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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Bhartiya Kala ka Itihaas Bhag 2📖 14 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~21 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 14 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

कंपनी चित्रकला

व्याख्या

कंपनी चित्रकला

अठारहवीं शताब्दी में जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में आई और उपनिवेशवाद की स्थापना की, तब भारतीय चित्रकला में एक नई शैली का विकास हुआ जिसे 'कंपनी चित्रकला' या 'कंपनी शैली' कहा जाता है। इस शैली का मुख्य कारण था अंग्रेज़ अधिकारियों का भारतीय जीवन, वनस्पति, जीव-जंतु और रहन-सहन से प्रभावित होकर स्थानीय कलाकारों को कमीशन पर रखना। ये कलाकार मुशिदाबाद, लखनऊ और दिल्ली के थे, जिन्होंने कागज पर कथात्मक और यथार्थवादी चित्र बनाए। कंपनी शैली में भारतीय और यूरोपीय कला का सम्मिश्रण था। कलाकारों ने अपने आसपास की जीवनशैली को पारंपरिक भारतीय रूप में चित्रित किया, लेकिन चित्रण में यथार्थवाद और यूरोपीय तकनीकों का समावेश था। इस शैली के चित्रों की मांग भारत में रह रहे अंग्रेजों के साथ-साथ ब्रिटेन में भी थी। कंपनी चित्रकला ने भारतीय कला को एक नया आयाम दिया, जिसमें स्थानीय जीवन के दृश्य, जीव-जंतु, वनस्पति और सामाजिक जीवन के चित्र शामिल थे। इस शैली ने भारतीय चित्रकला को यूरोपीय दृष्टिकोण से प्रभावित करते हुए एक नया स्वरूप दिया।

  • कंपनी चित्रकला का उदय ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आगमन के बाद हुआ।
  • यह शैली भारतीय और यूरोपीय कला का सम्मिश्रण थी।
  • स्थानीय कलाकारों ने यथार्थवादी चित्रण किया।
  • कंपनी शैली के चित्रों की मांग भारत और ब्रिटेन दोनों जगह थी।
  • चित्रों में भारतीय जीवन, वनस्पति और जीव-जंतु का यथार्थ चित्रण था।
  • 📌 कंपनी चित्रकला: भारतीय और यूरोपीय कला का सम्मिश्रण, जो अठारहवीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आगमन के बाद विकसित हुआ।
  • 📌 यथार्थवाद: वास्तविक जीवन के यथासंभव सटीक चित्रण की कला।

राजा रवि वर्मा

व्याख्या

राजा रवि वर्मा

उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में फोटोग्राफी के आने से चित्रकला की गुणवत्ता में गिरावट आई क्योंकि कैमरे द्वारा यथार्थवादी दस्तावेज़ बनाए जाने लगे। ब्रिटिश कलाकारों द्वारा स्थापित कला विद्यालयों में तैलीय रंगों का प्रयोग अकादमिक शैली के चित्रों में किया गया। राजा रवि वर्मा (1848–1906) ने इस शैली को अपनाते हुए भारतीय मिथकों, जैसे रामायण और महाभारत के दृश्यों को यथार्थवादी और यूरोपीय तैलीय रंगों में चित्रित किया। उनकी चित्रकला ने भारतीय राजप्रसादों में लोकप्रियता हासिल की और उनके चित्रों की ओलियोग्राफी बाजार में आई। रवि वर्मा ने भारतीय चित्रकला में पश्चिमी तकनीक और विषयों का सम्मिश्रण किया, जिससे उनकी शैली को विदेशी माना जाने लगा। राष्ट्रवादी आंदोलन के उदय के साथ ही बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना हुई, जिसने भारतीय कला की स्वदेशी शैली को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। राजा रवि वर्मा की चित्रकला ने भारतीय कला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया, विशेषकर धार्मिक और पौराणिक विषयों के चित्रण में।

  • फोटोग्राफी के आने से चित्रकला की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ा।
  • राजा रवि वर्मा ने यूरोपीय तैलीय रंगों का प्रयोग किया।
  • उन्होंने रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्यों के दृश्य चित्रित किए।
  • उनकी चित्रकला की ओलियोग्राफी बाजार में उपलब्ध हुई।
  • उनकी शैली को विदेशी और पश्चिमी माना जाने लगा।
  • 📌 अकादमिक शैली: यूरोपीय कला विद्यालयों में सिखाई जाने वाली पारंपरिक चित्रकला शैली।
  • 📌 ओलियोग्राफी: चित्रों की मुद्रित प्रतियां।

