Ch 15निःशुल्क

Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (1200-1740 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 20Chapter 16

Chapter 15अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

15.1 औरंगजेब का दक्खन अभियान

व्याख्या

15.1 औरंगजेब का दक्खन अभियान

औरंगजेब का दक्खन अभियान मुगल साम्राज्य के विस्तार और उसके पतन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 1658 में सत्ता संभालने के बाद औरंगजेब ने दक्खन के राज्यों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए कई अभियान चलाए। दक्खन में मुख्यतः बीजापुर, गोलकुंडा, और मराठा शक्ति प्रमुख थीं। औरंगजेब ने बीजापुर और गोलकुंडा को मुगल साम्राज्य में मिलाने के लिए सैन्य अभियान चलाए, जिससे इन राज्यों का अंत हुआ। मराठों के विरुद्ध औरंगजेब ने दीर्घकालीन संघर्ष किया, जिसमें शिवाजी और बाद में उनके उत्तराधिकारी संभाजी, राजाराम, और ताराबाई ने मुगलों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा। दक्खन अभियान के दौरान औरंगजेब ने लगभग 27 वर्षों तक दक्षिण भारत में रहकर युद्धों का संचालन किया। इस अभियान ने मुगल प्रशासन और सेना पर भारी दबाव डाला, जिससे आर्थिक और प्रशासनिक संकट उत्पन्न हुआ।

  • औरंगजेब ने दक्खन के बीजापुर और गोलकुंडा को मुगल साम्राज्य में मिलाया।
  • मराठों के विरुद्ध दीर्घकालीन संघर्ष हुआ, जिसमें शिवाजी प्रमुख थे।
  • 27 वर्षों तक औरंगजेब ने दक्खन में अभियान चलाया।
  • दक्खन अभियान से मुगल प्रशासन और सेना पर भारी दबाव पड़ा।
  • आर्थिक संकट और प्रशासनिक विफलता उत्पन्न हुई।
  • दक्खन अभियान मुगल साम्राज्य के पतन का कारण बना।
  • 📌 दक्खन अभियान: दक्षिण भारत के राज्यों पर मुगल नियंत्रण स्थापित करने हेतु औरंगजेब द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान।
  • 📌 मराठा शक्ति: शिवाजी द्वारा स्थापित स्वतंत्र राज्य, जो मुगलों के विरुद्ध संघर्षरत था।

15.2 दक्खन नीति और उसकी समस्याएँ

व्याख्या

15.2 दक्खन नीति और उसकी समस्याएँ

औरंगजेब की दक्खन नीति मुख्यतः दक्षिण के राज्यों को मुगल साम्राज्य में मिलाने और मराठों को नियंत्रित करने पर केंद्रित थी। बीजापुर और गोलकुंडा को जीतने के बाद औरंगजेब ने मराठों के विरुद्ध कठोर नीति अपनाई। उसने मराठा सरदारों पर भारी कर लगाया और उनके किलों को कब्जे में लेने का प्रयास किया। लेकिन मराठा गुरिल्ला युद्ध नीति के कारण मुगलों को सफलता नहीं मिली। दक्खन अभियान के दौरान प्रशासनिक समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जैसे - सेना का अत्यधिक विस्तार, आर्थिक संकट, और स्थानीय जनता में असंतोष। औरंगजेब की नीति में धार्मिक कट्टरता भी थी, जिससे हिंदू सरदारों और जनता में असंतोष बढ़ा। दक्खन में मुगलों की सत्ता अस्थायी रही, क्योंकि मराठों ने पुनः शक्ति प्राप्त कर ली।

  • औरंगजेब ने दक्खन में कठोर नीति अपनाई।
  • मराठा गुरिल्ला युद्ध नीति ने मुगलों को परेशान किया।
  • प्रशासनिक और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
  • धार्मिक कट्टरता के कारण असंतोष बढ़ा।
  • मुगल सत्ता दक्खन में अस्थायी रही।
  • मराठों ने पुनः शक्ति प्राप्त कर ली।
  • 📌 गुरिल्ला युद्ध: छापामार युद्ध, जिसमें छोटे दल अचानक आक्रमण कर वापस लौट जाते हैं।
  • 📌 जज़िया: गैर-मुस्लिमों पर लगाया गया विशेष कर।

15.3 मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना में परिवर्तन

व्याख्या

15.3 मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना में परिवर्तन

दक्खन अभियान के दौरान मुगल प्रशासनिक संरचना में कई परिवर्तन हुए। औरंगजेब ने दक्खन में नए सूबों का गठन किया और वहाँ के प्रशासन को दिल्ली से नियंत्रित करने का प्रयास किया। सेना का विस्तार हुआ, जिससे राजस्व व्यवस्था पर दबाव बढ़ा। जागीरदारों की संख्या बढ