Ch 6निःशुल्क

Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Corporate Accounting (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 5अध्याय 7 / 19Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 प्रस्तावना

व्याख्या

6.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में 'अंश का हरण' अध्याय की प्रस्तावना दी गई है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि जब कोई कंपनी अपने द्वारा जारी किए गए अंशों (Shares) को वापस लेती है या रद्द करती है, तो उसे अंश का हरण (Redemption of Shares) कहा जाता है। यह प्रक्रिया कंपनियों के वित्तीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि इससे कंपनी की पूंजी संरचना में परिवर्तन आता है। प्रस्तावना में यह भी बताया गया है कि अंश का हरण भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत ही किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के लिए कंपनी को कुछ विशेष शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है, जैसे कि अंशों का पूर्ण भुगतान, हरण के लिए अधिकृत पूंजी, और पर्याप्त लाभांश या आरक्षित निधि का होना। प्रस्तावना में अंश का हरण क्यों किया जाता है, इसके कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है, जैसे कि पूंजी संरचना का पुनर्गठन, अंशधारकों को लाभ पहुँचाना, और कंपनी की साख बढ़ाना।

  • अंश का हरण का अर्थ: कंपनी द्वारा जारी अंशों की वापसी या रद्दीकरण।
  • यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत होती है।
  • अंश का हरण पूंजी संरचना को प्रभावित करता है।
  • इसके लिए कंपनी को विशेष शर्तें पूरी करनी होती हैं।
  • अंश का हरण कंपनी की साख और वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है।
  • 📌 अंश (Share): कंपनी की पूंजी का एक हिस्सा।
  • 📌 अंश का हरण (Redemption of Shares): कंपनी द्वारा जारी अंशों की वापसी।

6.2 अंश का हरण: अर्थ एवं आवश्यकता

अवधारणा

6.2 अंश का हरण: अर्थ एवं आवश्यकता

इस अनुभाग में अंश का हरण का अर्थ और इसकी आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई है। अंश का हरण का तात्पर्य है, कंपनी द्वारा अपने जारी किए गए अंशों को पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार वापस लेना या रद्द करना। यह मुख्यतः वरीयता अंशों (Preference Shares) के संदर्भ में किया जाता है, क्योंकि कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार केवल वरीयता अंश ही हरण किए जा सकते हैं। अंश का हरण कंपनी के लिए क्यों आवश्यक होता है, इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि पूंजी संरचना का पुनर्गठन, अंशधारकों को आकर्षित करना, कंपनी की साख बढ़ाना, और भविष्य में वित्तीय लचीलापन प्राप्त करना। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में वरीयता अंशों का हरण अनिवार्य भी हो जाता है।

  • अंश का हरण का अर्थ है कंपनी द्वारा अंशों की वापसी।
  • यह मुख्यतः वरीयता अंशों के लिए लागू होता है।
  • अंश का हरण पूंजी संरचना के पुनर्गठन के लिए आवश्यक है।
  • यह कंपनी की साख और निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।
  • कंपनी अधिनियम, 2013 में हरण के लिए विशेष प्रावधान हैं।
  • 📌 वरीयता अंश (Preference Share): ऐसे अंश जिनके धारकों को लाभांश एवं पूंजी वापसी में प्राथमिकता होती है।
  • 📌 अंश का हरण (Redemption of Shares): कंपनी द्वारा अंशों की पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार वापसी।

6.3 अंश का हरण के लिए शर्तें

परिभाषा

6.3 अंश का हरण के लिए शर्तें

इस अनुभाग में अंश का हरण करने के लिए आवश्यक शर्तों का उल्लेख किया गया है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 55 के अनुसार, वरीयता अंशों का हरण निम्नलिखित शर्तों के अंतर्गत ही किया जा सकता है: (1) अंशों का पूर्ण भुगतान होना चाहिए, अर्थात् जिन अंशों का हरण कि