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Chapter 8

🎓 Class 12📖 Bhartiya Kala ka Itihaas Bhag 2📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 7अध्याय 8 / 8

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भारत की जीवंत कला परंपराएँ

व्याख्या

भारत की जीवंत कला परंपराएँ

भारत में कला की विविध और जीवंत परंपराएँ गाँव-शहर, रेगिस्तान, पहाड़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैली हुई हैं। ये कलाएँ आज भी जनमानस द्वारा अपनाई जा रही हैं। पारंपरिक रूप से कला का अध्ययन समय के सापेक्ष किया जाता है, जिसमें कला अवधियों का नामकरण राजवंशों या स्थानों के नाम पर किया जाता है। परंतु आम जनता की रचनात्मकता और उनकी लोक कला परंपराएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। भारत में स्वदेशी (देशज) ज्ञान का भंडार सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। कलाकारों ने उपलब्ध सामग्री और तकनीकों का उपयोग कर उत्कृष्ट कलाकृतियाँ बनाई हैं। लोक कला और शिल्प के बीच एक सूक्ष्म अंतर होता है, किन्तु दोनों में रचनात्मकता, अंतःप्रेरणा और सौंदर्यबोध सम्मिलित होता है। भारत की लोक कला में प्रतीकात्मकता, रूपांकन, रंगों और बनावट का विशिष्ट उपयोग होता है। स्वतंत्रता के बाद हस्तकला उद्योग का पुनरुद्धार हुआ और इसे व्यावसायिक उत्पादन के लिए संगठित किया गया। विभिन्न राज्यों ने अपनी विशिष्ट कलाओं को विक्रय केंद्रों में प्रदर्शित किया। भारत की कला और शिल्प परंपराएँ पाँच हजार वर्षों से अधिक की मूर्त विरासत को दर्शाती हैं। इनमें धार्मिक, अनुष्ठानिक, उपयोगी और सजावटी कलाकृतियाँ शामिल हैं। लोक कलाकारों ने अपनी दैनिक जरूरतों के साथ-साथ स्थानीय बाजारों के लिए कलाकृतियाँ बनाई, जिनमें प्राकृतिक सौंदर्यबोध और प्रतीकात्मक अर्थ निहित हैं।

  • भारत की लोक कला गाँव-शहर, रेगिस्तान, पहाड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में फैली हुई है।
  • कला का अध्ययन आमतौर पर राजवंशों या स्थानों के नाम पर किया जाता है, परंतु लोक कला भी महत्वपूर्ण है।
  • स्वदेशी ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है।
  • लोक कला और शिल्प में रचनात्मकता, अंतःप्रेरणा और सौंदर्यबोध सम्मिलित होते हैं।
  • स्वतंत्रता के बाद हस्तकला उद्योग का पुनरुद्धार हुआ और व्यावसायिक उत्पादन के लिए संगठित किया गया।
  • भारत की कला परंपराएँ पाँच हजार वर्षों से अधिक की विरासत दर्शाती हैं।
  • 📌 स्वदेशी कला: स्थानीय या देशज ज्ञान पर आधारित कला।
  • 📌 लोक कला: आम जनता द्वारा बनाई जाने वाली पारंपरिक कला।
  • 📌 शिल्प: उपयोगी और सजावटी वस्तुओं का निर्माण।

विनकारी परंपरा

व्याख्या

विनकारी परंपरा

विनकारी परंपरा भारत की लोक चित्रकला की प्रमुख शाखा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रीय चित्रकला रूप शामिल हैं। इनमें मिथिला या बिहार की मधुबनी पेंटिंग, महाराष्ट्र की वरली पेंटिंग, उत्तरी गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश की पिथोरो पेंटिंग, राजस्थान की फड़ पेंटिंग, नाथद्वारा की पिछावई, मध्य प्रदेश की गोंड और सांवरा पेंटिंग, ओडिशा और बंगाल की पटचित्र प्रमुख हैं। ये चित्रकला रूप मुख्यतः ग्रामीण और जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए जाते हैं और धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विषयों को चित्रित करते हैं। इन चित्रों में रंगों का प्रयोग, प्रतीकात्मकता, आकृतियों की सजावट और प्राकृतिक सौंदर्यबोध की अभिव्यक्ति होती है। ये कलाएँ आज भी जीवंत हैं और स्थानीय उत्सवों, विवाह, त्योहारों, अनुष्ठानों में उपयोग की जाती हैं। आधुनिक कलाकारों ने भी इन लोक कलाओं से प्रेरणा लेकर अपनी रचनाओं में इन्हें शामिल किया है। स्वतंत्रता के बाद इन कलाओं का व्यावसायिककरण हुआ और इन्हें संगठित रूप से प्रस्तुत किया गया।