बंगाल स्कूल

व्याख्या

बंगाल स्कूल

बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट बीसवीं सदी के प्रारंभ में एक आधुनिक एवं राष्ट्रवादी कला आंदोलन के रूप में उभरा। इसकी शुरुआत कलकत्ता में हुई, जो ब्रिटिश सत्ता का केंद्र था। यह आंदोलन स्वदेशी विचारधारा से प्रेरित था और इसका नेतृत्व अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने किया। बंगा

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. पिछले दो सप्ताह के स्थानीय समाचार पत्र लीजिए। इनमें से वे चित्र और लेख चयनित करें जिन्हें आप भारत के आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य के जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। इन दृश्यों और लेखों की सहायता से एक एल्बम संकलित करें जो समकालीन दुनिया में एक स्वतंत्र सार्वभौम भारत की कहानी को दर्शाता है।

उत्तर:

इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी के द्वारा स्थानीय समाचार पत्रों से संबंधित चित्रों और लेखों के चयन पर आधारित होगा। विद्यार्थी को भारत के आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाने वाले चित्र और लेख चुनकर एक एल्बम बनाना होगा। एल्बम में स्वतंत्र और सार्वभौम भारत की कहानी को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत करना होगा।

व्याख्या:

विद्यार्थी को स्थानीय समाचार पत्रों से चित्र और लेख चुनने होंगे जो भारत के लोकतांत्रिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाते हों। फिर उन चित्रों और लेखों की सहायता से एक एल्बम बनाना होगा जो स्वतंत्र भारत की कहानी को समकालीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता हो।

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Q2.2. राष्ट्रीय कला शैली के निर्माण में बंगाल स्कूल के कलाकारों के महत्व पर टिप्पणी करें?

उत्तर:

बंगाल स्कूल के कलाकारों ने राष्ट्रीय कला शैली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय कला को पश्चिमी अकादमिक शैली से अलग कर भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित किया। बंगाल स्कूल ने लोक कला, पौराणिक कथाओं, और भारतीय जीवन के ग्रामीण पहलुओं को चित्रित किया, जिससे एक विशिष्ट राष्ट्रीय कला शैली का विकास हुआ जो भारतीय पहचान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को प्रोत्साहित करती थी।

व्याख्या:

बंगाल स्कूल के कलाकारों ने भारतीय कला को एक नई दिशा दी, जो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं पर आधारित थी। उन्होंने लोक कला और धार्मिक विषयों को अपनाकर राष्ट्रीय कला शैली का निर्माण किया, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रभाव के खिलाफ एक सांस्कृतिक प्रतिक्रिया थी।

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Q3.3. अवनीन्द्रमाथ टैगोर द्वारा चित्रित किसी एक चित्र पर अपने विचारों को लिखें।

उत्तर:

अवनीन्द्रनाथ टैगोर के चित्रों में भारतीय संस्कृति, धार्मिकता और सौंदर्य की झलक मिलती है। उनके चित्रों में वॉश तकनीक का प्रयोग होता है जो कोमल और प्रवाहित रेखाओं के माध्यम से भावों को व्यक्त करता है। उदाहरण के लिए, उनके चित्र 'रास-तीता' में श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन को दर्शाया गया है, जिसमें ग्रामीण जीवन की सरलता और धार्मिक भावनाओं का सुंदर संयोजन है। इस चित्र में कृष्ण और गोपियाँ समान अनुपात में हैं, जिससे मानव और ईश्वर के बीच समानता का भाव प्रकट होता है।

व्याख्या:

विद्यार्थी को अवनीन्द्रनाथ टैगोर के किसी चित्र का चयन कर उसकी तकनीक, विषय-वस्तु, और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर विचार व्यक्त करना होगा। चित्र की शैली, रंग संयोजन, और सांस्कृतिक संदर्भों को समझकर उत्तर देना चाहिए।

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Q4.4. भारत की किन कला परंपराओं ने बंगाल स्कूल के कलाकारों को प्रेरित किया?

उत्तर:

बंगाल स्कूल के कलाकारों को प्रेरणा मुख्यतः अजंता के भित्ति चित्रों, पटुआ लोक कला, मुगल पांडुलिपियों, फ़ारसी चित्रकला, और भारतीय धार्मिक तथा पौराणिक कथाओं से मिली। उन्होंने इन परंपराओं के तत्वों को अपनाकर एक नई राष्ट्रीय कला शैली विकसित की जो भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती थी।

व्याख्या:

बंगाल स्कूल के कलाकारों ने भारतीय कला की प्राचीन और मध्यकालीन परंपराओं से प्रेरणा लेकर पश्चिमी अकादमिक शैली से अलग एक विशिष्ट शैली विकसित की। इस शैली में लोक कला, भित्ति चित्र, मुगल और फ़ारसी चित्रकला के प्रभाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

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Q5.5. जामिनी रॉय ने चित्रकला की अकादमिक शैली को त्यागने के बाद कौन-से विषयों का चित्रांकन किया?

