Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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8.1 कार्यशील पूंजी की अवधारणा
अवधारणा8.1 कार्यशील पूंजी की अवधारणा
कार्यशील पूंजी का तात्पर्य उस पूंजी से है, जो किसी व्यवसाय के दैनिक संचालन के लिए आवश्यक होती है। यह वह पूंजी है, जिसका उपयोग कच्चे माल की खरीद, मजदूरी, वेतन, बिजली, पानी, अन्य खर्चों के भुगतान, तैयार माल के भंडारण, विक्रय आदि में किया जाता है। कार्यशील पूंजी को 'परिचालन पूंजी' भी कहा जाता है। यह व्यापार के लिए रक्त के समान है, क्योंकि इसके अभाव में व्यापार की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियाँ ठप पड़ सकती हैं। कार्यशील पूंजी का प्रबंधन इसलिए आवश्यक है ताकि व्यापार की तरलता बनी रहे और संचालन में कोई रुकावट न आए। कार्यशील पूंजी को दो भागों में बाँटा जाता है: सकल कार्यशील पूंजी (Gross Working Capital) और शुद्ध कार्यशील पूंजी (Net Working Capital)। सकल कार्यशील पूंजी से तात्पर्य कुल चालू परिसंपत्तियों से है, जबकि शुद्ध कार्यशील पूंजी चालू परिसंपत्तियों और चालू दायित्वों के अंतर को दर्शाती है।
- कार्यशील पूंजी से तात्पर्य व्यापार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक पूंजी से है।
- यह कच्चे माल, मजदूरी, वेतन, अन्य खर्चों के लिए प्रयोग होती है।
- सकल कार्यशील पूंजी = कुल चालू परिसंपत्तियाँ।
- शुद्ध कार्यशील पूंजी = चालू परिसंपत्तियाँ – चालू दायित्व।
- व्यापार की तरलता बनाए रखने के लिए कार्यशील पूंजी का प्रबंधन आवश्यक है।
- पर्याप्त कार्यशील पूंजी व्यापार के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य है।
- 📌 कार्यशील पूंजी: व्यापार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु आवश्यक पूंजी।
- 📌 सकल कार्यशील पूंजी: कुल चालू परिसंपत्तियों का योग।
- 📌 शुद्ध कार्यशील पूंजी: चालू परिसंपत्तियाँ से चालू दायित्वों को घटाने के बाद शेष राशि।
8.2 कार्यशील पूंजी का महत्त्व
व्याख्या8.2 कार्यशील पूंजी का महत्त्व
व्यापार के सुचारू संचालन के लिए कार्यशील पूंजी अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी संस्था के पास पर्याप्त कार्यशील पूंजी नहीं होगी, तो वह अपने दैनिक खर्चों का भुगतान समय पर नहीं कर पाएगी, जिससे उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो सकती है। कार्यशील पूंजी की पर्याप्तता से संस्था की साख, लाभप्रदता, तरलता एवं विकास में सहायता मिलती है। कार्यशील पूंजी के अभाव में संस्था को कच्चे माल की खरीद, मजदूरी, वेतन, बिजली, पानी आदि के भुगतान में कठिनाई आती है। इससे उत्पादन प्रक्रिया रुक सकती है और संस्था की प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त कार्यशील पूंजी से संस्था को छूट पर माल खरीदने, आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने, तथा व्यापार के विस्तार में भी सहायता मिलती है।
- कार्यशील पूंजी के बिना व्यापार का संचालन संभव नहीं है।
- पर्याप्त कार्यशील पूंजी से संस्था की साख में वृद्धि होती है।
- यह संस्था को छूट पर माल खरीदने की सुविधा देती है।
- आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने में सहायता करती है।
- व्यापार के विस्तार में सहायक होती है।
- प्रत्येक व्यापार के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता भिन्न-भिन्न हो सकती है।
- 📌 तरलता: संस्था की अपनी अल्पकालीन देनदारियों को समय पर चुकाने की क्षमता।
- 📌 साख: संस्था की बाजार में विश्वसनीयता।
8.3 कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक
व्याख्या8.3 कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक
कार्यशील पूंजी की आवश्यकता प्रत्येक व्यापार के लिए भिन्न-भिन्न होती है, जो विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है। इन कारकों में व्यापार की प्रकृति, उत्पादन चक्र की अवधि, व्यापार की नीति, ऋण नीति, विकास स्तर, मौसमी मांग, उत्पादन प्रक्रिया की तकनीक, कच्चे म
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Management Accounting · Vardhman Mahaveer Open University
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