Ch 8निःशुल्क

Chapter 8

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Economic Policy & Rural Development (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 7अध्याय 9 / 17Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

8.1 प्रस्तावना

व्याख्या

8.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका और महत्व की प्रस्तावना दी गई है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने आर्थिक विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र को एक मुख्य साधन के रूप में चुना। सार्वजनिक क्षेत्र का तात्पर्य उन उद्यमों, संस्थाओं और सेवाओं से है, जिनका स्वामित्व और प्रबंधन सरकार के पास होता है। सार्वजनिक क्षेत्र का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना का विकास, और आर्थिक असमानताओं को कम करना भी है। भारत में सार्वजनिक क्षेत्र ने औद्योगीकरण, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, खनिज, ऊर्जा, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रस्तावना में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के विकास के पीछे मुख्य कारण क्या थे—जैसे निजी पूंजी की कमी, बड़े निवेश की आवश्यकता, और सामाजिक न्याय की आवश्यकता।

  • स्वतंत्रता के बाद भारत ने सार्वजनिक क्षेत्र को आर्थिक विकास का मुख्य साधन माना।
  • सार्वजनिक क्षेत्र का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण भी है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र ने आधारभूत संरचना, उद्योग, परिवहन, और संचार के विकास में योगदान दिया।
  • निजी पूंजी की कमी और बड़े निवेश की आवश्यकता के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना हुई।
  • सार्वजनिक क्षेत्र ने रोजगार सृजन और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायता की।
  • 📌 सार्वजनिक क्षेत्र: वह क्षेत्र जिसमें उद्यमों का स्वामित्व और प्रबंधन सरकार के पास होता है।
  • 📌 आधारभूत संरचना: वे सुविधाएँ जो आर्थिक विकास के लिए आवश्यक होती हैं, जैसे सड़क, बिजली, जल आपूर्ति।

8.2 भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का विकास

व्याख्या

8.2 भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का विकास

इस अनुभाग में स्वतंत्रता के बाद भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है। 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के विकास की नींव रखी गई। सरकार ने भारी उद्योग, आधारभूत संरचना, और रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दी। 1956 की औद्योगिक नीति संकल्प के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र को 'कमांडिंग हाइट्स' अर्थात् अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका दी गई। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या और निवेश में निरंतर वृद्धि हुई। 1991 तक सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार हुआ, जिसमें स्टील, कोयला, ऊर्जा, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, और दूरसंचार जैसे क्षेत्र शामिल थे। इस विकास के पीछे मुख्य उद्देश्य थे—आर्थिक आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन, सामाजिक न्याय, और क्षेत्रीय संतुलन।

  • 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के विकास की शुरुआत हुई।
  • 1956 की औद्योगिक नीति संकल्प में सार्वजनिक क्षेत्र को प्रमुख भूमिका दी गई।
  • सार्वजनिक क्षेत्र ने भारी उद्योग, आधारभूत संरचना, और रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश किया।
  • 1991 तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या और निवेश में वृद्धि हुई।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के विकास का उद्देश्य आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय था।
  • 📌 पंचवर्षीय योजना: आर्थिक विकास के लिए पाँच वर्षों की अवधि के लिए बनाई गई सरकारी योजना।
  • 📌 आर्थिक आत्मनिर्भरता: देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बाहरी निर्भरता को कम करना।

8.3 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्देश्य

अवधारणा

8.3 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्देश्य

इस अनुभाग में सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना के प्रमुख उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं: (1) आर्थिक विकास क