Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
एक दल के प्रभुत्व का दौर
व्याख्याएक दल के प्रभुत्व का दौर
स्वतंत्र भारत का जन्म अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच हुआ। राष्ट्र-निर्माण की चुनौती के बाद लोकतंत्र स्थापित करना भी एक बड़ी चुनौती थी। कई अन्य देशों के नेताओं ने राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देते हुए लोकतंत्र अपनाने में देरी की, क्योंकि वे मानते थे कि लोकतंत्र मतभेद और संघर्ष को बढ़ावा देगा। कई उपनिवेश से आजाद हुए देशों में इसी कारण अलोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था कायम हुई। भारत के नेताओं ने इसके विपरीत लोकतंत्र को अपनाने का कठिन रास्ता चुना। उन्होंने राजनीति को समस्या नहीं, बल्कि समस्या के समाधान का उपाय माना। संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और इसके तहत लोकतांत्रिक शासन स्थापित करने के लिए चुनाव आयोग का गठन किया गया। भारत के आकार, जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक विविधता को देखते हुए पहला आम चुनाव कराना एक विशाल और चुनौतीपूर्ण कार्य था। मतदाता सूची बनाना, मतदान के लिए उपयुक्त व्यवस्था करना, और चुनाव कर्मियों को प्रशिक्षित करना बड़ी चुनौतियाँ थीं। इस चुनाव में लगभग 17 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से केवल 15% साक्षर थे। इस कारण मतदान की प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाना आवश्यक था। इस कठिन परिस्थिति में भी भारत ने 1951-52 में पहला आम चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराया, जो विश्व के लोकतंत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
- स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी।
- कई देशों ने राष्ट्रीय एकता के लिए लोकतंत्र अपनाने में देरी की।
- भारत ने लोकतंत्र को अपनाने का कठिन रास्ता चुना।
- संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और चुनाव आयोग का गठन हुआ।
- पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ, जिसमें 17 करोड़ मतदाता थे।
- मतदान की प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
- 📌 लोकतंत्र: जनता द्वारा शासन की व्यवस्था।
- 📌 चुनाव आयोग: स्वतंत्र संस्था जो चुनावों का आयोजन करती है।
- 📌 मतदाता सूची: चुनाव में वोट देने वाले लोगों की सूची।
मतदान के बदलते तरीके
व्याख्यामतदान के बदलते तरीके
भारत के पहले आम चुनाव में मतदान की प्रक्रिया बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण थी। प्रत्येक मतदान केंद्र में हर उम्मीदवार के लिए एक मतपेटी रखी जाती थी, जिस पर उम्मीदवार का चुनाव-चिह्न अंकित होता था। मतदाता को एक खाली मतपत्र दिया जाता था, जिसे वह अपनी पसंद के उम्मीदवार की मतपेटी में डालता था। इस व्यवस्था के लिए लगभग 20 लाख स्टील के बक्सों का इस्तेमाल हुआ। मतपेटियों पर उम्मीदवार के नाम हिंदी, उर्दू और स्थानीय भाषा में लिखे जाते थे। इस प्रक्रिया में मतपेटी को चुनाव-चिह्न अंकित करने के लिए पहले रगड़ना पड़ता था। यह कार्य चुनाव की पूर्व संध्या पर पूरा किया जाता था। बाद में इस पद्धति को बदलकर मतपत्र पर ही उम्मीदवारों के नाम और चुनाव-चिह्न अंकित करने का तरीका अपनाया गया। मतदाता को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगानी होती थी। यह तरीका लगभग 40 वर्षों तक चलता रहा। 1990 के दशक के अंत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग शुरू हुआ, जिससे मतदान प्रक्रिया और भी सरल, तेज और सुरक्षित हो गई। 2004 तक पूरे देश में ईवीएम का इस्तेमाल आम हो गया।
- पहले आम चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी रखी जाती थी।
- मतदाता को खाली मतपत्र दिया जाता था, जिसे वह मतपेटी में डालता था।
- मतपेटी पर चुनाव-चिह्न और उम्मीदवार के नाम हिंदी, उर्दू और स्थानीय भाषा में होते थे।
- बाद में मतपत्र पर उम्मीदवार के नाम और चिह्न अंकित करने का तरीका अपनाया गया।
- 1990 के दशक के अंत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग शुरू हुआ।
- ईवीएम ने मतदान प्रक्रिया को तेज, सरल और सुरक्षित बनाया।
- 📌 मतपेटी: उम्मीदवार के चुनाव-चिह्न वाली पेटी।
- 📌 मतपत्र: मतदान के लिए दिया जाने वाला कागज।
- 📌 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम): इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो मतदान को सरल बनाता है।
पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व
व्याख्यापहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व
