कण त्वरक
कण त्वरक — अध्ययन नोट्स
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9.1 परिचय
व्याख्या9.1 परिचय
इस अनुभाग में कण त्वरकों (Particle Accelerators) का परिचय दिया गया है। कण त्वरक वे यंत्र हैं जिनका उपयोग आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य परमाणु, नाभिकीय एवं मूलकण भौतिकी में प्रयोगों के लिए आवश्यक उच्च ऊर्जा कणों का उत्पादन करना है। कण त्वरकों के विकास ने न केवल भौतिकी के क्षेत्र में, बल्कि चिकित्सा, उद्योग और अन्य विज्ञानों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। कण त्वरकों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने नाभिकीय अभिक्रियाओं, कणों के गुणधर्मों, तथा पदार्थ की संरचना का अध्ययन किया है। प्रारंभिक त्वरकों में स्थैतिक विद्युत क्षेत्र का उपयोग किया जाता था, जबकि आधुनिक त्वरकों में प्रत्यावर्ती विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र का भी उपयोग होता है। कण त्वरकों के विकास का इतिहास 20वीं सदी के प्रारंभ से शुरू होता है, जब वैज्ञानिकों ने उच्च ऊर्जा कणों की आवश्यकता को महसूस किया। आज के समय में, कण त्वरक अत्यंत जटिल एवं शक्तिशाली उपकरण बन चुके हैं, जिनकी सहायता से वैज्ञानिक ब्रह्मांड के मूलभूत रहस्यों को उजागर कर रहे हैं।
- कण त्वरक आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं।
- इनका उपयोग नाभिकीय एवं मूलकण भौतिकी में किया जाता है।
- प्रारंभिक त्वरकों में स्थैतिक विद्युत क्षेत्र का उपयोग होता था।
- आधुनिक त्वरकों में प्रत्यावर्ती विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र का प्रयोग होता है।
- कण त्वरकों का उपयोग चिकित्सा एवं उद्योग में भी होता है।
- इनकी सहायता से पदार्थ की सूक्ष्म संरचना का अध्ययन संभव हुआ है।
- 📌 कण त्वरक: ऐसा यंत्र जो आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करता है।
- 📌 त्वरण: किसी कण की गति में वृद्धि करना।
9.2 कण त्वरकों के प्रकार
अवधारणा9.2 कण त्वरकों के प्रकार
इस अनुभाग में कण त्वरकों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है। त्वरकों को मुख्यतः दो श्रेणियों में बांटा जाता है: (1) स्थैतिक त्वरक (Static Accelerators) और (2) प्रत्यावर्ती त्वरक (Cyclic Accelerators)। स्थैतिक त्वरकों में कणों को एक बार में उच्च वोल्टेज के माध्यम से त्वरित किया जाता है, जैसे वैन डी ग्राफ जनरेटर। प्रत्यावर्ती त्वरकों में कणों को कई बार विद्युत क्षेत्र से गुजारा जाता है, जिससे उनकी ऊर्जा क्रमशः बढ़ती जाती है, जैसे साइक्लोट्रॉन, लीनियर त्वरक, सिंक्रोट्रॉन आदि। प्रत्येक त्वरक की अपनी विशेषताएँ, सीमाएँ और उपयोग के क्षेत्र होते हैं। त्वरकों के चयन में उनकी अधिकतम ऊर्जा, कणों का प्रकार, तथा प्रयोग की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाता है।
- कण त्वरकों के दो मुख्य प्रकार: स्थैतिक और प्रत्यावर्ती।
- स्थैतिक त्वरकों में एक बार में उच्च वोल्टेज से कण त्वरित होते हैं।
- प्रत्यावर्ती त्वरकों में कणों की ऊर्जा क्रमशः बढ़ाई जाती है।
- साइक्लोट्रॉन, लीनियर त्वरक, सिंक्रोट्रॉन प्रत्यावर्ती त्वरकों के उदाहरण हैं।
- प्रत्येक त्वरक की अपनी ऊर्जा सीमा और उपयोगिता होती है।
- प्रयोग की आवश्यकता के अनुसार त्वरक का चयन किया जाता है।
- 📌 स्थैतिक त्वरक: जिसमें कणों को एक बार में उच्च वोल्टेज से त्वरित किया जाता है।
- 📌 प्रत्यावर्ती त्वरक: जिसमें कणों को कई बार विद्युत क्षेत्र से गुजारा जाता है।
9.3 स्थैतिक त्वरक: वैन डी ग्राफ जनरेटर
व्याख्या9.3 स्थैतिक त्वरक: वैन डी ग्राफ जनरेटर
इस अनुभाग में वैन डी ग्राफ जनरेटर (Van de Graaff Generator) की संरचना, कार्यविधि एवं सिद्धांत का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह एक स्थैतिक त्वरक है, जिसका उपयोग उच्च वोल्टेज उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसकी संरचना में एक बड़ा धातु का गोला, एक
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