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Chapter 7

🎓 Class 12📖 Swatantra Bharat Mein Rajniti-II📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 8Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

व्याख्या

क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

1980 के दशक को भारत में क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग के दशक के रूप में देखा जा सकता है। इस दौर में देश के विभिन्न हिस्सों से स्वायत्तता की माँगें उठीं, जिनमें कभी-कभी संवैधानिक हदों को पार करते हुए हथियार उठाने तक की घटनाएँ हुईं। इन आंदोलनों के कारण राजनीतिक और चुनावी प्रक्रियाएँ बाधित हुईं। केंद्र सरकार को इन संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए समझौते और बातचीत के रास्ते अपनाने पड़े। भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय विविधताओं को स्वीकार करते हुए भी राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना आवश्यक है। भारत का संविधान विभिन्न क्षेत्रों और भाषायी समूहों को अपनी संस्कृति और पहचान बनाए रखने का अधिकार देता है। लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की राजनीतिक अभिव्यक्ति की अनुमति है और यह राष्ट्र-विरोधी नहीं मानी जाती। क्षेत्रीय मुद्दों को नीति-निर्माण में शामिल किया जाता है ताकि सभी समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। हालांकि, कभी-कभी क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच तनाव उत्पन्न होता है, जिन्हें संतुलित करना आवश्यक होता है।

  • 1980 के दशक में क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँगें बढ़ीं।
  • स्वायत्तता की माँगें संवैधानिक सीमाओं को पार कर गईं।
  • सरकार ने समझौते और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजा।
  • भारत का संविधान क्षेत्रीय विविधताओं को स्वीकार करता है।
  • लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की राजनीतिक अभिव्यक्ति की अनुमति है।
  • राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता के बीच संतुलन आवश्यक है।
  • 📌 क्षेत्रीय आकांक्षा: किसी क्षेत्र की स्वायत्तता या विशेष अधिकारों की मांग।
  • 📌 राष्ट्रीय एकता: देश के सभी भागों का एकजुट रहना।
  • 📌 संवैधानिक हदें: संविधान द्वारा निर्धारित अधिकारों और सीमाओं।

जम्मू एवं कश्मीर

व्याख्या

जम्मू एवं कश्मीर

जम्मू एवं कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था। यह राज्य जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख के तीन प्रमुख क्षेत्रों से मिलकर बना है। जम्मू क्षेत्र में मुख्यतः हिन्दू रहते हैं, जबकि कश्मीर घाटी में अधिकांश कश्मीरी मुसलमान हैं। लद्दाख में बौद्ध और मुसलमान दोनों की आबादी है। 1947 से पहले यह एक राजसी रियासत थी, जिसके महाराजा हरि सिंह ने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने से इनकार किया। अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने कबायली घुसपैठियों के माध्यम से कश्मीर पर कब्जा करने का प्रयास किया, जिसके बाद महाराजा ने भारत से मदद मांगी और भारत के साथ विलय कर लिया। इसके बाद भी कश्मीर में आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के संघर्ष जारी रहे। अनुच्छेद 370 के कारण राज्य को स्वायत्तता मिली थी, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विवाद थे। 1987 के चुनावों में व्यापक धांधली के आरोपों के कारण राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और 1989 में उग्रवादी आंदोलन शुरू हुआ। 2019 में अनुच्छेद 370 को समाप्त कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया।

  • जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा मिला था।
  • राज्य में तीन क्षेत्र: जम्मू, कश्मीर घाटी, लद्दाख।
  • 1947 में पाकिस्तान ने कबायली घुसपैठ की।
  • महाराजा ने भारत के साथ विलय किया।
  • राज्य में आंतरिक और बाहरी संघर्ष जारी रहे।
  • 2019 में अनुच्छेद 370 समाप्त कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
  • 📌 अनुच्छेद 370: जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता देने वाला संविधान का प्रावधान।
  • 📌 कबायली घुसपैठ: असमाजिक तत्वों द्वारा सीमा पार से अवैध प्रवेश।
  • 📌 उग्रवादी आंदोलन: हथियारबंद विद्रोह।

