Ch 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Economic Policy & Rural Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 6अध्याय 8 / 17Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

7.1 लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योग का परिचय

व्याख्या

7.1 लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योग का परिचय

लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। ये उद्योग छोटे स्तर पर, सीमित पूंजी और साधनों के साथ संचालित होते हैं। कुटीर उद्योग मुख्यतः घर या छोटे कार्यस्थल में परिवार के सदस्यों द्वारा चलाए जाते हैं, जबकि लघु उद्योग में कुछ श्रमिकों की सहायता ली जाती है। इन उद्योगों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, और आर्थिक विकास में योगदान देना है। भारत में स्वतंत्रता के बाद इन उद्योगों को विशेष महत्व मिला, क्योंकि ये ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक थे। लघु उद्योगों में वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, लकड़ी, धातु, और अन्य उत्पादों का निर्माण होता है। कुटीर उद्योगों में हस्तशिल्प, बुनाई, कढ़ाई, मिट्टी के बर्तन, और अन्य पारंपरिक कार्य शामिल हैं। सरकार ने इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ और संस्थाएँ स्थापित की हैं।

  • लघु उद्योग सीमित पूंजी और श्रमिकों के साथ संचालित होते हैं
  • कुटीर उद्योग मुख्यतः परिवार के सदस्यों द्वारा घर में चलाए जाते हैं
  • ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में सहायक हैं
  • स्थानीय संसाधनों का उपयोग इन उद्योगों की विशेषता है
  • सरकार ने इन उद्योगों के विकास के लिए योजनाएँ बनाई हैं
  • आर्थिक विकास में इन उद्योगों का योगदान महत्वपूर्ण है
  • 📌 लघु उद्योग: छोटे स्तर पर संचालित उद्योग, सीमित पूंजी और श्रमिक
  • 📌 कुटीर उद्योग: घर या छोटे कार्यस्थल में परिवार द्वारा संचालित उद्योग

7.2 लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्व

अवधारणा

7.2 लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्व

लघु एवं कुटीर उद्योगों का भारतीय अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं, जिससे पलायन की समस्या कम होती है। ये उद्योग स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पाद बनाते हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास होता है। कुटीर उद्योगों में पारंपरिक कला और शिल्प का संरक्षण होता है। लघु उद्योगों के माध्यम से महिलाओं और कमजोर वर्गों को आर्थिक सशक्तिकरण मिलता है। ये उद्योग बड़े उद्योगों के लिए कच्चा माल और सहायक उत्पाद भी तैयार करते हैं। सरकार के अनुसार, लघु एवं कुटीर उद्योगों का योगदान राष्ट्रीय आय, निर्यात, और सामाजिक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण है।

  • रोजगार सृजन में सहायक
  • स्थानीय संसाधनों का उपयोग
  • पारंपरिक कला का संरक्षण
  • महिलाओं एवं कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण
  • बड़े उद्योगों के लिए सहायक
  • राष्ट्रीय आय और निर्यात में योगदान
  • 📌 रोजगार सृजन: नए रोजगार के अवसर पैदा करना
  • 📌 सशक्तिकरण: आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक शक्ति प्रदान करना

7.3 लघु एवं कुटीर उद्योगों की समस्याएँ

व्याख्या

7.3 लघु एवं कुटीर उद्योगों की समस्याएँ

लघु एवं कुटीर उद्योगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें पूंजी की कमी, तकनीकी पिछड़ापन, कच्चे माल की उपलब्धता में कठिनाई, विपणन की समस्या, सरकारी सहायता की सीमाएँ, और श्रमिकों की कम दक्षता शामिल हैं। इन उद्योगों में आधुनिक तकनीक का अभाव है