Chapter 15
Chapter 15 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अध्याय की शुरुआत पद्माकर के जीवन और काव्य-यात्रा के संक्षिप्त परिचय से होती है। पद्माकर का जन्म सन् 1753 में बाँदा जिले के ककुवां गाँव में हुआ था। वे बुंदेलखंड के प्रमुख कवि और राजदरबारी कवि थे। उनका वास्तविक नाम पद्मसिंह था, किन्तु वे पद्माकर के नाम से विख्यात हुए। पद्माकर ब्रजभाषा के प्रमुख कवि माने जाते हैं और उनकी रचनाएँ मुख्यतः कवित्त छंद में हैं। उन्होंने अपने काव्य में प्रकृति, प्रेम, वीरता, देशभक्ति तथा मानवीय संवेदनाओं का सुंदर चित्रण किया है। उनकी भाषा में लोकजीवन की झलक, ग्रामीण संस्कृति और भावों की गहराई स्पष्ट दिखाई देती है। पद्माकर की रचनाएँ आज भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इस परिचय में उनके जीवन, काल और साहित्यिक योगदान का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
- पद्माकर का जन्म 1753 में बाँदा जिले के ककुवां गाँव में हुआ।
- वे बुंदेलखंड के राजाओं के दरबार में राजकवि रहे।
- उनका वास्तविक नाम पद्मसिंह था।
- पद्माकर ब्रजभाषा के प्रमुख कवि हैं।
- उनकी रचनाएँ मुख्यतः कवित्त छंद में हैं।
- उनके काव्य में प्रकृति, प्रेम, वीरता और देशभक्ति का सुंदर चित्रण है।
- 📌 पद्माकर: ब्रजभाषा के प्रमुख कवि, जिनका वास्तविक नाम पद्मसिंह था।
- 📌 कवित्त: ब्रजभाषा का एक छंद जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं।
पद्माकर का जीवन और कृतित्व
व्याख्यापद्माकर का जीवन और कृतित्व
पद्माकर का जन्म 1753 ईस्वी में बाँदा जिले के ककुवां गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम पद्मसिंह था। वे बुंदेलखंड के राजाओं के दरबार में राजकवि के रूप में कार्यरत थे। पद्माकर ने ब्रजभाषा में काव्य रचना की, जो उस समय की लोकभाषा थी। उनकी रचनाएँ मुख्यतः कवित्त छंद में हैं, जो चार पंक्तियों का एक छंद होता है। पद्माकर ने अपने काव्य में प्रकृति के मनोहारी चित्रण के साथ-साथ प्रेम, वीरता, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं को भी समाहित किया। उनकी भाषा में सहजता, प्रवाह और मिठास है, जो पाठकों को आकर्षित करती है। पद्माकर की रचनाओं में बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से मिलती है। उनकी कविताएँ आज भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी छंद-रचना की शैली का अध्ययन साहित्यकारों द्वारा किया जाता है।
- पद्माकर का जन्म 1753 में हुआ था।
- वे बुंदेलखंड के राजाओं के दरबार में राजकवि थे।
- उनका वास्तविक नाम पद्मसिंह था।
- उन्होंने ब्रजभाषा में काव्य रचना की।
- उनकी रचनाएँ मुख्यतः कवित्त छंद में हैं।
- उनके काव्य में प्रकृति, प्रेम, वीरता, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाएँ हैं।
- भाषा में सहजता, प्रवाह और मिठास है।
- उनकी रचनाओं में लोकजीवन और ग्रामीण संस्कृति की झलक मिलती है।
कवित्त: पाठ्यांश
व्याख्याकवित्त: पाठ्यांश
इस अनुभाग में पद्माकर द्वारा रचित कवित्तों का मूल पाठ प्रस्तुत किया गया है। कवित्त ब्रजभाषा का एक छंद है, जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं। पद्माकर के कवित्तों में प्रकृति, प्रेम, वीरता और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समावेश है। कवित्त छंद की प्रत्येक पंक्
अभ्यास प्रश्न — Chapter 15
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कविता-लेखन में शब्दों से खेलने से तात्पर्य है
उत्तर:
शब्दों के भीतर छुपे अर्थों की परतों को खोलना
Q2.सहृदय पाठक के मन पर कविता का गहरा असर पड़ता है क्योंकि
उत्तर:
वह पाठकों की संवेदना को छू लेती है
Q3.कविता लेखन में शैली क्या है
उत्तर:
वाक्य गठन की विशिष्ट प्रणालियाँ
Q4.अच्छी कविता लेखन का गुण है
उत्तर:
कम से कम शब्दों में अपनी बात कहना
Q5.कविता की संरचना का प्रकार
उत्तर:
छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों हो सकते हैं
Q6.'कविता समय-विशेष की उपज है' का तात्पर्य है
उत्तर:
कविता का स्वरूप समय के साथ-साथ बदलता रहता है
Q7.कविता लेखन का सबसे पहला उपकरण क्या है
उत्तर:
शब्द
Q8.‘हँसी की चोट’ काव्य की कौन-सी विधा है ?
उत्तर:
सवैया
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