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Chapter 14

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Management Accounting (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 13अध्याय 14 / 18Chapter 15

Chapter 14अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

14.1 प्रस्तावना

व्याख्या

14.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में पूंजी संरचना के सिद्धांत अध्याय की प्रस्तावना दी गई है। इसमें बताया गया है कि किसी भी व्यवसाय के लिए पूंजी संरचना का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संगठन की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और विकास को प्रभावित करती है। पूंजी संरचना से आशय है – किसी फर्म की कुल पूंजी में विभिन्न स्रोतों (जैसे इक्विटी शेयर, पसंदीदा शेयर, ऋण, डिबेंचर आदि) का अनुपात। यह अध्याय पूंजी संरचना के विभिन्न सिद्धांतों, उनके निर्धारण के कारकों, तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की चर्चा करता है। पूंजी संरचना का सही निर्धारण कंपनी की लाभप्रदता, जोखिम, नियंत्रण और लचीलापन को प्रभावित करता है।

  • पूंजी संरचना का अर्थ – कुल पूंजी में विभिन्न स्रोतों का अनुपात।
  • सही पूंजी संरचना से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।
  • पूंजी संरचना के निर्धारण में कई कारकों की भूमिका होती है।
  • यह अध्याय विभिन्न सिद्धांतों और व्यावहारिक पहलुओं को समझाता है।
  • पूंजी संरचना से कंपनी की लाभप्रदता और जोखिम प्रभावित होते हैं।
  • 📌 पूंजी संरचना: किसी फर्म की कुल पूंजी में विभिन्न स्रोतों का अनुपात।
  • 📌 इक्विटी शेयर: कंपनी के मालिकाना हक का प्रतिनिधित्व करने वाले शेयर।
  • 📌 ऋण: कंपनी द्वारा उधार ली गई राशि, जिस पर ब्याज देना होता है।

14.2 पूंजी संरचना के तत्व

अवधारणा

14.2 पूंजी संरचना के तत्व

इस अनुभाग में पूंजी संरचना के मुख्य तत्वों की चर्चा की गई है। पूंजी संरचना में सामान्यतः निम्नलिखित तत्व होते हैं – (1) इक्विटी शेयर पूंजी, (2) पसंदीदा शेयर पूंजी, (3) दीर्घकालिक ऋण (जैसे डिबेंचर, ऋणपत्र), (4) आरक्षित और अधिशेष। प्रत्येक तत्व की अपनी विशेषताएँ, लाभ और सीमाएँ होती हैं। इक्विटी शेयर पूंजी कंपनी के मालिकों द्वारा लगाई जाती है, जिस पर लाभांश का भुगतान लाभ के अनुसार किया जाता है। पसंदीदा शेयर पूंजी पर निश्चित लाभांश दिया जाता है, परंतु यह कंपनी के नियंत्रण में भागीदारी नहीं देती। डिबेंचर या ऋण पर निश्चित ब्याज देना होता है, चाहे कंपनी को लाभ हो या नहीं। आरक्षित और अधिशेष कंपनी के संचित लाभ होते हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के लिए रखा जाता है।

  • इक्विटी शेयर पूंजी – मालिकाना पूंजी, लाभांश लाभ के अनुसार।
  • पसंदीदा शेयर पूंजी – निश्चित लाभांश, सीमित अधिकार।
  • डिबेंचर/ऋण – निश्चित ब्याज, जोखिम कम।
  • आरक्षित और अधिशेष – संचित लाभ, भविष्य के लिए।
  • प्रत्येक तत्व की भूमिका पूंजी संरचना में भिन्न होती है।
  • 📌 पसंदीदा शेयर: ऐसे शेयर जिन पर निश्चित लाभांश मिलता है।
  • 📌 डिबेंचर: कंपनी द्वारा जारी ऋणपत्र, जिस पर ब्याज देना होता है।
  • 📌 आरक्षित: कंपनी के लाभ का वह भाग जो भविष्य के लिए रखा जाता है।

14.3 पूंजी संरचना के निर्धारण के कारक

व्याख्या

14.3 पूंजी संरचना के निर्धारण के कारक

इस अनुभाग में उन विभिन्न कारकों की चर्चा की गई है, जो किसी कंपनी की पूंजी संरचना के निर्धारण को प्रभावित करते हैं। मुख्य कारक हैं – (1) नियंत्रण, (2) लचीलापन, (3) जोखिम, (4) लागत, (5) लाभप्रदता, (6) बाजार की स्थिति, (7) कंपनी की आयु और आकार, (8) कर ल