Chapter 11
Chapter 11 — अध्ययन नोट्स
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11.1 नाभिकीय संलयन का परिचय
व्याख्या11.1 नाभिकीय संलयन का परिचय
नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह ऊर्जा सूर्य और अन्य तारों में होने वाले संलयन के कारण ही उत्पन्न होती है। नाभिकीय संलयन में दो या दो से अधिक नाभिक, जैसे कि ड्यूटेरियम (²H) और ट्रिटियम (³H), अत्यधिक तापमान और दबाव की स्थिति में मिलते हैं और एक नया नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान का कुछ भाग ऊर्जा में बदल जाता है, जिसे द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc² द्वारा व्यक्त किया जाता है। संलयन की प्रक्रिया को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भविष्य में ऊर्जा के स्वच्छ और असीम स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
- नाभिकीय संलयन में दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं।
- इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- सूर्य में ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है।
- संलयन के लिए उच्च तापमान और दबाव आवश्यक हैं।
- द्रव्यमान का कुछ भाग ऊर्जा में बदल जाता है।
- संलयन ऊर्जा भविष्य में ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत बन सकता है।
- 📌 नाभिकीय संलयन: दो हल्के नाभिकों का मिलकर भारी नाभिक बनाना।
- 📌 द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण: द्रव्यमान और ऊर्जा का संबंध (E = mc²)।
11.2 नाभिकीय संलयन की शर्तें
अवधारणा11.2 नाभिकीय संलयन की शर्तें
नाभिकीय संलयन के लिए कुछ विशेष शर्तें आवश्यक होती हैं। सबसे पहली शर्त है कि दो नाभिकों को एक-दूसरे के बहुत समीप लाना, ताकि वे मजबूत नाभिकीय बल के प्रभाव में आ जाएं। लेकिन दोनों नाभिकों के बीच विद्युत प्रतिकर्षण (Coulomb repulsion) होता है, जिसे पार करने के लिए अत्यधिक ऊष्मा (तापमान) और दबाव चाहिए। सामान्यतः संलयन के लिए तापमान लगभग 10⁷ K या उससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा, नाभिकों का घनत्व भी अधिक होना चाहिए ताकि टकराव की संभावना बढ़े। इन शर्तों को पृथ्वी पर प्राप्त करना कठिन है, लेकिन सूर्य और अन्य तारों में ये स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं।
- संलयन के लिए नाभिकों को बहुत समीप लाना आवश्यक है।
- विद्युत प्रतिकर्षण को पार करने के लिए उच्च तापमान चाहिए।
- तापमान लगभग 10⁷ K या उससे अधिक होना चाहिए।
- नाभिकों का घनत्व भी अधिक होना चाहिए।
- सूर्य में ये शर्तें स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं।
- पृथ्वी पर इन शर्तों को प्राप्त करना कठिन है।
- 📌 विद्युत प्रतिकर्षण: नाभिकों के बीच इलेक्ट्रिक बल जो उन्हें दूर रखता है।
- 📌 नाभिकीय बल: नाभिकों को जोड़ने वाला बल।
11.3 नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया
व्याख्या11.3 नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया
नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया में दो हल्के नाभिक, जैसे ड्यूटेरियम (²H) और ट्रिटियम (³H), अत्यधिक तापमान और दबाव की स्थिति में टकराते हैं। इस टकराव से वे विद्युत प्रतिकर्षण को पार कर लेते हैं और मजबूत नाभिकीय बल के प्रभाव में आकर एक नया नाभिक बनाते हैं।
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Nuclear Physics · Vardhman Mahaveer Open University