द्रविड़ आंदोलन

व्याख्या

द्रविड़ आंदोलन

द्रविड़ आंदोलन भारत के क्षेत्रीय आंदोलनों में सबसे प्रभावशाली था, जिसका नेतृत्व ई.वी. रामास्वामी नायकर 'पेरियार' ने किया। यह आंदोलन दक्षिण भारत में उत्तर भारतीय और ब्राह्मणवादी वर्चस्व के विरोध में था। आंदोलन ने कभी सशस्त्र संघर्ष की राह नहीं अपनाई,

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. निम्नलिखित में मेल करें: अ क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति (क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण (ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव (ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण (घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग ब राज्य (i) नगालैंड/मिजोरम (ii) झारखंड/छत्तीसगढ़ (iii) पंजाब (iv) तमिलनाडु

उत्तर:

उत्तर: (क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण — (iii) पंजाब (ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव — (iv) तमिलनाडु (ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण — (ii) झारखंड/छत्तीसगढ़ (घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग — (i) नगालैंड/मिजोरम व्याख्या: - पंजाब का गठन सामाजिक-धार्मिक पहचान (सिख धर्म) के आधार पर हुआ। - तमिलनाडु में भाषायी पहचान के कारण केंद्र के साथ तनाव रहा है। - झारखंड और छत्तीसगढ़ का गठन क्षेत्रीय असंतुलन और विकास की मांग के कारण हुआ। - नगालैंड और मिजोरम में आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी या स्वायत्तता की माँगें उठी।

व्याख्या:

प्रत्येक क्षेत्रीय आकांक्षा की प्रकृति को उसके संबंधित राज्य से जोड़ा गया है। यह मेल क्षेत्रीय और सामाजिक-राजनीतिक कारणों को दर्शाता है।

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Q2.2. पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन, ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन और अलग देश बनाने की माँग करना-ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिए अलग-अलग रंग भरिए और दिखाइए कि किस राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रबल है।

उत्तर:

उत्तर: पूर्वोत्तर के मानचित्र पर तीन रंगों का प्रयोग करें: - बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन के लिए एक रंग (जैसे लाल) - ज्यादा स्वायत्तता की माँग के लिए दूसरा रंग (जैसे नीला) - अलग देश बनाने की माँग के लिए तीसरा रंग (जैसे हरा) प्रमुख राज्यों में: - असम में बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन (लाल) - मिजोरम, मणिपुर में ज्यादा स्वायत्तता की माँग (नीला) - नागालैंड में अलग देश बनाने की माँग (हरा) इस प्रकार मानचित्र पर रंग भरकर क्षेत्रीय आकांक्षाओं की विविधता को दर्शाया जा सकता है।

व्याख्या:

पूर्वोत्तर भारत में विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय आकांक्षाएँ अलग-अलग रूपों में प्रकट होती हैं। मानचित्र पर रंगों से यह स्पष्ट किया जाता है कि कौन-सी प्रवृत्ति किस राज्य में अधिक है।

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Q3.3. पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे? क्या ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:

उत्तर: पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान: - पंजाब की सीमाओं को पुनः निर्धारित करना। - पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा बनाना। - सिखों को विशेष अधिकार देना। - केंद्र और पंजाब के बीच शक्तियों का वितरण। क्या ये प्रावधान तनाव बढ़ा सकते हैं? हाँ, क्योंकि: - सीमाओं के पुनर्निर्धारण से पड़ोसी राज्यों में क्षेत्रीय विवाद हो सकते हैं। - भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर पड़ोसी राज्यों में असंतोष हो सकता है। - विशेष अधिकारों के कारण अन्य समुदायों में असंतोष और तनाव पैदा हो सकता है। इसलिए, समझौते के प्रावधानों से पंजाब और पड़ोसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।

व्याख्या:

पंजाब समझौते के प्रावधानों का उद्देश्य क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विवादों को सुलझाना था, लेकिन ये प्रावधान कुछ समुदायों और राज्यों के बीच तनाव का कारण भी बन सकते हैं।

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Q4.4. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने के क्या कारण थे?