पहले आम चुनाव (1951-52) के नतीजे कांग्रेस पार्टी के भारी प्रभुत्व को दर्शाते हैं। कांग्रेस को 489 लोकसभा सीटों में से 364 सीटें मिलीं, जो कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी से बहुत आगे थी। कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत प्राप्त थी और यह देश में
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. सही विकल्प को चुनकर खाली जगह को भरें: (क) 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ के लिए भी चुनाव कराए गए थे। (भारत के राष्ट्रपति पद/राज्य विधानसभा/राज्यसभा/प्रधानमंत्री) (ख) लोकसभा के पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही। (प्रजा सोशलिस्ट पार्टी/भारतीय जनसंघ/भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/भारतीय जनता पार्टी) (ग) स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धांत था। (कामगार तबके का हित/रियासतों को बचाव/राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था/संघ के भीतर राज्यों की स्वायत्तता)
उत्तर:
(क) राज्य विधानसभा 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभा के लिए भी चुनाव कराए गए थे। (ख) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी लोकसभा के पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर रही। (ग) राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धांत था राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था।
व्याख्या:
1952 के पहले आम चुनाव में भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभा दोनों के चुनाव हुए थे। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही। स्वतंत्र पार्टी ने राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था को अपना निर्देशक सिद्धांत माना था।
Q2.2. यहाँ दो सूचियाँ दी गई हैं। पहले में नेताओं के नाम दर्ज हैं और दूसरे में दलों के। दोनों सूचियों में मेल बैठाएँ: (क) एस.ए. डांगे (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी (ग) मीनू मसानी (घ) अशोक मेहता (i) भारतीय जनसंघ (ii) स्वतंत्र पार्टी (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
उत्तर:
मेल: (क) एस.ए. डांगे - (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी - (i) भारतीय जनसंघ (ग) मीनू मसानी - (ii) स्वतंत्र पार्टी (घ) अशोक मेहता - (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
व्याख्या:
एस.ए. डांगे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। मीनू मसानी स्वतंत्र पार्टी से सम्बंधित थीं। अशोक मेहता प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे।
Q3.3. एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ चार बयान लिखे गए हैं। प्रत्येक के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ: (क) विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनीतिक दल का अभाव एकल पार्टी-प्रभुत्व का कारण था। (ख) जनमत की कमजोरी के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व कायम हुआ। (ग) एकल पार्टी-प्रभुत्व का संबंध राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत से है। (घ) एकल पार्टी-प्रभुत्व से देश में लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।
उत्तर:
(क) सही (ख) गलत (ग) सही (घ) गलत
व्याख्या:
विस्तार से: (क) विकल्प के रूप में मजबूत दल का अभाव एकल पार्टी-प्रभुत्व का कारण था, इसलिए यह सही है। (ख) जनमत की कमजोरी नहीं बल्कि विकल्पों की कमी के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व बना, इसलिए यह गलत है। (ग) एकल पार्टी-प्रभुत्व का संबंध राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत से है, यह सही है क्योंकि औपनिवेशिक काल में राजनीतिक विकल्प सीमित थे। (घ) एकल पार्टी-प्रभुत्व से लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव की झलक नहीं मिलती, बल्कि यह लोकतंत्र के विकास का एक चरण हो सकता है, इसलिए यह गलत है।
Q4.4. भारत का एक राजनीतिक नक्शा लीजिए (जिसमें राज्यों की सीमाएँ दिखाई गई हों) और उसमें निम्नलिखित को चिह्नित कीजिए: (क) ऐसे दो राज्य जहाँ 1952-67 के दौरान कांग्रेस सत्ता में नहीं थी। (ख) दो ऐसे राज्य जहाँ इस पूरी अवधि में कांग्रेस सत्ता में रही।
उत्तर:
उत्तर: (क) 1952-67 के दौरान कांग्रेस सत्ता में नहीं थी: पंजाब और मद्रास (अब तमिलनाडु के कुछ हिस्से) (ख) इस पूरी अवधि में कांग्रेस सत्ता में रही: उत्तर प्रदेश और बिहार व्याख्या: 1952 से 1967 तक कांग्रेस पार्टी अधिकांश राज्यों में सत्ता में थी, लेकिन कुछ राज्यों जैसे पंजाब और मद्रास में अन्य दलों का प्रभाव था। इसलिए नक्शे पर इन्हें चिन्हित करना आवश्यक है।