  • विनकारी परंपरा में विभिन्न क्षेत्रीय लोक चित्रकला रूप शामिल हैं।
  • मधुबनी, वरली, पिथोरो, फड़, पिछावई, गोंड, पटचित्र प्रमुख उदाहरण हैं।
  • ये चित्रकला धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को चित्रित करती हैं।
  • रंगों, प्रतीकों और आकृतियों का विशिष्ट प्रयोग होता है।
  • आधुनिक कलाकारों ने लोक कला से प्रेरणा ली है।
  • स्वतंत्रता के बाद इन कलाओं का व्यावसायिककरण हुआ।
  • 📌 विनकारी परंपरा: लोक चित्रकला की क्षेत्रीय परंपराएँ।
  • 📌 मधुबनी पेंटिंग: बिहार की प्रसिद्ध लोक चित्रकला।
  • 📌 वरली पेंटिंग: महाराष्ट्र की जनजातीय चित्रकला।

मिथिला कला

व्याख्या

मिथिला कला

मिथिला कला, जिसे मधुबनी चित्रकला भी कहा जाता है, बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक चित्रकला है। इसका नाम मिथिला प्रदेश के नाम पर पड़ा है जिसका प्राचीन नाम विदेह था। यह कला मुख्यतः महिलाएँ विवाह जैसे औपचारिक अवसरों पर अपने मिट्टी के घरों की दीवा

अभ्यास प्रश्नChapter 8

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.भारत में लोक कला और शिल्प के बीच क्या अंतर है और दोनों में कौन-कौन से सामान्य तत्व पाए जाते हैं?

उत्तर:

लोक कला मुख्यतः सजावटी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति होती है जबकि शिल्प उपयोगी वस्तुओं का निर्माण होता है। दोनों में रचनात्मकता, अंतःप्रेरणा और सौंदर्यबोध जैसे सामान्य तत्व पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मिथिला की चित्रकला लोक कला है और बस्तर की डोकरा मूर्तियाँ शिल्प हैं।

व्याख्या:

लोक कला और शिल्प दोनों ही भारत की पारंपरिक कलाओं के महत्वपूर्ण अंग हैं। लोक कला अधिकतर सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विषयों को चित्रित करती है, जबकि शिल्प में उपयोगी वस्तुओं का निर्माण होता है। दोनों में रचनात्मकता और सौंदर्यबोध की अंतःप्रेरणा होती है, जो इन्हें जीवंत बनाती है। उदाहरण स्वरूप, मिथिला की चित्रकला लोक कला है और डोकरा मूर्तिकला शिल्प की एक प्रमुख परंपरा है।

Medium
Q2.मिथिला चित्रकला में कोहबर घर का क्या महत्व है और वहाँ किस प्रकार के चित्र बनाए जाते हैं?

उत्तर:

कोहबर घर मिथिला चित्रकला का भीतरी कमरा होता है जहाँ विवाह से संबंधित चित्र बनाए जाते हैं। यहाँ खिला हुआ कमल और देवी-देवताओं के चित्र होते हैं जो कोहबर की खूबसूरती बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए, विवाह के अवसर पर कोहबर घर की दीवारों पर ये चित्र बनाए जाते हैं।

व्याख्या:

मिथिला चित्रकला में कोहबर घर विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह विवाह जैसे शुभ अवसरों के लिए समर्पित होता है। यहाँ खिला हुआ कमल, देवी-देवता और अन्य शुभ प्रतीकों का चित्रण किया जाता है। यह स्थान परिवार के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस चित्रकला में रिक्त स्थान नहीं छोड़े जाते और हर जगह प्रकृति के तत्वों से सजावट होती है।

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Q3.वरली चित्रकला में कंसारी देवी का प्रतिनिधित्व किस प्रकार किया जाता है?
A.A) मक्के की देवी के रूप में, जिसके प्रहरी पंच सियाँ देवता होते हैं
B.B) जल की देवी के रूप में, जिसके प्रहरी मछलियाँ होती हैं
C.C) अग्नि की देवी के रूप में, जिसके प्रहरी आग के देवता होते हैं
D.D) हवा की देवी के रूप में, जिसके प्रहरी पक्षी होते हैं

उत्तर:

मक्के की देवी के रूप में, जिसके प्रहरी पंच सियाँ देवता होते हैं

व्याख्या:

वरली चित्रकला में कंसारी देवी को मक्के की देवी के रूप में पूजा जाता है। उसके प्रहरी बिना सिर वाले योद्धा होते हैं जिन्हें पंच सियाँ देवता कहा जाता है। ये चित्रकला के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं।

Easy
Q4.गोंड चित्रकला में कृष्ण को किस प्रकार चित्रित किया जाता है और इसके सांस्कृतिक महत्व को समझाइए।

उत्तर:

