Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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9.1 प्रस्तावना
व्याख्या9.1 प्रस्तावना
इस अनुभाग में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की आवश्यकता, पृष्ठभूमि और उद्देश्य का परिचय दिया गया है। 1991 में भारत ने आर्थिक संकट का सामना किया, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत कम हो गए थे और देश को आर्थिक सुधारों की आवश्यकता महसूस हुई। इस संकट के कारण सरकार ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की नीति अपनाई। प्रस्तावना में बताया गया है कि किस प्रकार आर्थिक नीति में बदलाव लाकर भारत ने अपने विकास की गति को तेज किया। 1991 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः नियंत्रित और योजनाबद्ध थी, जिसमें सरकार का हस्तक्षेप अधिक था। उदारीकरण का अर्थ है अर्थव्यवस्था में सरकारी नियंत्रणों को कम करना, जिससे व्यापार और उद्योग को अधिक स्वतंत्रता मिलती है। प्रस्तावना में यह भी बताया गया है कि इन सुधारों का उद्देश्य आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, विदेशी निवेश आकर्षित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को सक्षम बनाना था।
- 1991 में भारत ने आर्थिक संकट का सामना किया।
- सरकार ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति अपनाई।
- उदारीकरण का अर्थ है सरकारी नियंत्रणों में कमी।
- आर्थिक सुधारों का उद्देश्य आर्थिक विकास और रोजगार सृजन था।
- सुधारों से विदेशी निवेश को आकर्षित किया गया।
- भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाना मुख्य उद्देश्य था।
- 📌 उदारीकरण: अर्थव्यवस्था में सरकारी नियंत्रणों को कम करना।
- 📌 निजीकरण: सरकारी उद्यमों का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण।
- 📌 वैश्वीकरण: विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था का जुड़ाव।
9.2 आर्थिक संकट और सुधारों की आवश्यकता
व्याख्या9.2 आर्थिक संकट और सुधारों की आवश्यकता
इस अनुभाग में 1991 के आर्थिक संकट की विस्तार से चर्चा की गई है। 1980 के दशक में भारत का भुगतान संतुलन बिगड़ गया था, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई। सरकार के खर्च में वृद्धि, आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। तेल की कीमतों में वृद्धि और खाड़ी युद्ध ने संकट को और बढ़ा दिया। सरकार को IMF और विश्व बैंक से ऋण लेना पड़ा। इन परिस्थितियों ने आर्थिक सुधारों की आवश्यकता को स्पष्ट किया। सुधारों के तहत सरकार ने नियंत्रणों को हटाने, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की नीति अपनाई।
- 1980 के दशक में भुगतान संतुलन बिगड़ गया।
- विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई।
- सरकारी खर्च और आयात में वृद्धि हुई।
- IMF और विश्व बैंक से ऋण लेना पड़ा।
- आर्थिक सुधारों की आवश्यकता स्पष्ट हुई।
- सुधारों के तहत नियंत्रणों को हटाया गया।
- 📌 भुगतान संतुलन: देश के आयात और निर्यात के बीच का अंतर।
- 📌 विदेशी मुद्रा भंडार: देश के पास उपलब्ध विदेशी मुद्रा की कुल राशि।
9.3 उदारीकरण: अर्थ और प्रक्रिया
अवधारणा9.3 उदारीकरण: अर्थ और प्रक्रिया
इस अनुभाग में उदारीकरण की परिभाषा, उद्देश्य और प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है। उदारीकरण का अर्थ है अर्थव्यवस्था में सरकारी नियंत्रणों, लाइसेंसिंग, कोटा और प्रतिबंधों को कम करना या हटाना। इससे व्यापार, उद्योग और निवेश को अधिक स्वतंत्रता मिल
SLM - Economic Policy & Rural Development (Hindi) के सभी 17 अध्याय
Economic Policy & Rural Development · Vardhman Mahaveer Open University
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