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Chapter 12

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Money, Banking & Public Finance (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 11अध्याय 11 / 16Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

12.1 सार्वजनिक वित्त का अर्थ

परिभाषा

12.1 सार्वजनिक वित्त का अर्थ

सार्वजनिक वित्त (Public Finance) वह आर्थिक शाखा है, जिसमें राज्य या सरकार की आय, व्यय, ऋण तथा वित्तीय प्रशासन का अध्ययन किया जाता है। यह विषय सरकार के आर्थिक कार्यों, संसाधनों के संग्रहण, उनके वितरण एवं व्यय के प्रभावों का विश्लेषण करता है। सार्वजनिक वित्त का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण की वृद्धि, आर्थिक असमानता को कम करना, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण तथा आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। सार्वजनिक वित्त के अंतर्गत सरकार द्वारा कर, गैर-कर राजस्व, सार्वजनिक ऋण, सार्वजनिक व्यय, बजट, वित्तीय प्रशासन आदि का अध्ययन किया जाता है। यह विषय आर्थिक नीति निर्माण में सहायक होता है और समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

  • सार्वजनिक वित्त सरकार की आय, व्यय, ऋण एवं वित्तीय प्रशासन का अध्ययन करता है।
  • यह सामाजिक कल्याण, आर्थिक स्थिरता एवं न्यायपूर्ण वितरण पर केंद्रित है।
  • सार्वजनिक वित्त में कर, गैर-कर राजस्व, सार्वजनिक ऋण, बजट आदि शामिल हैं।
  • यह आर्थिक नीति निर्माण में सहायक होता है।
  • सार्वजनिक वित्त का अध्ययन आर्थिक असमानता को कम करने में सहायक है।
  • 📌 सार्वजनिक वित्त: सरकार की आय, व्यय, ऋण एवं वित्तीय प्रशासन का अध्ययन।
  • 📌 राजस्व: सरकार की आय के स्रोत।
  • 📌 व्यय: सरकार द्वारा किए गए खर्च।

12.2 सार्वजनिक वित्त के स्वरूप

अवधारणा

12.2 सार्वजनिक वित्त के स्वरूप

सार्वजनिक वित्त का स्वरूप समय, स्थान एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। प्रारंभ में सरकार का कार्य केवल रक्षा, न्याय एवं कानून व्यवस्था तक सीमित था, किंतु आधुनिक युग में सरकार की भूमिका व्यापक हो गई है। अब सरकार आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति, आय का पुनर्वितरण, आर्थिक स्थिरता आदि कार्यों में भी सक्रिय है। सार्वजनिक वित्त का स्वरूप मुख्यतः निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता है: (1) कराधान (Taxation), (2) सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure), (3) सार्वजनिक ऋण (Public Debt), (4) वित्तीय प्रशासन (Financial Administration)। प्रत्येक स्वरूप का समाज एवं अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

  • सार्वजनिक वित्त का स्वरूप समय व परिस्थितियों के अनुसार बदलता है।
  • आधुनिक युग में सरकार की भूमिका आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण तक विस्तृत है।
  • मुख्य स्वरूप: कराधान, सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक ऋण, वित्तीय प्रशासन।
  • प्रत्येक स्वरूप समाज व अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
  • सार्वजनिक वित्त का स्वरूप सरकार की नीतियों पर निर्भर करता है।
  • 📌 कराधान: सरकार द्वारा नागरिकों से कर के रूप में धन संग्रह।
  • 📌 सार्वजनिक व्यय: सरकार द्वारा सामाजिक व आर्थिक कार्यों पर किया गया खर्च।
  • 📌 सार्वजनिक ऋण: सरकार द्वारा आंतरिक या बाह्य स्रोतों से लिया गया ऋण।

12.3 सार्वजनिक वित्त के कार्य

व्याख्या

12.3 सार्वजनिक वित्त के कार्य

सार्वजनिक वित्त के मुख्य कार्य तीन प्रकार के होते हैं: (1) संसाधनों का संग्रह (Resource Allocation), (2) आय का पुनर्वितरण (Redistribution of Income), (3) आर्थिक स्थिरता (Economic Stability)। संसाधनों के संग्रह के अंतर्गत सरकार समाज की आवश्यकताओं के अ