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Chapter 11

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Corporate Accounting (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 10अध्याय 12 / 19Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

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11.1 अभिगोपन का अर्थ

परिभाषा

11.1 अभिगोपन का अर्थ

अभिगोपन (Amalgamation) का अर्थ दो या दो से अधिक कंपनियों के एकीकृत होकर एक नई कंपनी के रूप में अस्तित्व में आना है। इसमें सभी सम्मिलित कंपनियों की परिसंपत्तियाँ (assets) और दायित्व (liabilities) एक नई कंपनी को हस्तांतरित कर दिए जाते हैं। अभिगोपन का मुख्य उद्देश्य व्यापार का विस्तार, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि, लागत में कमी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना होता है। यह प्रक्रिया कंपनियों के बीच समझौते के माध्यम से होती है और इसमें सभी संबंधित पक्षों की सहमति आवश्यक होती है। अभिगोपन के अंतर्गत, सम्मिलित कंपनियाँ अपना स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त कर देती हैं और एक नई कंपनी का गठन होता है।

  • अभिगोपन में दो या दो से अधिक कंपनियाँ मिलकर एक नई कंपनी बनाती हैं।
  • सभी परिसंपत्तियाँ और दायित्व नई कंपनी को हस्तांतरित हो जाते हैं।
  • पुरानी कंपनियों का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
  • अभिगोपन व्यापार विस्तार, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और लागत में कमी के लिए किया जाता है।
  • यह प्रक्रिया कंपनियों के बीच समझौते द्वारा होती है।
  • सभी संबंधित पक्षों की सहमति आवश्यक होती है।
  • 📌 अभिगोपन: दो या दो से अधिक कंपनियों का मिलकर एक नई कंपनी बनाना।
  • 📌 परिसंपत्ति: कंपनी के पास उपलब्ध संपत्ति।
  • 📌 दायित्व: कंपनी के ऊपर बकाया ऋण या देनदारियाँ।

11.2 अभिगोपन के प्रकार

अवधारणा

11.2 अभिगोपन के प्रकार

अभिगोपन के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं: (1) स्वार्थपूर्ण अभिगोपन (Merger) और (2) खरीद अभिगोपन (Purchase)। स्वार्थपूर्ण अभिगोपन में सम्मिलित कंपनियों के शेयरधारकों को नई कंपनी के शेयर उनके पुराने अनुपात में दिए जाते हैं और कंपनियों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। वहीं, खरीद अभिगोपन में एक कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करती है और संपत्ति एवं दायित्वों का मूल्यांकन बाजार मूल्य पर होता है। दोनों प्रकार की प्रक्रियाओं में कानूनी और लेखांकन दृष्टि से अंतर होता है।

  • अभिगोपन के दो प्रकार: स्वार्थपूर्ण (Merger) और खरीद (Purchase)।
  • स्वार्थपूर्ण अभिगोपन में शेयरधारकों को नए शेयर पुराने अनुपात में मिलते हैं।
  • खरीद अभिगोपन में एक कंपनी दूसरी का अधिग्रहण करती है।
  • स्वार्थपूर्ण अभिगोपन में कंपनियों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
  • खरीद अभिगोपन में संपत्ति और दायित्व बाजार मूल्य पर हस्तांतरित होते हैं।
  • दोनों प्रक्रियाओं में लेखांकन और कानूनी दृष्टि से भिन्नता होती है।
  • 📌 स्वार्थपूर्ण अभिगोपन: सम्मिलित कंपनियों के शेयरधारकों को नए शेयर पुराने अनुपात में मिलते हैं।
  • 📌 खरीद अभिगोपन: एक कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करती है।

11.3 अभिगोपन के लेखांकन उपचार

व्याख्या

11.3 अभिगोपन के लेखांकन उपचार

अभिगोपन के लेखांकन उपचार में सम्मिलित कंपनियों की संपत्ति, दायित्व, आरक्षित निधियाँ, और पूंजी खातों का समुचित लेखांकन किया जाता है। स्वार्थपूर्ण अभिगोपन में सभी संपत्तियाँ और दायित्व उनकी पुस्तक मूल्य पर नई कंपनी को हस्तांतरित होते हैं, जबकि खरीद अभि