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Chapter 10

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Economic Policy & Rural Development (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 9अध्याय 11 / 17Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

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10.1 वैश्वीकरण: अर्थ एवं परिप्रेक्ष्य

अवधारणा

10.1 वैश्वीकरण: अर्थ एवं परिप्रेक्ष्य

वैश्वीकरण का अर्थ है – विश्व के विभिन्न देशों के बीच वस्त्र, सेवाओं, पूंजी, तकनीक और मानव संसाधनों का निर्बाध प्रवाह। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें राष्ट्रीय सीमाएँ आर्थिक गतिविधियों के लिए कम महत्व की हो जाती हैं और विश्व एकीकृत बाजार के रूप में उभरता है। वैश्वीकरण के कारण विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हो जाती हैं। यह प्रक्रिया मुख्यतः 1990 के दशक के बाद तेज़ हुई, जब भारत ने नई आर्थिक नीति अपनाई। वैश्वीकरण का उद्देश्य है – उत्पादन, व्यापार, निवेश, तकनीक और श्रम के क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना। वैश्वीकरण के दो प्रमुख आयाम हैं – आर्थिक और सामाजिक। आर्थिक आयाम में व्यापार, निवेश, पूंजी प्रवाह, तकनीकी हस्तांतरण आदि शामिल हैं, जबकि सामाजिक आयाम में संस्कृति, शिक्षा, जीवनशैली आदि का आदान-प्रदान होता है।

  • वैश्वीकरण से विश्व की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ गई हैं।
  • यह प्रक्रिया 1990 के बाद भारत में तेज़ी से बढ़ी।
  • वैश्वीकरण का मुख्य उद्देश्य है – वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना।
  • इससे व्यापार, निवेश, तकनीक और श्रम का प्रवाह बढ़ा।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी वैश्वीकरण के प्रभाव दिखते हैं।
  • 📌 वैश्वीकरण: विश्व के देशों के बीच वस्त्र, सेवाओं, पूंजी, तकनीक आदि का निर्बाध प्रवाह।
  • 📌 एकीकृत बाजार: ऐसा बाजार जिसमें विभिन्न देशों के उत्पादों की प्रतिस्पर्धा होती है।

10.2 वैश्वीकरण के कारण

व्याख्या

10.2 वैश्वीकरण के कारण

वैश्वीकरण के विस्तार के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं – सूचना एवं संचार तकनीक (ICT) में प्रगति, परिवहन के साधनों का विकास, व्यापार नीतियों में उदारीकरण, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका, और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का प्रभाव। सूचना तकनीक के क्षेत्र में क्रांति ने देशों के बीच संचार को आसान बना दिया है। इंटरनेट, मोबाइल, उपग्रह संचार आदि ने विश्व को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिवहन के क्षेत्र में हवाई, जल और सड़क मार्गों का विकास हुआ है, जिससे वस्त्र और सेवाओं का आवागमन तेज़ हुआ। व्यापार नीतियों में उदारीकरण से आयात-निर्यात पर लगे प्रतिबंध कम हुए हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) अपने उत्पादन और विपणन को विश्व स्तर पर फैला रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन जैसे – WTO, IMF, विश्व बैंक आदि ने वैश्विक व्यापार को प्रोत्साहित किया है।

  • सूचना एवं संचार तकनीक में प्रगति से वैश्वीकरण को गति मिली।
  • परिवहन साधनों के विकास ने देशों को जोड़ा।
  • व्यापार नीतियों में उदारीकरण से वैश्विक व्यापार बढ़ा।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया।
  • 📌 सूचना तकनीक: ऐसी तकनीक जिससे सूचना का आदान-प्रदान संभव हो सके।
  • 📌 व्यापार उदारीकरण: व्यापार के नियमों को सरल बनाना।

10.3 वैश्वीकरण के प्रभाव

व्याख्या

10.3 वैश्वीकरण के प्रभाव

वैश्वीकरण के प्रभाव आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय स्तर पर देखे जा सकते हैं। आर्थिक प्रभावों में – विदेशी निवेश में वृद्धि, निर्यात-आयात में बढ़ोतरी, रोजगार के नए अवसर, और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि शामिल हैं। इससे भारतीय कंपनियों को नई तकनीक