उत्तर:

जामिनी रॉय ने अकादमिक शैली को त्यागकर भारतीय लोक कला और ग्रामीण जीवन के विषयों का चित्रांकन किया। उन्होंने बंगाल की लोककथाओं, ग्रामीण जीवन, धार्मिक और पौराणिक कथाओं, तथा साधारण लोगों के दैनिक जीवन को अपनी कला का विषय बनाया। उनकी शैली में सरल रेखाएँ, गाढ़े रंग और लोक कला की झलक मिलती है।

व्याख्या:

जामिनी रॉय ने पश्चिमी अकादमिक चित्रकला की जटिलताओं को छोड़कर भारतीय लोक कला की सरलता और भावनात्मक गहराई को अपनाया। उन्होंने ग्रामीण जीवन और भारतीय सांस्कृतिक कथाओं को चित्रित किया, जिससे उनकी कला में एक नई राष्ट्रीय पहचान उभरी।

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Q6.कंपनी चित्रकला क्या है और यह किस काल में भारत में विकसित हुई?

उत्तर:

कंपनी चित्रकला अठारहवीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आने के बाद विकसित हुई एक चित्रकला शैली है जिसमें भारतीय और यूरोपीय कला का सम्मिश्रण होता है। इसमें स्थानीय जीवनशैली, जीव-जंतु और वनस्पति का यथार्थवादी चित्रण किया जाता था। उदाहरण के लिए, मुशिदाबाद, लखनऊ और दिल्ली के कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्र।

व्याख्या:

कंपनी चित्रकला वह शैली है जो अंग्रेजों के भारत आने के बाद विकसित हुई। इसमें भारतीय जीवनशैली को पारंपरिक रूप में चित्रित करते हुए यूरोपीय यथार्थवाद और तकनीकों का समावेश होता है। स्थानीय कलाकारों को कमीशन पर रखा गया और उन्होंने कथात्मक चित्र बनाए। इस शैली के चित्र भारत और ब्रिटेन दोनों जगहों पर लोकप्रिय थे।

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Q7.नीचे दिए गए चित्र का विवरण पढ़िए: इसमें एक किसान खेत की जुताई कर रहा है, चित्र में चौड़े ब्रश से गहरे टेम्परा रंगों का प्रयोग हुआ है, और पृष्ठभूमि में एक मेहराब है जो अजंता के भित्ति चित्रों से प्रेरित है। यह चित्र किस कलाकार द्वारा बनाया गया है और इसके विषय में क्या संदेश है?
A.A) नंदलाल बोस; ग्रामीण जीवन और गाँधी के राजनीतिक विचारों का चित्रण
B.B) राजा रवि वर्मा; पौराणिक कथा का चित्रण
C.C) गगनेंद्रनाथ टैगोर; ज्यामितीय आधुनिक कला
D.D) जामिनी रॉय; लोक कला का पुनर्जागरण

उत्तर:

नंदलाल बोस; ग्रामीण जीवन और गाँधी के राजनीतिक विचारों का चित्रण

व्याख्या:

यह चित्र नंदलाल बोस द्वारा 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा सम्मेलन के लिए बनाया गया था। इसमें ग्रामीण जीवन के दैनिक क्रियाकलाप जैसे किसान की जुताई को दर्शाया गया है। चित्र में पटुआ लोक कला की तकनीक और गाँधी के ग्रामीण राजनीतिक विचारों का समावेश है। पृष्ठभूमि में मेहराब अजंता की भित्ति चित्रों से प्रेरित है।

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Q8.राजा रवि वर्मा की चित्रकला में कौन-सी तकनीक और विषय प्रमुख थे? उनके चित्रों की लोकप्रियता का कारण क्या था?

उत्तर:

राजा रवि वर्मा की चित्रकला में यूरोपीय तैलीय रंगों का प्रयोग प्रमुख था और उन्होंने रामायण, महाभारत जैसे पौराणिक महाकाव्यों के यथार्थवादी चित्र बनाए। उनकी शैली अकादमिक और यथार्थवादी थी। उनकी चित्रकला राजप्रसादों में लोकप्रिय हुई और उनकी ओलियोग्राफी जनसाधारण के घरों में कैलेंडर के रूप में भी आई।

व्याख्या:

राजा रवि वर्मा ने भारतीय मिथकों को यथार्थवादी और यूरोपीय तैलीय रंगों में चित्रित किया। उनकी शैली अकादमिक थी जो ब्रिटिश कला विद्यालयों में सिखाई जाती थी। उनकी लोकप्रियता का कारण उनकी तकनीक और धार्मिक विषयों का सुंदर चित्रण था।

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