गोंड चित्रकला में कृष्ण को गायों और गोपियों से घिरा हुआ चित्रित किया जाता है, जिसमें गोपियों के सिर पर घड़ा होता है। यह चित्र गोंड समुदाय की धार्मिक आस्था और प्रकृति पूजा का प्रतीक है। उदाहरण के लिए, मंडला क्षेत्र में ऐसे चित्र झोपड़ियों की दीवारों पर बनाए जाते हैं।

व्याख्या:

गोंड चित्रकला प्रकृति और धार्मिक कथाओं का संयोजन है। कृष्ण का चित्रण गोपियों और गायों के साथ समुदाय की आस्था और जीवनशैली को दर्शाता है। यह चित्रकला धार्मिक विश्वासों और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। रंगों और आकृतियों के माध्यम से जीवन की जीवंतता व्यक्त की जाती है।

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Q5.पिटोरो चित्रकला में स्वर्गीय निकायों और पृथ्वी के क्षेत्र को अलग करने वाली रेखा का क्या महत्व है?

उत्तर:

पिटोरो चित्रकला में एक अलंकृत लहराती रेखा स्वर्गीय निकायों और पृथ्वी के क्षेत्र को अलग करती है। यह ब्रह्मांड के विभिन्न स्तरों का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ ऊपर स्वर्गीय प्राणी और नीचे पृथ्वी के जीव-जंतु और लोग चित्रित होते हैं। उदाहरण के लिए, झाबुआ के भित्ति चित्रों में यह रेखा स्पष्ट दिखती है।

व्याख्या:

पिटोरो चित्रकला में ब्रह्मांड की संरचना को दर्शाने के लिए विभिन्न खंड बनाए जाते हैं। लहराती रेखा इन खंडों को अलग करती है, जिससे चित्र में आध्यात्मिक और भौतिक दुनिया के बीच संबंध स्पष्ट होता है। यह चित्रकला समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक समझ को प्रदर्शित करती है।

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Q6.पट चित्रकला में चित्रों को जलरोधक और चमकदार बनाने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है?
A.A) चित्र को कोयले की आग पर रखना और सतह पर लाह लगाना
B.B) चित्र को धूप में सुखाना और बाद में मोम लगाना
C.C) चित्र को पानी में भिगोकर सुखाना
D.D) चित्र पर तेल की परत लगाना

उत्तर:

चित्र को कोयले की आग पर रखना और सतह पर लाह लगाना

व्याख्या:

पट चित्रकला में चित्र को जलरोधक और चमकदार बनाने के लिए चित्र को कोयले की आग पर रखा जाता है और सतह पर लाह लगाई जाती है। इससे चित्र की सतह मजबूत और चमकदार हो जाती है। यह प्रक्रिया चित्र की टिकाऊपन को बढ़ाती है।

Easy
Q7.राजस्थान की फड़ लोक कला में भोमिया कौन होते हैं और उनका चित्रण किस उद्देश्य से किया जाता है?

उत्तर:

भोमिया बहादुर वीर होते हैं जिन्होंने मवेशियों को लुटेरों से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका चित्रण पशुधन की सुरक्षा के उद्देश्य से फड़ चित्रों में किया जाता है। उदाहरण के लिए, गोगाजी और पाबूजी जैसे भोमिया देवताओं की वीर गाथाएँ फड़ पर दर्शाई जाती हैं।

व्याख्या:

फड़ लोक कला में भोमिया नायकों का चित्रण उनकी वीरता और बलिदान को सम्मानित करने के लिए किया जाता है। ये चित्र पशुधन की सुरक्षा और समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। भोपों द्वारा इन चित्रों के साथ कथाएँ सुनाई जाती हैं जो लोक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

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Q8.डोकरा कास्टिंग प्रक्रिया में राल का क्या उपयोग होता है और इसे कैसे तैयार किया जाता है?

उत्तर:

डोकरा कास्टिंग में राल को मिट्टी के बरतन में गर्म करके तरल रूप में लाया जाता है। यह राल नरम और मुलायम रहता है, जिसे छोटे टुकड़ों में तोड़कर कुंडल में बनाया जाता है और मूर्ति के आकार पर मढ़ा जाता है। उदाहरण के लिए, साल के पेड़ से प्राप्त राल को सरसों के तेल के साथ उबालकर तैयार किया जाता है।

व्याख्या:

डोकरा कास्टिंग में राल का उपयोग मूर्ति के ढांचे के लिए किया जाता है। इसे गर्म करके तरल रूप में लाया जाता है और फिर कुंडल बनाकर मूर्ति के आकार पर मढ़ा जाता है। यह प्रक्रिया मूर्ति को मजबूत और विस्तृत बनाने में मदद करती है। साल के पेड़ की राल को सरसों के तेल के साथ उबालकर तरल किया जाता है।

Hard