उत्तर:

उत्तर: आनंदपुर साहिब प्रस्ताव विवादास्पद इसलिए था क्योंकि: - इसमें सिखों को विशेष स्वायत्तता और अधिकार देने की मांग की गई थी। - प्रस्ताव में पंजाब की सीमाओं का पुनः निर्धारण और केंद्र से अधिक स्वतंत्रता की माँग थी। - इसे भारत की एकता और संप्रभुता के लिए खतरा माना गया। - अन्य समुदायों और केंद्र सरकार ने इसे अलगाववादी और असंवैधानिक माना। इस कारण यह विवादास्पद रहा।

व्याख्या:

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव ने सिख समुदाय की विशेष माँगों को उठाया, जो राजनीतिक और सामाजिक रूप से विवादास्पद साबित हुईं।

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Q5.5. जम्मू-कश्मीर की अंदरूनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए और बताइए कि इन विभिन्नताओं के कारण इस राज्य में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सर उठाया है।

उत्तर:

उत्तर: जम्मू-कश्मीर में अंदरूनी विभिन्नताएँ मुख्यतः धार्मिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक हैं। - जम्मू क्षेत्र में हिन्दू बहुलता है। - कश्मीर घाटी में मुस्लिम बहुलता है। - लद्दाख क्षेत्र में बौद्ध और मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। इन विभिन्नताओं के कारण: - अलग-अलग समुदायों ने अपनी सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान की माँग की। - कुछ समूहों ने अधिक स्वायत्तता की माँग की। - कुछ ने अलगाववादी या स्वतंत्रता की माँग की। - यह विभिन्नताएँ राज्य में अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं का कारण बनीं।

व्याख्या:

अंदरूनी विविधता के कारण जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रीय और सांस्कृतिक समूहों की अलग-अलग माँगें उत्पन्न हुईं, जिससे क्षेत्रीय आकांक्षाएँ बढ़ीं।

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Q6.6. कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के मसले पर विभिन्न पक्ष क्या हैं? इनमें कौन-सा पक्ष आपको समुचित जान पड़ता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।

उत्तर:

उत्तर: कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता पर विभिन्न पक्ष: - एक पक्ष अधिक स्वायत्तता या विशेष दर्जा (जैसे अनुच्छेद 370) की माँग करता है। - दूसरा पक्ष पूर्ण एकीकरण और केंद्र के नियंत्रण का समर्थन करता है। - कुछ समूह स्वतंत्रता या अलगाव की माँग करते हैं। मेरा दृष्टिकोण: मैं अधिक स्वायत्तता के पक्ष में हूँ क्योंकि: - यह स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित करता है। - क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। - पूर्ण अलगाव या पूर्ण एकीकरण से उत्पन्न तनाव को कम करता है। इसलिए, क्षेत्रीय स्वायत्तता का पक्ष समुचित लगता है।

व्याख्या:

विभिन्न पक्षों के तर्कों का विश्लेषण कर क्षेत्रीय स्वायत्तता को संतुलित और व्यवहारिक समाधान माना जा सकता है।

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Q7.7. असम आंदोलन सांस्कृतिक अभिमान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था। व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

उत्तर: असम आंदोलन में असम के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान (भाषा, परंपरा) की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जो सांस्कृतिक अभिमान था। साथ ही, वे आर्थिक रूप से पिछड़े होने और संसाधनों के असमान वितरण के कारण भी असंतुष्ट थे। इसलिए आंदोलन सांस्कृतिक अभिमान और आर्थिक पिछड़ेपन दोनों की अभिव्यक्ति था।

व्याख्या:

असम आंदोलन ने क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास की मांगों को एक साथ उठाया।

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Q8.8. हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता। इस अध्याय से उदाहरण देकर इस तथ्य की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

उत्तर: इस अध्याय में गोवा का उदाहरण दिया गया है जहाँ क्षेत्रीय आंदोलन था लेकिन अलगाववादी नहीं था। गोवा के लोग अपनी पहचान और संस्कृति को बनाए रखना चाहते थे, न कि अलग देश बनाना। इस प्रकार, क्षेत्रीय आंदोलन हमेशा अलगाववादी नहीं होते, बल्कि वे स्वायत्तता या सांस्कृतिक संरक्षण की माँग कर सकते हैं।

व्याख्या:

क्षेत्रीय आंदोलन की प्रकृति विविध होती है, और सभी आंदोलन अलगाववादी नहीं होते।

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