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Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 16Chapter 6

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

5.1 व्यापारिक बैंकिंग की अवधारणा

अवधारणा

5.1 व्यापारिक बैंकिंग की अवधारणा

व्यापारिक बैंकिंग का तात्पर्य उन बैंकों से है, जो सामान्य जनता से धन जमा करते हैं और उसे ऋण के रूप में व्यापार, वाणिज्य, कृषि तथा उद्योगों को प्रदान करते हैं। ये बैंक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यापारिक बैंकिंग की अवधारणा के अंतर्गत बैंकिंग के मूल कार्य, बैंकिंग प्रणाली की संरचना, और बैंकिंग के विविध पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। व्यापारिक बैंक मुख्यतः लाभ कमाने के उद्देश्य से कार्य करते हैं, लेकिन वे आर्थिक स्थिरता और विकास में भी योगदान करते हैं। व्यापारिक बैंकिंग की परिभाषा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में दी गई है। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5(1)(b) के अनुसार, 'बैंकिंग' का अर्थ है—सार्वजनिक से धन जमा करना, जिसे चेक, ड्राफ्ट, आदेश या अन्य साधनों द्वारा निकाला जा सकता है, और उसे ऋण के रूप में देना या निवेश करना।

  • व्यापारिक बैंकिंग का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना और आर्थिक विकास में योगदान देना है।
  • बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अनुसार बैंकिंग की स्पष्ट परिभाषा है।
  • व्यापारिक बैंक जनता से जमा स्वीकार करते हैं और ऋण प्रदान करते हैं।
  • ये बैंक मुद्रा सृजन, भुगतान प्रणाली और वित्तीय स्थिरता में सहायक हैं।
  • व्यापारिक बैंकिंग प्रणाली अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
  • 📌 बैंकिंग: जनता से जमा स्वीकार करना और ऋण देना।
  • 📌 व्यापारिक बैंक: ऐसे बैंक जो व्यापार, वाणिज्य, कृषि, उद्योग को वित्तीय सेवाएँ प्रदान करते हैं।

5.2 व्यापारिक बैंकों के प्रकार

व्याख्या

5.2 व्यापारिक बैंकों के प्रकार

व्यापारिक बैंकों को उनकी संरचना और कार्यों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। भारत में व्यापारिक बैंकों के मुख्य प्रकार हैं: (1) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, (2) निजी क्षेत्र के बैंक, (3) विदेशी बैंक, (4) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks - RRBs), (5) सहकारी बैंक। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वे हैं, जिनमें सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी होती है, जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक। निजी क्षेत्र के बैंक वे हैं, जिनमें निजी स्वामित्व होता है, जैसे ICICI बैंक, HDFC बैंक। विदेशी बैंक वे हैं, जिनका मुख्यालय विदेश में स्थित है, जैसे सिटी बैंक, HSBC। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए कार्य करते हैं। सहकारी बैंक सहकारी सिद्धांतों पर आधारित होते हैं और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कार्य करते हैं।

  • व्यापारिक बैंकों के पाँच प्रमुख प्रकार होते हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकार द्वारा नियंत्रित होते हैं।
  • निजी क्षेत्र के बैंक निजी स्वामित्व में होते हैं।
  • विदेशी बैंक भारत में विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित होते हैं।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण विकास के लिए कार्य करते हैं।
  • सहकारी बैंक सहकारी सिद्धांतों पर आधारित होते हैं।
  • 📌 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक: सरकार के स्वामित्व वाले बैंक।
  • 📌 निजी क्षेत्र के बैंक: निजी स्वामित्व वाले बैंक।
  • 📌 विदेशी बैंक: विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित बैंक।

5.3 व्यापारिक बैंकों के कार्य

व्याख्या

5.3 व्यापारिक बैंकों के कार्य

व्यापारिक बैंकों के कार्यों को दो भागों में बाँटा जा सकता है: (1) प्राथमिक कार्य, (2) द्वितीयक कार्य। प्राथमिक कार्यों में जमा स्वीकार करना (जैसे बचत खाता, चालू खाता, सावधि जमा) और ऋण देना (जैसे नकद ऋण, ओवरड्राफ्ट, बिलों की छूट) शामिल हैं। द्वितीयक क