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Chapter 20

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1200-1740 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 19अध्याय 20 / 20

Chapter 20अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस खंड में भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन की पृष्ठभूमि, कारण और ऐतिहासिक महत्त्व का परिचय दिया गया है। 15वीं शताब्दी के अंत और 16वीं शताब्दी की शुरुआत में यूरोपीय देशों ने समुद्री मार्ग से भारत आने के प्रयास तेज किए। इसका मुख्य कारण पूर्वी देशों के साथ व्यापार करना था, विशेषकर मसालों, रेशम, कपड़े और अन्य कीमती वस्तुओं के लिए। यूरोप में औद्योगिक क्रांति और व्यापारिक पूंजीवाद के विकास ने नए बाजारों और कच्चे माल की आवश्यकता को बढ़ाया। इसके अलावा, ओटोमन साम्राज्य द्वारा पारंपरिक थल मार्गों के अवरुद्ध होने के कारण यूरोपीय देशों को समुद्री मार्ग की तलाश करनी पड़ी। पुर्तगाल, हॉलैंड, इंग्लैंड और फ्रांस ने क्रमशः भारत में अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किए। इन शक्तियों के आगमन ने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में गहरा प्रभाव डाला।

  • यूरोपीय शक्तियों के भारत आगमन का मुख्य कारण व्यापार था।
  • समुद्री मार्ग की खोज ने भारत-यूरोप व्यापार को नया आयाम दिया।
  • पुर्तगाल, हॉलैंड, इंग्लैंड और फ्रांस प्रमुख यूरोपीय शक्तियाँ थीं।
  • ओटोमन साम्राज्य द्वारा थल मार्ग अवरुद्ध होने के कारण समुद्री मार्ग की आवश्यकता पड़ी।
  • यूरोपीय आगमन से भारत के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे में बदलाव आए।
  • 📌 यूरोपीय शक्तियाँ: वे राष्ट्र जिन्होंने 15वीं-17वीं शताब्दी में भारत में व्यापारिक और राजनीतिक गतिविधियाँ शुरू कीं।
  • 📌 समुद्री मार्ग: समुद्र के रास्ते एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने का मार्ग।

पुर्तगालियों का भारत में आगमन

व्याख्या

पुर्तगालियों का भारत में आगमन

पुर्तगाल यूरोप का पहला देश था जिसने भारत आने के लिए समुद्री मार्ग की खोज की। 1498 ई. में वास्को-दा-गामा ने कालीकट (कोझिकोड) के तट पर पहुँचकर भारत-यूरोप समुद्री मार्ग की नींव रखी। पुर्तगालियों ने शीघ्र ही गोवा, दीव, दमन, और होगली जैसे स्थानों पर अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किए। अल्मीडा, अल्बुकर्क, और अन्य पुर्तगाली गवर्नरों ने भारत में पुर्तगाली शक्ति को मजबूत किया। उन्होंने न केवल व्यापारिक बल्कि राजनीतिक और धार्मिक विस्तार का भी प्रयास किया। पुर्तगालियों ने समुद्री शक्ति के बल पर अन्य यूरोपीय शक्तियों को चुनौती दी। वे मसालों के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे। पुर्तगालियों ने स्थानीय शासकों के साथ संघर्ष भी किए और कई बार विजय प्राप्त की। गोवा को 1510 में अल्बुकर्क ने जीता और इसे पुर्तगाली भारत की राजधानी बनाया।

  • वास्को-दा-गामा 1498 में भारत पहुँचे।
  • गोवा, दीव, दमन पुर्तगालियों के प्रमुख केंद्र बने।
  • अल्मीडा और अल्बुकर्क ने पुर्तगाली शक्ति को मजबूत किया।
  • पुर्तगालियों ने मसालों के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित किया।
  • स्थानीय शासकों के साथ संघर्ष हुए।
  • 📌 वास्को-दा-गामा: पुर्तगाली नाविक, जिन्होंने भारत का समुद्री मार्ग खोजा।
  • 📌 अल्बुकर्क: पुर्तगाली गवर्नर, जिसने गोवा पर अधिकार किया।

डच (हॉलैंड) का भारत में प्रवेश

व्याख्या

डच (हॉलैंड) का भारत में प्रवेश

डच, अर्थात् हॉलैंड (नीदरलैंड) के व्यापारी, 17वीं शताब्दी की शुरुआत में भारत पहुँचे। 1602 में डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई। डचों ने मुख्य रूप से मसालों के व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया और उन्होंने भारत के तटीय क्षेत्रों में व्यापारिक केंद्र स्