Ch 13निःशुल्क

Chapter 13

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Management Accounting (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 12अध्याय 13 / 18Chapter 14

Chapter 13अध्ययन नोट्स

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13.1 पूंजी की लागत का अर्थ

परिभाषा

13.1 पूंजी की लागत का अर्थ

पूंजी की लागत का अर्थ है, किसी व्यवसाय द्वारा अपनी पूंजी के विभिन्न स्रोतों से पूंजी प्राप्त करने के लिए भुगतान की जाने वाली न्यूनतम दर। यह दर वह है, जिस पर कंपनी अपने निवेशकों को आकर्षित करती है और उन्हें पूंजी उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करती है। पूंजी की लागत को 'अवसर लागत' भी कहा जाता है, क्योंकि यह वह न्यूनतम प्रतिफल है, जिसे निवेशक अपने निवेश के लिए अपेक्षित करते हैं। पूंजी की लागत का निर्धारण कंपनी के वित्तीय निर्णयों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इससे यह तय होता है कि कौन-सा निवेश लाभकारी है और कौन-सा नहीं। पूंजी की लागत के विभिन्न स्रोत होते हैं, जैसे- इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, ऋण, और रिटेन्ड अर्निंग्स। प्रत्येक स्रोत की लागत अलग-अलग होती है, और कुल पूंजी की लागत का निर्धारण इन सभी स्रोतों की लागत को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

  • पूंजी की लागत वह न्यूनतम दर है, जिस पर कंपनी पूंजी प्राप्त करती है।
  • यह निवेशकों के लिए अवसर लागत के रूप में कार्य करती है।
  • पूंजी की लागत का निर्धारण निवेश निर्णयों के लिए आवश्यक है।
  • कुल पूंजी की लागत विभिन्न स्रोतों की लागत पर निर्भर करती है।
  • पूंजी की लागत से कंपनी के लाभप्रद निवेश का चयन होता है।
  • 📌 पूंजी की लागत: पूंजी प्राप्त करने के लिए भुगतान की जाने वाली न्यूनतम दर।
  • 📌 अवसर लागत: वह लागत, जो किसी अन्य विकल्प को छोड़ने पर आती है।

13.2 पूंजी की लागत का महत्व

व्याख्या

13.2 पूंजी की लागत का महत्व

पूंजी की लागत का महत्व व्यवसाय में निवेश निर्णयों, वित्तीय संरचना, लाभांश नीति, और पूंजी बजटिंग में देखा जाता है। पूंजी की लागत का सही निर्धारण कंपनी को यह निर्णय लेने में मदद करता है कि कौन-सा निवेश लाभकारी है। यदि किसी परियोजना की प्रतिफल दर पूंजी की लागत से अधिक है, तो वह परियोजना लाभकारी मानी जाती है। पूंजी की लागत का महत्व निम्नलिखित क्षेत्रों में है: (1) निवेश निर्णय: पूंजी की लागत को न्यूनतम प्रतिफल दर के रूप में लिया जाता है, जिससे निवेश परियोजनाओं का चयन किया जाता है। (2) वित्तीय संरचना: पूंजी की लागत के अनुसार कंपनी अपनी पूंजी संरचना का निर्धारण करती है, जिससे कुल लागत न्यूनतम रहे। (3) लाभांश नीति: पूंजी की लागत के आधार पर कंपनी लाभांश वितरण की नीति बनाती है। (4) पूंजी बजटिंग: पूंजी की लागत को छूट दर के रूप में लिया जाता है, जिससे निवेश परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है।

  • पूंजी की लागत निवेश निर्णयों में न्यूनतम प्रतिफल दर के रूप में प्रयुक्त होती है।
  • यह वित्तीय संरचना के निर्धारण में सहायक है।
  • लाभांश नीति के निर्धारण में पूंजी की लागत का महत्व है।
  • पूंजी बजटिंग में छूट दर के रूप में पूंजी की लागत ली जाती है।
  • पूंजी की लागत से कंपनी के दीर्घकालीन लाभ का निर्धारण होता है।
  • 📌 न्यूनतम प्रतिफल दर: वह दर, जो निवेश परियोजना के चयन के लिए आवश्यक है।
  • 📌 पूंजी बजटिंग: दीर्घकालीन निवेश परियोजनाओं का मूल्यांकन।

13.3 पूंजी की लागत के स्रोत

अवधारणा

13.3 पूंजी की लागत के स्रोत

किसी कंपनी के लिए पूंजी प्राप्त करने के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं: (1) इक्विटी शेयर पूंजी: यह वह पूंजी है, जो कंपनी के शेयरधारकों द्वारा निवेश की जाती है। इसकी लागत शेयरधारकों की अपेक्षित प्रतिफल दर होती है। (2) प्रेफरेंस शेयर पूंजी: इसमें शेयरधारको