व्याख्या:
1952-67 के दौरान कांग्रेस का प्रभुत्व अधिकांश राज्यों में था, किन्तु कुछ राज्यों में विपक्षी दलों ने सत्ता हासिल की। राजनीतिक नक्शे पर राज्यों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त राज्यों को चिन्हित करना होगा।
Q5.5. निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: कांग्रेस के संगठनकर्ता पटेल कांग्रेस को दूसरे राजनीतिक समूह से निसंग रखकर उसे एक सर्वांगसम तथा अनुशासित राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि कांग्रेस सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव छोड़े और अनुशासित कॉडर से युक्त एक संगुफ़ित पार्टी के रूप में उभरे। ‘यथार्थवादी’ होने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुशासन को ज्यादा तरजीह देते थे। अगर “आंदोलन को चलाते चले जाने” के बारे में गाँधी के ख्याल हद से ज्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित तथा धुरंधर राजनीतिक पार्टी के रूप में बदलने की पटेल की धारणा भी उसी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चूक गई जिसे कांग्रेस को आने वाले दशकों में निभाना था। – रजनी कोठारी (क) लेखक क्यों सोच रहा है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए? (ख) शुरुआती सालों में कांग्रेस द्वारा निभाई गई समन्वयवादी भूमिका के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(क) लेखक का मानना है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए क्योंकि कांग्रेस की समन्वयवादी भूमिका में विभिन्न समूहों, वर्गों और विचारधाराओं को समेटने की क्षमता थी। यदि कांग्रेस केवल एक अनुशासित और एक विचारधारा वाली पार्टी बन जाती, तो वह विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हितों को समेटने में असफल हो सकती थी, जो आने वाले दशकों में देश की राजनीति के लिए आवश्यक था। (ख) शुरुआती सालों में कांग्रेस ने विभिन्न सामाजिक समूहों और विचारधाराओं को एक साथ जोड़ा। उदाहरण के लिए, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस ने विभिन्न जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समूहों को एकजुट किया। इसके अलावा, अंतरिम सरकार में डॉ. अंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे विपक्षी नेताओं को शामिल करना भी समन्वयवादी भूमिका का उदाहरण है।
व्याख्या:
लेखक रजनी कोठारी के अनुसार कांग्रेस की समन्वयवादी भूमिका ने उसे व्यापक सामाजिक आधार दिया। पटेल की अनुशासित पार्टी बनाने की सोच उस व्यापकता को सीमित कर सकती थी। इसलिए कांग्रेस की समावेशी भूमिका महत्वपूर्ण थी।
Q6.खुद करें–खुद समझें 1952 के बाद से अब तक आपके राज्य में जितने चुनाव हुए और सरकारें बनी हैं, उनका एक चार्ट तैयार करें। इस चार्ट में निम्नलिखित शीर्षक रखे जा सकते हैं। चुनाव का वर्ष, जीतने वाले दल का नाम, शासक दल/दलों के नाम, मुख्यमंत्री का नाम...
उत्तर:
यह एक व्यावहारिक गतिविधि है जिसमें विद्यार्थी को अपने राज्य के चुनावों और सरकारों का चार्ट बनाना है। इसमें चुनाव वर्ष, जीतने वाले दल, शासक दल/दल और मुख्यमंत्री के नाम शामिल होंगे। उदाहरण स्वरूप: | चुनाव वर्ष | जीतने वाला दल | शासक दल/दल | मुख्यमंत्री | |------------|----------------|--------------|-------------| | 1952 | कांग्रेस | कांग्रेस | नाम | | 1957 | कांग्रेस | कांग्रेस | नाम | | ... | ... | ... | ... | इससे विद्यार्थी को अपने राज्य की राजनीतिक स्थिति का ज्ञान होगा।
व्याख्या:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को उनके राज्य की राजनीतिक इतिहास को समझने और व्यवस्थित करने के लिए प्रेरित करता है। इससे वे चुनावों और सरकारों के बारे में जानकारी इकट्ठा करते हैं और राजनीतिक विकास को समझते हैं।
Q7.स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र स्थापित करने की सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
उत्तर:
एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव-प्रणाली स्थापित करना
व्याख्या:
स्वतंत्र भारत के सामने लोकतंत्र स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि देश की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति कमजोर थी। लोकतांत्रिक चुनाव-प्रणाली की स्थापना के बिना लोकतंत्र संभव नहीं था।
Q8.भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
उत्तर:
सुकुमार सेन
व्याख्या:
जनवरी 1950 में भारत के चुनाव आयोग का गठन हुआ और सुकुमार सेन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए।
Swatantra Bharat Mein Rajniti-II के सभी 8 अध्याय
Political Science · Class 12