Chapter 15
Chapter 15 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
15.1 परिचय
व्याख्या15.1 परिचय
इस अनुभाग में अंतर क्रिया (Interaction) की मूल अवधारणा का परिचय दिया गया है। परमाणु नाभिक के भीतर और उनके बीच होने वाली विभिन्न बलों और अंतर क्रियाओं का अध्ययन नाभिकीय भौतिकी का प्रमुख विषय है। परमाणु नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच बल, उनके स्थायित्व, ऊर्जा स्तर, और नाभिकीय अभिक्रियाओं को समझने के लिए अंतर क्रिया का ज्ञान आवश्यक है। अंतर क्रिया का तात्पर्य उन बलों और प्रभावों से है, जो मूल कणों के बीच कार्य करते हैं। ब्रह्मांड में चार मूलभूत बल होते हैं: गुरुत्वाकर्षण बल, विद्युत-चुंबकीय बल, प्रबल नाभिकीय बल और दुर्बल नाभिकीय बल। इन बलों की प्रकृति, सीमा और प्रभाव भिन्न-भिन्न होते हैं। इस अध्याय में मुख्य रूप से प्रबल और दुर्बल नाभिकीय बलों तथा उनके प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।
- अंतर क्रिया का अर्थ है – कणों के बीच कार्य करने वाले बल।
- चार मूलभूत बल: गुरुत्वाकर्षण, विद्युत-चुंबकीय, प्रबल नाभिकीय, दुर्बल नाभिकीय।
- नाभिकीय भौतिकी में मुख्यतः प्रबल और दुर्बल बलों का अध्ययन किया जाता है।
- प्रबल नाभिकीय बल प्रोटॉन-न्यूट्रॉन को नाभिक में बांधकर रखते हैं।
- दुर्बल नाभिकीय बल β-विघटन जैसी घटनाओं में महत्वपूर्ण हैं।
- 📌 अंतर क्रिया: कणों के बीच कार्य करने वाले बल।
- 📌 प्रबल नाभिकीय बल: नाभिक में प्रोटॉन व न्यूट्रॉन को बांधने वाला बल।
- 📌 दुर्बल नाभिकीय बल: β-विघटन जैसी घटनाओं में सक्रिय बल।
15.2 नाभिकीय बल
अवधारणा15.2 नाभिकीय बल
नाभिकीय बल वह बल है, जो परमाणु नाभिक के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच कार्य करता है। यह बल बहुत ही प्रबल होता है और इसकी सीमा बहुत छोटी (लगभग 1-2 फेम्टोमीटर) होती है। नाभिकीय बल की मुख्य विशेषताएँ हैं: यह बल प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन-न्यूट्रॉन सभी के बीच समान रूप से कार्य करता है; यह बल अत्यंत अल्प दूरी पर ही प्रभावी होता है; यह बल आकर्षणात्मक होता है, जिससे नाभिक के कण एक साथ बंधे रहते हैं; यह बल विद्युत-चुंबकीय बल से कई गुना अधिक शक्तिशाली होता है। नाभिकीय बल के कारण ही नाभिक स्थिर रहता है, अन्यथा प्रोटॉन-प्रोटॉन के बीच विद्युत-चुंबकीय प्रतिकर्षण के कारण नाभिक विखंडित हो जाता।
- नाभिकीय बल अत्यंत प्रबल और अल्प दूरी का बल है।
- यह बल प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन सभी के बीच समान रूप से कार्य करता है।
- नाभिकीय बल आकर्षणात्मक होता है।
- इसकी सीमा लगभग 1-2 फेम्टोमीटर होती है।
- यह बल नाभिक के स्थायित्व के लिए आवश्यक है।
- 📌 नाभिकीय बल: नाभिक के कणों के बीच कार्य करने वाला अत्यंत प्रबल बल।
- 📌 फेम्टोमीटर: लंबाई की इकाई (1 फेम्टोमीटर = 10⁻¹⁵ मीटर)।
15.3 नाभिकीय बल के गुण
व्याख्या15.3 नाभिकीय बल के गुण
नाभिकीय बल की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं: (1) यह बल अत्यंत प्रबल होता है, विद्युत-चुंबकीय बल से लगभग 100 गुना अधिक; (2) इसकी सीमा बहुत छोटी होती है (1-2 फेम्टोमीटर); (3) यह बल आकर्षणात्मक होता है, परंतु बहुत ही छोटी दूरी (0.5 फेम्टोमीटर से कम) पर प्रति
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