सब आँखों के आँसू उजले
सब आँखों के आँसू उजले — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस खंड में 'सब आँखों के आँसू उजले' कविता का परिचय प्रस्तुत किया गया है। यह कविता सुप्रसिद्ध हिंदी कवि सुदामा पांडे 'धूमिल' द्वारा रचित है। धूमिल का जन्म 1936 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के खेवली गाँव में हुआ था और उनका निधन 1975 में हुआ। वे हिंदी की नई कविता आंदोलन के प्रमुख कवियों में से एक थे। उनकी कविताएँ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और व्यंग्य से भरपूर होती हैं। 'सब आँखों के आँसू उजले' कविता में उन्होंने आँसू को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है, जो सभी मनुष्यों की समान पीड़ा और करुणा को दर्शाता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने समाज में व्याप्त भेदभाव, अन्याय और विषमताओं के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया है। कविता की भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है, जो आम जनमानस की भावनाओं को अभिव्यक्त करती है।
- कवि सुदामा पांडे 'धूमिल' का परिचय और उनका साहित्यिक योगदान।
- कविता 'सब आँखों के आँसू उजले' का सामाजिक और मानवीय संदर्भ।
- आँसू को सभी वर्गों की समान पीड़ा का प्रतीक माना गया है।
- कविता में भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध संदेश निहित है।
- धूमिल की भाषा शैली सरल, सहज और व्यंग्यपूर्ण है।
- 📌 नई कविता आंदोलन: हिंदी कविता में एक नया युग जो पारंपरिक काव्यशैली से हटकर सामाजिक यथार्थ को प्रस्तुत करता है।
- 📌 व्यंग्य: किसी विषय की आलोचना या उपहास करने की साहित्यिक विधा।
कवि का जीवन परिचय
व्याख्याकवि का जीवन परिचय
इस खंड में कवि सुदामा पांडे 'धूमिल' के जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। धूमिल का जन्म 1936 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के खेवली गाँव में हुआ था। उन्होंने हिंदी साहित्य में नई कविता आंदोलन को मजबूत किया। उनका असली नाम सुदामा पांडे था, परंतु वे 'धूमिल' के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी कविताओं में समाज की सच्चाई, गरीबी, अन्याय और मानवीय पीड़ा की झलक मिलती है। धूमिल की कविताएँ आम जनमानस की भाषा में होती हैं, जो सीधे दिल को छू जाती हैं। वे अपने जीवनकाल में सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर तीखे व्यंग्यात्मक कवि रहे। उनकी मृत्यु 1975 में हुई। धूमिल की कविताएँ आज भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हैं।
- सुदामा पांडे 'धूमिल' का जन्म 1936 में वाराणसी के खेवली गाँव में हुआ।
- वे हिंदी की नई कविता आंदोलन के प्रमुख कवि थे।
- उनकी कविताएँ सामाजिक यथार्थ और मानवीय पीड़ा को दर्शाती हैं।
- धूमिल की भाषा सरल, प्रभावशाली और व्यंग्यपूर्ण थी।
- उनका निधन 1975 में हुआ।
- 📌 सुदामा पांडे 'धूमिल': हिंदी के प्रसिद्ध कवि, जो नई कविता आंदोलन के अग्रणी थे।
- 📌 नई कविता: पारंपरिक छंदों से हटकर सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित कविता।
कविता का पाठ
व्याख्याकविता का पाठ
इस खंड में 'सब आँखों के आँसू उजले' कविता की मूल पंक्तियाँ प्रस्तुत की गई हैं। कविता की प्रत्येक पंक्ति में कवि ने आँसू को एक सार्वभौमिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया है कि चाहे कोई भी व्यक्ति किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या समुदाय से
अभ्यास प्रश्न — सब आँखों के आँसू उजले
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता शुरू करने का श्रेय किसे दिया जाता है ?
उत्तर:
(क) तहलका डॉटकॉम
Q2.भारत में पहला छापाखाना कब और कहाँ खोला गया ?
उत्तर:
(ख) 1556 में गोवा
Q3.उस अखबार का नाम बताइए जो सिर्फ़ इंटरनेट पर उपलब्ध है ?
उत्तर:
(क) प्रभासाक्षी
Q4.भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का कौनसा दौर चल रहा है ?
उत्तर:
(ख) दूसरा
Q5.जनसंचार के किस माध्यम को श्रोताओं से संचालित माध्यम माना जाता है ?
उत्तर:
(क) रेडियो
Q6.छापेखाने के आविष्कार का श्रेय किसे दिया जाता है ?
उत्तर:
(ख) जर्मनी के गुटेनबर्ग
Q7.जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौनसा है ?
उत्तर:
(क) प्रिंट या मुद्रित
Q8.अंतरक्रियात्मकता(इंटर एक्टिविटी ) और सूचनाओं के विशाल भण्डार का अद्भुत माध्यम है -
उत्तर:
(घ) इंटरनेट
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Hindi · Class 11
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