Chapter 11
Chapter 11 — अध्ययन नोट्स
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शेरशाह: जीवन परिचय
व्याख्याशेरशाह: जीवन परिचय
शेरशाह सूरी का जन्म 1486 ई. में बिहार के सासाराम में हुआ था। उसका मूल नाम फरीद था। उसके पिता हसन खान सूरी एक अफगान सरदार थे। शेरशाह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अरबी और फारसी में प्राप्त की। वह बचपन से ही साहसी और बुद्धिमान था। शेरशाह ने अपने पिता के जागीर की देखभाल की और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त किया। शेरशाह ने बिहार के शासक बहार खान लोदी के अधीन कार्य किया और अपनी योग्यता के कारण 'शेरखान' की उपाधि प्राप्त की। बाद में, उसने बहार खान लोदी की हत्या कर बिहार की सत्ता अपने हाथ में ले ली।
- शेरशाह का जन्म 1486 ई. में सासाराम, बिहार में हुआ।
- उसका मूल नाम फरीद था और पिता का नाम हसन खान सूरी था।
- शेरशाह ने अपनी शिक्षा अरबी और फारसी में प्राप्त की।
- उसने बहार खान लोदी के अधीन कार्य किया और 'शेरखान' की उपाधि पाई।
- बिहार की सत्ता प्राप्त करने के लिए बहार खान लोदी की हत्या की।
- शेरशाह का प्रारंभिक जीवन संघर्षपूर्ण था।
- 📌 शेरशाह: अफगान वंश का शासक, वास्तविक नाम फरीद।
- 📌 जागीर: भूमि का प्रशासनिक अधिकार।
शेरशाह का राजनीतिक उत्थान
व्याख्याशेरशाह का राजनीतिक उत्थान
शेरशाह ने बिहार की सत्ता प्राप्त करने के बाद अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए कई रणनीतियाँ अपनाईं। उसने बंगाल के शासक महमूद शाह को हराया और बंगाल की सत्ता भी अपने अधीन कर ली। शेरशाह ने अफगान सरदारों को एकजुट किया और दिल्ली के सुल्तान के खिलाफ विद्रोह किया। 1539 ई. में चौसा की लड़ाई में शेरशाह ने मुग़ल सम्राट हुमायूँ को हराया। इसके बाद 1540 ई. में कन्नौज की लड़ाई में भी हुमायूँ को पराजित किया और दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर लिया। शेरशाह ने अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक सुधार किए और अफगान साम्राज्य की नींव रखी।
- शेरशाह ने बंगाल के शासक महमूद शाह को हराया।
- अफगान सरदारों को एकजुट कर दिल्ली के सुल्तान के खिलाफ विद्रोह किया।
- 1539 ई. में चौसा की लड़ाई में हुमायूँ को पराजित किया।
- 1540 ई. में कन्नौज की लड़ाई में हुमायूँ को पुनः हराया।
- दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर अफगान साम्राज्य की नींव रखी।
- राजनीतिक उत्थान के लिए प्रशासनिक सुधार किए।
- 📌 चौसा की लड़ाई: 1539 ई. में शेरशाह और हुमायूँ के बीच युद्ध।
- 📌 कन्नौज की लड़ाई: 1540 ई. में शेरशाह और हुमायूँ के बीच निर्णायक युद्ध।
शेरशाह का प्रशासनिक ढांचा
व्याख्याशेरशाह का प्रशासनिक ढांचा
शेरशाह ने अपने शासन में प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी। उसने राज्य को कई प्रांतों (सरकार) में विभाजित किया और प्रत्येक प्रांत के लिए एक योग्य अधिकारी नियुक्त किया। शेरशाह ने 'पट्टा' और 'कबूलियत' की व्यवस्था लागू की, जिसमें किसानों को भूमि का पट्ट
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History of India (1200-1740 AD) · Vardhman Mahaveer Open University
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