्छंद काव्यधारा का प्रतिनिधि माना जाता है। वे दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के मीर मुंशी थे। घनानंद का जीवन प्रेम और वियोग की गहराई से भरा था। उनकी प्रेमिका सुजान के प्रति उनका अटूट प्रेम था, जिसके कारण वे बादशाह के दरबार में बे-अदबी कर बैठे और बादशाह ने उन्हें दरबार से निकाल दिया। इस बेवफ़ाई और निराशा के बाद वे वृंदावन चले गए और निंबार्क संप्रदाय में दीक्षित होकर भक्त के रूप में जीवन बिताने लगे। उनकी कविताओं में प्रेम की पीड़ा, वियोग की व्यथा और भावों की गहराई स्पष्ट रूप से झलकती है। वे प्रेम के अत्यंत गंभीर, निर्मल, आवेगमय और व्याकुल रूप के कवि थे, इसलिए उन्हें साक्षात रसमूर्ति कहा गया। उनकी काव्य-कला में लाक्षणिकता, वक्रोक्ति, वाग्विदग्धता और अलंकारों का कुशल प्रयोग मिलता है। भाषा की दृष्टि से उनकी रचनाएँ परिष्कृत ब्रजभाषा में हैं, जिसमें कोमलता, मधुरता और व्यंजकता का अद्भुत मेल है। घनानंद की प्रमुख रचनाओं में 'सुजान सागर', 'विरह लीला', 'कृपाकंड निबंध', 'रसकेलि वल्ली' आदि शामिल हैं। प्रस्तुत पुस्तक में उनके दो कवित्त दिए गए हैं, जिनमें उन्होंने प्रेमिका सुजान के दर्शन की तीव्र अभिलाषा व्यक्त की है।
- घनानंद रीतिकाल के रीतिमुक्त कवि थे।
- वे दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के मीर मुंशी थे।
- सुजान नाम की स्त्री से उनका गहरा प्रेम था।
- बादशाह के दरबार से बे-अदबी के कारण निकाले गए।
- वृंदावन जाकर निंबार्क संप्रदाय में दीक्षित हुए।
- उनकी भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा थी।
- प्रेम और वियोग उनकी कविताओं के मुख्य विषय हैं।
- 📌 रीतिकाल: हिंदी साहित्य का वह काल जिसमें काव्य की रीतियों का पालन किया जाता था।
- 📌 मीर मुंशी: बादशाह के दरबार में एक अधिकारी।
- 📌 निंबार्क संप्रदाय: हिन्दू धर्म का एक वैष्णव संप्रदाय।
कवित (1)
व्याख्याकवित (1)
पहला कवित्त घनानंद की प्रेमिका सुजान के प्रति उनकी तीव्र अभिलाषा और प्रेम की गहराई को दर्शाता है। कवि कहते हैं कि वे बहुत दिनों से सुजान के आसपास ही हैं, उनके दर्शन की तीव्र इच्छा लिए हुए। कवि के प्राण अब तक इसी चाहत के कारण टिके हुए हैं। वे कहते हैं कि झूठी बातों और विश्वासघात से वे उदास हैं, परंतु अब वे घन आनंद (खुशी) की प्राप्ति की आशा छोड़ चुके हैं। कवि अपने अधरों को जोड़कर प्राणों को समेटे हुए सुजान को संदेश भेजने की इच्छा रखते हैं। यह कवित्त प्रेम की व्यथा, वियोग की पीड़ा और प्रेमिका के प्रति गहरी आसक्ति को प्रकट करता है। इसमें भावों की तीव्रता, भाषा की मधुरता और अलंकारों का सुंदर प्रयोग मिलता है। कवि की व्यथा इतनी गहरी है कि वे अपने मनभावन के दर्शन के बिना चैन से नहीं रह सकते।
- कवि ने प्रेमिका के दर्शन की तीव्र अभिलाषा व्यक्त की है।
- प्रेमिका के प्रति कवि के प्राण अटके हुए हैं।
- झूठी बातों से कवि उदास है।
- कवि ने अपने अधरों को जोड़कर संदेश भेजने की इच्छा जताई है।
- कवित्त में प्रेम और वियोग की गहरी भावना है।
- 📌 कवित्त: हिंदी काव्य की एक लघु काव्य-रचना।
- 📌 वियोग: प्रेमी और प्रेमिका के बीच का दूरी या अलगाव।
- 📌 अधर: होंठ।
कवित (2)
व्याख्याकवित (2)
दूसरा कवित्त प्रेमिका की उपेक्षा और उसकी चुप्पी पर कवि की व्यथा को प्रकट करता है। कवि पूछते हैं कि क्या वह हमेशा टालती रहेगी और आरसी (अंगूठी में जड़ा शीशा) में अपना चेहरा ही निहारती रहेगी? वे चकित हैं कि प्रेमिका ने उन्हें क्यों नहीं देखा और क्यों डो
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कवि निराला को हिन्दी साहित्य के किस काल का कवि माना जाता है?
उत्तर:
छायावाद
Q2.गीत से वेदना को कैसे रोका जा सकता है?
उत्तर:
चेतना जगाकर
Q3.निराला अपनी बेटी के विवाह को पूरी तरह नया क्यों मानते हैं?
उत्तर:
पारंपरिक विवाह नहीं होने के कारण
Q4.कवि ने अपनी पुत्री की सुंदरता की तुलना किससे की है?
उत्तर:
रचनाओं के सौंदर्य से
Q5.‘नागमती’ विरह का संदेश किसे ले जाने के लिए कहती है?
उत्तर:
काग
Q6.‘ पद्मावत’ किस प्रकार का काव्य है?
उत्तर:
प्रबंधकाव्य
Q7.‘बारहमासा’कविता की भाषा किस प्रकार की है?
उत्तर:
ठेठ अवधी
Q8.‘बारहमासा’ कविता की विषयवस्तु क्या है?
उत्तर:
नागमती का विरह
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Hindi · Class 12
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