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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Swatantra Bharat Mein Rajniti-II📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

व्याख्या

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

1970 के दशक की शुरुआत में भारतीय लोकतंत्र ने अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना किया। 1967 के बाद राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आए, जिसमें इंदिरा गांधी की लोकप्रियता चरम पर थी, लेकिन दलगत प्रतिस्पर्धा तीव्र और कटु हो गई थी। इस दौरान न्यायपालिका और सरकार के बीच भी तनाव गहरा हुआ। सर्वोच्च न्यायालय ने संसद द्वारा किए गए कई संशोधनों को संविधान के विरुद्ध माना, जिससे सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष बढ़ा। कांग्रेस पार्टी के भीतर भी मतभेद गहरे हुए थे, खासकर इंदिरा गांधी और उनके विरोधियों के बीच। आर्थिक स्थिति भी खराब थी, महंगाई बढ़ रही थी, बेरोजगारी फैल रही थी और कृषि उत्पादन गिर रहा था। इन सब कारणों से जनता में असंतोष बढ़ा और छात्र आंदोलन जैसे विरोध-आंदोलन उभरे। इस पृष्ठभूमि में 1975 में आपातकाल की घोषणा की गई। इस अध्याय में हम आपातकाल के कारण, प्रभाव और परिणामों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

  • 1967 के बाद राजनीतिक परिदृश्य में तीव्र बदलाव और दलगत प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
  • सरकार और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक संघर्ष गहरा हुआ।
  • आर्थिक मंदी, महंगाई और बेरोजगारी ने जनता में असंतोष बढ़ाया।
  • छात्र आंदोलन और मजदूर हड़तालें राजनीतिक संकट को बढ़ावा देने वाली घटनाएँ थीं।
  • 1975 में आपातकाल की घोषणा ने लोकतंत्र को गंभीर संकट में डाल दिया।
  • 📌 लोकतंत्र: जनता के द्वारा चुनी गई सरकार और उसके कार्यों की प्रणाली।
  • 📌 न्यायपालिका: संविधान के अनुसार कानून की व्याख्या और पालन कराने वाली संस्था।
  • 📌 दलगत प्रतिस्पर्धा: राजनीतिक दलों के बीच सत्ता और प्रभाव के लिए संघर्ष।

गुजरात और बिहार के आंदोलन

व्याख्या

गुजरात और बिहार के आंदोलन

1974 में गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलनों ने देश की राजनीति को गहरा प्रभावित किया। गुजरात में छात्रों ने बढ़ती महंगाई, खाद्यान्न की कमी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में विपक्षी दल भी शामिल हो गए, जिससे आंदोलन विकराल रूप धारण कर गया और अंततः गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। विपक्ष ने विधानसभा चुनाव कराने की मांग की, जिसमें कांग्रेस हार गई। बिहार में भी छात्रों ने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मार्च किया। उन्होंने जयप्रकाश नारायण को आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए बुलाया। जेपी ने आंदोलन को अहिंसक और सम्पूर्ण क्रांति का स्वरूप दिया। बिहार सरकार के खिलाफ लगातार घेराव, हड़ताल और बंद का सिलसिला चला, लेकिन सरकार ने इस्तीफा देने से इनकार किया। ये आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल गए और विपक्षी दलों ने जेपी का समर्थन किया। इस प्रकार ये आंदोलन इंदिरा गांधी के नेतृत्व के खिलाफ माने गए।

  • 1974 में गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ थे।
  • गुजरात में आंदोलन के कारण राष्ट्रपति शासन लगा और कांग्रेस हार गई।
  • बिहार में जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन का नेतृत्व किया और सम्पूर्ण क्रांति की मांग की।
  • आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया और विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया।
  • इंदिरा गांधी ने इन आंदोलनों को अपने खिलाफ व्यक्तिगत विरोध माना।
  • 📌 राष्ट्रपति शासन: जब किसी राज्य में सरकार का नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथ में होता है।
  • 📌 सम्पूर्ण क्रांति: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव का व्यापक आंदोलन।
  • 📌 छात्र आंदोलन: छात्रों द्वारा सामाजिक या राजनीतिक मुद्दों पर विरोध।

न्यायपालिका से संघर्ष

व्याख्या

न्यायपालिका से संघर्ष

1970 के दशक में सरकार और न्यायपालिका के बीच गहरा संघर्ष हुआ। संसद ने कई मौलिक अधिकारों में कटौती करने के लिए संविधान में संशोधन किए, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें संविधान के खिलाफ़ माना। खासकर केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने संविधान के मूल ढ

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.अवधारणा : भारत तथा शीत युद्ध भारत ने किस वर्ष सोवियत संघ के साथ मित्रता की संधि पर हस्ताक्षर किए?
A.1970
B.1971
C.1972
D.1975

उत्तर:

1971

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Q2.अवधारणा: भारत तथा शीत युद्ध भारत के NAM प्रयासों की आलोचना-
A.स्पष्ट
B.अप्रकाशित तथा असंगत
C.अस्पष्ट
D.उपरोक्त सभी

उत्तर:

अप्रकाशित तथा असंगत

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Q3.अवधारणा : नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था एल.डी.सी (L.D.C) का पूर्ण रूप क्या है?
A.कम से कम विकसित देश
B.कानूनी रूप से विकसित प्रतिपक्ष
C.कम से कम विकासशील देश
D.कानून का विकास करने वाला देश

उत्तर:

कम से कम विकसित देश

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Q4.अवधारणा : नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था सन 1945-1965 की अवधि में रहे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का नाम बताइए।
A.जोको विडोडो
B.मेघाती सुकर्णोपुत्री
C.सुहार्तो
D.सुकर्णो

उत्तर:

सुकर्णो

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Q5.अवधारणा : द्विध्रुवीयता को चुनौती सम्मिलित देशों के नाम:
A.मिस्र, घाना, भारत, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया
B.चीन, वियतनाम, मोरक्को, ऑस्ट्रिया
C.नेपाल, सऊदीअरब, सूडान, सोमालिया
D.मिस्र, साइप्रस, ट्यूनीशिया, तंजानिया

उत्तर:

मिस्र, घाना, भारत, यूगोस्लाविया, इंडोनेशिया

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Q6.अवधारणा : द्विध्रुवीयता को चुनौती पहला नैम (NAM) शिखर सम्मेलन किस देश में आयोजित किया गया था?
A.बेलग्रेड 1961
B.नई दिल्ली 1962
C.घाना 1961
D.जकार्ता 1962

उत्तर:

बेलग्रेड 1961

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Q7.अवधारणा :शीत युद्ध का अखाड़ा संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ ने एक:दूसरे के साथ सहयोग करने पर क्या फैसला लिया?
A.आर्थिक सहायता
B.हथियारों का स्थिर संतुलन (परमाणु और गैर परमाणु)
C.द्विपक्षीय संबंध
D.उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर:

हथियारों का स्थिर संतुलन (परमाणु और गैर परमाणु)

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Q8.अवधारणा: शीत युद्ध का अखाड़ा शीत युद्ध के दौरान दो कोरियाई देशो के बीच तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता का नाम बताइए।
A.जवाहरलाल नेहरू, भारत
B.क्वामे नक्रमः , घाना
C.सुकर्णो, इंडोनेशिया
D.गमाल अब्देल नासिर, मिस्र

उत्तर:

जवाहरलाल नेहरू, भारत

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