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Chapter 12

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Management Accounting (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 18Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

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12.1 पूंजी संरचना का अर्थ

परिभाषा

12.1 पूंजी संरचना का अर्थ

पूंजी संरचना का अर्थ किसी व्यवसाय द्वारा अपने कुल पूंजी में विभिन्न वित्तीय साधनों का अनुपात निर्धारित करने से है। इसमें इक्विटी शेयर, प्रिफरेंस शेयर, ऋण, डिबेंचर आदि शामिल होते हैं। पूंजी संरचना वह मिश्रण है जिसमें कंपनी अपनी दीर्घकालीन वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विभिन्न स्रोतों से पूंजी जुटाती है। इसका मुख्य उद्देश्य लागत को न्यूनतम करना और जोखिम को नियंत्रित करना होता है। पूंजी संरचना का निर्धारण प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनी की वित्तीय स्थिरता, लाभांश नीति, और विस्तार की संभावनाएँ प्रभावित होती हैं।

  • पूंजी संरचना में इक्विटी, प्रिफरेंस शेयर, ऋण, डिबेंचर आदि शामिल होते हैं।
  • यह कंपनी की दीर्घकालीन वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपयोगी है।
  • सही पूंजी संरचना से लागत कम और जोखिम नियंत्रित किया जा सकता है।
  • पूंजी संरचना कंपनी की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करती है।
  • यह लाभांश नीति और विस्तार की संभावनाओं को भी प्रभावित करती है।
  • 📌 इक्विटी शेयर: कंपनी के मालिकाना हक का हिस्सा।
  • 📌 प्रिफरेंस शेयर: लाभांश में प्राथमिकता पाने वाले शेयर।
  • 📌 ऋण: कंपनी द्वारा उधार ली गई राशि।

12.2 पूंजी संरचना के प्रकार

अवधारणा

12.2 पूंजी संरचना के प्रकार

पूंजी संरचना के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं: (1) साधारण पूंजी संरचना, जिसमें केवल इक्विटी शेयर और प्रिफरेंस शेयर होते हैं; (2) जटिल पूंजी संरचना, जिसमें इक्विटी, प्रिफरेंस, ऋण, डिबेंचर, व अन्य वित्तीय साधन शामिल होते हैं। साधारण पूंजी संरचना में जोखिम कम होता है पर विस्तार की सीमाएँ होती हैं। जटिल पूंजी संरचना में विभिन्न स्रोतों का मिश्रण होता है जिससे कंपनी को अधिक वित्तीय लचीलापन मिलता है। इसके अलावा, पूंजी संरचना को स्थिर और गतिशील भी माना जाता है। स्थिर पूंजी संरचना में पूंजी का अनुपात लंबे समय तक अपरिवर्तित रहता है, जबकि गतिशील संरचना में पूंजी का मिश्रण समय-समय पर बदलता रहता है।

  • साधारण पूंजी संरचना में केवल इक्विटी और प्रिफरेंस शेयर होते हैं।
  • जटिल पूंजी संरचना में कई वित्तीय साधनों का मिश्रण होता है।
  • स्थिर पूंजी संरचना में अनुपात लंबे समय तक अपरिवर्तित रहता है।
  • गतिशील पूंजी संरचना में अनुपात समय-समय पर बदलता है।
  • जटिल संरचना से वित्तीय लचीलापन बढ़ता है।
  • 📌 साधारण पूंजी संरचना: सीमित स्रोतों वाली संरचना।
  • 📌 जटिल पूंजी संरचना: विविध स्रोतों वाली संरचना।
  • 📌 स्थिर पूंजी संरचना: अपरिवर्तित अनुपात।

12.3 पूंजी संरचना के तत्व

व्याख्या

12.3 पूंजी संरचना के तत्व

पूंजी संरचना के मुख्य तत्व निम्नलिखित हैं: (1) इक्विटी शेयर पूंजी: यह कंपनी के मालिकाना हक का प्रतिनिधित्व करती है और सबसे अधिक जोखिम वाली पूंजी होती है। (2) प्रिफरेंस शेयर पूंजी: इसमें लाभांश और पूंजी वापसी में प्राथमिकता होती है। (3) ऋण: इसमें बैंक