Ch 16निःशुल्क

Chapter 16

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Calculas and Differential Equations (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 15अध्याय 13 / 13

Chapter 16अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

16.1 अवकल समीकरण का परिचय

व्याख्या

16.1 अवकल समीकरण का परिचय

इस अनुभाग में अवकल समीकरण (Differential Equation) की मूल अवधारणा का परिचय दिया गया है। अवकल समीकरण गणित की वह शाखा है जिसमें किसी फलन और उसके अवकलज (डेरिवेटिव) के मध्य संबंध स्थापित किया जाता है। जब किसी भौतिक, रासायनिक या जैविक घटना का गणितीय निरूपण किया जाता है, तो प्रायः वह अवकल समीकरण के रूप में होता है। उदाहरण के लिए, किसी वस्तु की गति, तापमान में परिवर्तन, रेडियोधर्मी क्षय आदि का अध्ययन अवकल समीकरणों के माध्यम से किया जाता है। अवकल समीकरण दो प्रकार के होते हैं: साधारण अवकल समीकरण (Ordinary Differential Equation, ODE) और आंशिक अवकल समीकरण (Partial Differential Equation, PDE)। इस खंड में मुख्य रूप से साधारण अवकल समीकरणों का अध्ययन किया जाता है, जिसमें केवल एक स्वतंत्र चर और उसके अवकलज शामिल होते हैं। अवकल समीकरणों की डिग्री और क्रम भी महत्वपूर्ण है। क्रम (Order) उस समीकरण में उपस्थित उच्चतम अवकलज की कोटि को दर्शाता है, जबकि डिग्री (Degree) उस अवकल समीकरण में उच्चतम क्रम के अवकलज की घात को दर्शाता है, बशर्ते वह समीकरण अवकलजों के सापेक्ष बहुपद रूप में हो।

  • अवकल समीकरण फलन और उसके अवकलज के बीच संबंध को दर्शाता है।
  • साधारण अवकल समीकरण में केवल एक स्वतंत्र चर होता है।
  • क्रम (Order) उच्चतम अवकलज की कोटि होती है।
  • डिग्री (Degree) उच्चतम क्रम के अवकलज की घात होती है।
  • अवकल समीकरणों का उपयोग विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं के गणितीय निरूपण में किया जाता है।
  • 📌 अवकल समीकरण: वह समीकरण जिसमें फलन और उसके अवकलज सम्मिलित हों।
  • 📌 क्रम (Order): समीकरण में उच्चतम अवकलज की कोटि।
  • 📌 डिग्री (Degree): उच्चतम क्रम के अवकलज की घात।

16.2 अवकल समीकरणों का वर्गीकरण

अवधारणा

16.2 अवकल समीकरणों का वर्गीकरण

इस अनुभाग में अवकल समीकरणों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है। मुख्यतः अवकल समीकरणों को उनके क्रम, डिग्री, चर की संख्या, तथा रैखिकता (Linearity) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। साधारण अवकल समीकरण (ODE) में केवल एक स्वतंत्र चर होता है, जबकि आंशिक अवकल समीकरण (PDE) में दो या दो से अधिक स्वतंत्र चर होते हैं। रैखिक अवकल समीकरण वे होते हैं जिनमें अवकलज और फलन की घात अधिकतम एक होती है, तथा उनके गुणांक केवल स्वतंत्र चर के फलन होते हैं। यदि किसी अवकल समीकरण में अवकलज या फलन की घात एक से अधिक हो, तो वह अवरैखिक (Non-linear) कहलाता है।

  • अवकल समीकरणों का वर्गीकरण क्रम, डिग्री, चर की संख्या, रैखिकता के आधार पर होता है।
  • साधारण अवकल समीकरण में एक स्वतंत्र चर होता है।
  • आंशिक अवकल समीकरण में दो या अधिक स्वतंत्र चर होते हैं।
  • रैखिक अवकल समीकरण में अवकलज व फलन की घात अधिकतम एक होती है।
  • अवरैखिक अवकल समीकरण में घात एक से अधिक हो सकती है।
  • 📌 रैखिक अवकल समीकरण: जिसमें अवकलज व फलन की घात 1 हो।
  • 📌 अवरैखिक अवकल समीकरण: जिसमें अवकलज या फलन की घात 1 से अधिक हो।
  • 📌 साधारण अवकल समीकरण: जिसमें एक स्वतंत्र चर हो।

16.3 अवकल समीकरणों का निर्माण

व्याख्या

16.3 अवकल समीकरणों का निर्माण

इस अनुभाग में बताया गया है कि किस प्रकार किसी भौतिक या गणितीय समस्या से अवकल समीकरण का निर्माण किया जाता है। जब किसी फलन में एक या अधिक अवश्यांक (arbitrary constants) होते हैं, तो उन अवश्यांकों को हटाने के लिए फलन को आवश्यक बार अवकलित किया जाता है। त